श्री लक्ष्मी नारायण सांई बाबा मन्दिर के 54वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत त्रिदिवसीय श्री राम कथा सत्संग का आरंभ हुआ।
BOL PANIPAT : (1 जून) सनौली रोड, नेता जी कालोनी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण सांई बाबा मन्दिर के 54वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत त्रिदिवसीय श्री राम कथा सत्संग का आरंभ हुआ। जिसमंे प्रवचन करते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने राम नाम की महिमा का वर्णन किया।
सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरूआत में स्वामी जी के निर्देशन में मुख्य अतिथि अशोक रेवड़ी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया तथा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि का स्वागत फूलमालाओं द्वारा किया गया। स्वामी श्री दयानन्द सरस्वती जी ने इस अवसर पर रामचरितमानस की चौपाई ‘नाथ मोहि निज सेवक जानी, सप्त प्रस्न मम कहहु बखानी’ में कागभुशुण्डि जी द्वारा रामनाम एवं सत्संग की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार महर्षि वशिष्ठ एवं महर्षि विश्वामित्र की मुलाकात हुई। जिसके बाद महर्षि विश्वामित्र ने महर्षि वशिष्ठ को 1000 वर्ष की तपस्या का फल दिया। जिसके बदले में महर्षि वशिष्ठ ने केवल 2 घड़ी के सत्संग का पुण्यफल ही विश्वामित्र को दिया। यह देखकर विश्वामित्र मुनि ने इसे अपना अपमान समझा। तब दोनों ऋर्षि ब्रह्मा, विष्ण और महेश के पास यह पूछने के लिए गए कि 1000 वर्ष की तपस्या या दो घड़ी का सत्संग इनमें से क्या श्रेष्ठ है। लेकिन इसका उत्तर नहीं मिला। तब वे दोनों शेषनाग के पास गए। शेषनाग ने कहा कि मुझ पर पृथ्वी का भार टिका है यदि इसे आप इसे कुछ देर के लिए उठा लें तो मैं निर्णय कर सकता हूँ। विश्वामित्र ने अपनी 1000 तपस्या के फल से पृथ्वी को उठाना चाहा लेकिन वह नीचे आने लगी और जब वशिष्ठ ने 2 घड़ी के सत्संग के पुण्य के साथ पृथ्वी को उठाना चाहा तो वह अधर में टिकी रही। यह देखकर विश्वामित्र ने सत्संग की सर्वोच्चता को मान लिया। इससे पूर्व ब्रह्मर्षि श्रीनाथ जी महाराज जी ने भी आए हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वचन कहे। इससे पूर्व पुन्न राम बांगा ने ‘मेरे गुरूदेव की कृपा मुझपर एक बार हो जाए’ और वेद कमल ने ‘आप जिनके करीब होते हैं, वो बड़े खुशनसीब होते हैं’ सुनाकर आए हुए भक्तों को भाव विभोर कर दिया। मंच संचालन कैलाश नारंग ने किया।

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