धूमधाम से मनाया गया 13वाँ मूर्ति स्थापना दिवस।
BOL PANIPAT : (30 नवम्बर) आज सनौली रोड, ऋषि कालौनी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण सांई बाबा मन्दिर में 13वाँ मूर्ति स्थापना दिवस बहुत धूमधाम से मनाया गया। जिसमें प्रातः सर्वप्रथम सांई बाबा का दुग्धाभिषेक किया गया। शाम को सांई बाबा की पालकी शोभायात्रा निकाली गई। तत्पश्चात सांई संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ मुख्य अतिथि दर्शन लाल असीजा परिवार तथा मनोचा परिवार ने दीप जलाकर किया। तत्पश्चात सांई संध्या में भजन गायिका बहन स्वीटी द्वारा सांई बाबा के भजन ‘मेरे बाबा तेरी नौकरी, सबसे बढ़िया है सबसे खरी’, ‘सजा दो घर को गुलशन सा, मेरे सरकार आए हैं’, ‘मेरे बाबा मुझपर मेहर करो, मैं दर तेरे ते आई होई हां’ इत्यादि भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। तत्पश्चात स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि प्रार्थना में भाव का महत्व होता है न कि शब्दों का। यदि वेद मंत्रों बोलते समय भाव न हो तो परमात्मा उसे नहीं सुनता और अगर शब्द साधारण हो लेकिन भाव से बोले जाएं तो परमपिता उसे जरूर सुनता है। बच्चे की तोतली भाषा में बोली गई बोली हमें अच्छी इसलिए लगती है क्योंकि उसमें छल नहीं होता। उन्होंने कहा कि एक बार एक छोटे बच्चे ने अपने पिता को प्रार्थना बोलते सुना तो उसने पूछा कि आप क्या कर रहे हो। यह सुनकर पिता बोला कि मैं ईश्वर की प्रार्थना कर रहा हूँ जैसे तुम स्कूल में प्रेयर करते हो। यह सुनकर बच्चा बोला कि मैं भी प्रार्थना करूंगा और धीरे धीरे बुदबुदाने लगा। यह देखकर पिता ने पूछा कि तुम प्रार्थना में क्या बोल रहे थे तो बच्चा बोला मुझे प्रार्थना नहीं आती लेकिन एबीसी आती हैं मैंने उसे ही भगवान को सुना दिया और उनसे कहा कि इन से अपनी प्रार्थना खुद ही बना लेना। आज के कार्यक्रम में कृष्ण लाल लखीना, राजेन्द्र टुटेजा, राजेश लखीना, अनिल रेवड़ी, गुलशन खुराना, गुलशन लखीना, पंकज नारंग, राम नारायण तनेजा, तिलक राज सेठी, कैलाश नारंग, दिनेश ढींगड़ा, जुगल नन्दवानी, सतीश रेवड़ी, रविन्द्र नागपाल, शैंकी सेठी, रिषभ रेवड़ी, पुजारी हरे कृष्ण जोशी, प्रेम चन्द शर्मा आदि उपस्थित थे।

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