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एसडी कॉलेज में नाटक के माध्यम से हरियाणा के शहीद वीरों को दी श्रद्धाजंलि

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at February 13, 2026 Tags: , , , , , , ,

-एसडी कॉलेज में स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा का मंचन करते हुए कलाकार।

BOL PANIPAT , 13 फरवरी। एसडी पीजी कॉलेज के सभागार में 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली गाथा को जीवंत करते हुए 1857 का संग्राम हरियाणा के वीरों के नाम नामक ऐतिहासिक नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया। यह नाटक हरियाणा सरकार के सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग के सौजन्य से प्रस्तुत किया गया, जिसका उद्देश्य देश की आजादी की पहली लड़ाई में हरियाणा के वीर सपूतों, आमजन और किसानों के अमूल्य योगदान को जनमानस तक पहुंचाना रहा। नाटक के मंचन के दौरान कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से उन वीर जवानों की शौर्यगाथा को प्रस्तुत – किया, जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में या तो दर्ज नहीं है या बहुत कम उल्लेखित है। प्रस्तुति ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि 1857 का संग्राम केवल कुछ सैनिकों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें हरियाणा की धरती से जुड़े किसान, कारीगर, व्यापारी और आम नागरिक भी पूरे साहस और समर्पण के साथ शामिल हुए थे।

नाटक में बताया गया कि 10 मई 1857 को अंबाला छावनी से इस महाविद्रोह की चिंगारी भडक़ी, जिसने देखते ही देखते पूरे उत्तर भारत को अपनी चपेट में ले लिया। नाटक के माध्यम से दर्शकों को यह भी बताया गया कि आजादी की इस पहली लड़ाई में विद्रोही सैनिक अकेले नहीं थे। उन्हें हरियाणा के अनेक उद्यमी, समाजसेवी और रियासती शासकों का भरपूर समर्थन मिला। उधमी राम जाट, राव तुलाराम, शदरुद्दीन, मिर्जा गफूर, धन्ना सेठ और नाहर सिंह जैसे वीरों ने विद्रोही सैनिकों को संगठित किया, उन्हें नेतृत्व प्रदान किया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुलकर बगावत की। कलाकारों ने उनके साहस, दूरदर्शिता और बलिदान को इस तरह उकेरा कि दर्शक भाव-विभोर हो उठे। नाटक का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह रहा कि इसमें केवल प्रसिद्ध नामों तक ही सीमित न रहते हुए हरियाणा के उन बेनामी वीरों को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिनकी कुर्बानियां इतिहास में दर्ज नहीं हो सकीं। प्रस्तुति के दौरान मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा, प्रकाश व्यवस्था और पृष्ठभूमि संगीत ने नाटक को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

इस अवसर पर एसडी कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने नाटक की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोडने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम में एसडी कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस मौके पर डीआईपीआरओ सुनील बस्ताडा, एआईपीआरओ दीपक पाराशर भी उपस्थित रहे। इन्होंने विभाग की ओर से कार्यक्रम की जानकारी दी।

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