Friday, April 17, 2026
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चाकू से गला रेतकर रिफाइनरी में हुई श्रमिक की हत्या मामले में 29 साल बाद पुलिस को मिली सफलता.

By LALIT SHARMA , in Crime in Panipat , at February 1, 2024 Tags: , , , , ,

-हत्यारोपी दो सगे भाई बिहार के चंपारण से गिरफ्तार

BOL PANIPAT : 01 फरवरी 2024, पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए सीआईए वन प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक कुमार की टीम ने रिफाइनरी में वर्ष 1995 में हुई श्रमिक की हत्या मामले में फरार दो आरोपियों को बुधवार को बिहार के चंपारण जिला से गिरफ्तार करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। दोनों आरोपी सगे भाई है। वारदात के समय एक आरोपी नाबालिग था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने वीरवार को सीआईए वन स्टाफ में प्रेसवार्ता कर प्रकरण की जानकारी देते हुए बताया कि पूछताछ में दोनों आरोपियों ने पुलिस को बताया कि मृतक शम्भू यादव रिश्तेदारी में उनके बड़े भाई का साला था। उन दोनों को शम्भू यादव ही काम के लिए गांव से पानीपत रिफाइनरी लेकर आया था। उन दोनों भाई ने शम्भू से काम के 1500 रूपये मांगे तो उसने पैसे देने से मना कर दिया। पैसों को लेकर उनकी शम्भू के साथ कहासुनी हो गई। इसकी रंजिश रखते हुए आरोपी दोनों भाईयों ने मिलकर 26 जुलाई की देर रात झुग्गी के बाहर सो रहे शम्भू की चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी और मौके से फरार हो गए थे। शिकायत के आधार पर थाना मतलौडा में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अभियोग दर्ज कर पुलिस द्वारा कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई थी।

थाना मतलौडा में वर्ष 1995 जुलाई महीने में मुख्तयार निवासी रसीदपुर छपार बिहार ने शिकायत देकर बताया था कि वह रिफाइनरी में सीसीपीएल कंपनी में श्रमिकों पर मुंशी लगा हुआ है। कंपनी में काम करने वाले श्रमिक आफिस के नजदीक ही झुग्गी डालकर रहते है। 26 जुलाई 1995 की रात श्रमिक कारपेंटर शंम्भू यादव निवासी रतनपुर पूर्वी चंपारण बिहार खाना खाकर झुग्गी के बाहर सो गया था। अल सुबह करीब 4 बजे राम सेवक निवासी परराही सीतामाई ने उसको क्वार्टर पर आकर बताया कि शंम्भू यादव की अज्ञात युवक ने गले पर तेजधार हथियार से चोट मारकर हत्या कर दी। राम सेवक के साथ उसने मौके पर जाकर देखा तो झुग्गी के आगे शंम्भू यादव का शव खुन से लथपथ हालत में पड़ा था। जिसकी गर्दन पर चोट के निशान थे। शिकायत पर थाना मतलौडा में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच व आरोपियों की पहचान के प्रयास शुरू कर दिए थे।

मृतक के छोटे भाई ने एक साल बाद बताया था उसने जगतराय व बली राय को हत्या करते देखा था

मृतक का छोटा भाई नगीना भी झुग्गी में अपने भाई के साथ रहता था। नगीना ने वारदात के एक साल बाद सितम्बर 1996 में माननीय न्यायालय में बताया कि उसने जगतराय व बली राय को उसके भाई शम्भू की हत्या करते हुए देखा था। पुलिस ने दोनों आरोपियों की धरपकड़ के लिए उनके विभिन्न ठीकानों पर दंबिश दी। दोनों आरोपियों कही कोई सुराग नही लगा। माननीय न्यायालय ने आरोपी जगतनाराण को वर्ष 1996 में व आरोपी बली राय को 1997 में उद्धघोषित आरोपी (पीओ) घोषित किया था।

आरोपियों की फोटो ना होने से इनको पकड़ना भी पुलिस के लिए थोड़ा चुनौती था

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने बताया कि आरोपियों की रिकार्ड फाइल में कोई फोटो ना होने से पुलिस के लिए आरोपियों को पकड़ना भी थोड़ा चुनौती थी। सीआईए वन प्रभारी इंस्पेक्टर दीपक ने विवेक से कार्य करते हुए स्टाफ की एक टीम को आरोपियों की धरपकड़ के लिए दो महीने पहले बिहार में आरोपियों के गांव भेजा। पुलिस टीम ने करीब एक सप्ताह वहा रहकर जानकारी जुटाई। इस दौरान जानकारी मिली की दोनों आरोपी कभी कभी छुप कर रात को गांव में आते है। सीआईए वन की टीम एक सप्ताह पहले दोबारा से बिहार गई। आरोपी जगतराय छुप कर गांव आया तो सीआईए वन पुलिस टीम ने मिली गुप्त सूचना पर दबिश देकर आरोपी जगतराय को काबू किया। इसके बाद वारदात में शामिल उसके छोटे भाई आरोपी बली राय को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने शम्भू यादव की चाकू से गला रेत कर हत्या करने की वारदात को अंजाम देने बारे स्वीकारा। वारदात के समय आरोपी बली राय नाबालिग था।

8 साल मथुरा के आश्रम में छुपकर काटी फरारी

पूछताछ में आरोपियों से खुलासा हुआ वारदात के बाद दोनों आरोपियों ने शुरू के 8 साल एक साथ मथुरा के एक आश्रम में छुपकर फरारी काटी और दोनों इस दौरान कभी भी अपने घर नही गए। इसके बाद आरोपी बली राय दिल्ली के बसंत कुंज में किसी के यहा नौकर के रूप में काम करने लगा। आरोपी जगतराय ने दिल्ली, पंजाब व बिहार में भी फरारी काटी। बाद में दोनों आरोपी कभी कभी चोरी छिपे रात को घर आने जाने लगे।

पुलिस ने प्रारंम्भिक पूछताछ के बाद वीरवार को दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश किया जहाँ से उन्हें 1 दिन के पुलिस रिमांड पर हासिल किया। रिमाड के दौरान पुलिस आरोपियों से गहनता से पूछताछ करेंगी।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए ज़िला पुलिस ने बीते वर्ष 21 मोस्ट वांटेड, 200 पीओ व 215 बेल जंपर अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाख़ों के पीछे भेजने का काम किया है। उन्होंने कहा कि अपराधी कही भी छुप ले आज नही को कल पकड़ा ही जाएगा।

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