धैर्यशील, संयमित और अनुशासित जीवन शैली से कैंसर पर विजय संभव: डॉ नमित कालरा
–बेटी की डोली बाद में उठाओ पहले कैंसर प्रतिरोधी वैक्सीन लगवाओ: डॉ अजय डबास
–साइबर क्राइम शिकार व्यक्ति पुलिस की मदद लेने में संकोच, शर्म और देरी न करे: डॉ आनंद कुमार
BOL PANIPAT, 23 अक्टूबर,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकता शिविर (नेशनल इंटीग्रेशन कैंप) के तीसरे दिन बतौर मुख्य वक्ता डॉ नमित कालरा कंसलटेंट सर्जिकल ऑन्कोलॉजी बीएलके मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल नई दिल्ली और डॉ अजय डबास प्रिवेंटिव ऑन्कोलॉजी बीएलके मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल नई दिल्ली ने शिरकत की और 17 राज्यों से आये स्वयंसेवकों को अपने चिकित्सीय अनुभव का लाभ दिया । डॉ नमित कालरा ने अपना व्याख्यान ‘कैंसर और इसकी रोकथाम’ विषय पर और डॉ अजय दबास ने ‘कैंसर का ईलाज और स्वास्थ्य बीमें के फायदे’ विषय पर दिया । विशिष्ट अतिथि राजेश गोयल प्रख्यात सामाजिक विचारक और कैंप समन्वयक डॉ आनंद कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविधालय ने दूसरे सत्र में व्याख्यान दिये । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ तेनजिन नोर्जोम भूटिया, डॉ शशीकला कुमारी, डॉ एन मंजू भार्गवी, डॉ परमिंदर कौर और डॉ एसके वर्मा ने पौधा-रोपित गमला भेंट करके किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी नेकिया ।सात दिवसीय कैंप के तीसरे दिन सभी स्वयंसेवकों ने प्रातः काल में योग और ध्यानशाळा में हिस्सा लिया और श्रमदान किया । सांयकालीन सत्र की सांस्कृतिक गतिविधियों में सिक्किम, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश से आयें एनएसएस स्वयंसेवको ने सांस्कृतिक गतिविधियाँ पेश की । आज आयोजित भाषण और गायन प्रतियोगिता में स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया । भाषण प्रतियोगिता की जूरी में डॉ गोपाल लकुम (गुजरात), प्रो नागेन्द्र कुमार (झारखंड) और डॉ शशिकला कुमारी (बिहार) शामिल थे जबकि गायन प्रतियोगिता का फैसला प्रो फारुख अहमद वनी (जम्मू और कश्मीर), प्रो आरती दुबे (मध्य प्रदेश) और प्रो युपेश कुमार (छत्तीसगढ़) ने किया ।
डॉ नमित कालरा ने अपने व्याख्यान में कैंसर के कारणों, इसकी रोकथाम और बचाव के उपायों पर विस्तार से बोलते हुए कहा कि धूम्रपान, तम्बाकु, सुपारी, पान-मसाला, गुटका, शराब आदि का सेवन कैंसर को बढ़ावा देता है । विटामिन युक्त और रेशे वाला पौष्टिक भोजन कैंसर की रोकथाम में बहुत सहायक है बशर्ते इनमे कीटनाशक एवं खाद्य संरक्षण रसायणों का प्रयोग न किया गया हो । अधिक तलें, भुने, बार-बार गर्म किये तेल में बने भोजन से भी कैंसर हो सकता है । वजन का बढ़ना, नियमित व्यायाम न करना, साफ-सुथरे और प्रदूषण रहित वातावरण में न रह पाना भी कैंसर को दावत देता है । प्रारम्भिक अवस्था में कैंसर का निदान काफी हद तक कामयाब रहता है । मुंह में सफेद दाग, बार-बार होने वाले घाव और शरीर के किसी भी अंग या हिस्से में गांठ होने पर तुरन्त जांच करवानी चाहिए क्यूंकि यह कैंसर के होने का लक्षण हो सकते है । उन्होनें कहा कि प्रारम्भिक अवस्था में निदान होने पर कैंसर का सम्पूर्ण एवं कामयाब उपचार सम्भव है । उन्होनें कैंसर के प्रति जागरूकता और कैंसर के पीछे की अनुवांशिकी विषयों पर बोलते हुए कहा कि कैंसर रोगों का एक वर्ग है जिसमें कोशिकाओं का एक समूह अनियंत्रित वृद्धि, रोग और कभी कभी अपर-रूपांतरण जैसे गुणों को प्रदर्शित करता है । कैंसर सभी उम्र के लोगों को यहाँ तक कि भ्रूण को भी प्रभावित कर सकता है । परन्तु कैंसर का जोखिम उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा बढ़ता है । लगभग सभी कैंसर रूपांतरित कोशिकाओं के आनुवंशिक पदार्थ में असामान्यताओं के कारण पैदा होते हैं । ये असामान्यताएं ज्यादातर तत्वों जैसे तम्बाकू धूम्रपान, विकिरण, रसायन आदि के कारण हो सकती है । अन्य आनुवंशिक असामान्यताएं भी डीएनए में त्रुटि का कारण बन सकती हैं जिससे कैंसर हो सकता है । कैंसर के गुण आनुवंशिक रूप से प्राप्त हो सकते हैं और हम मान सकते है कि कैंसर जन्म से ही सभी कोशिकाओं में उपस्थित होता हैं । किन्तु धैर्यशील, संयमित और अनुशासित जीवन से कैंसर पर विजय संभव है बशर्ते हम पौष्टिक भोजन ले, नियमित व्यायाम करे, जंक फ़ूड से परहेज करे और साफ़-सुथरे वातावरण में रहे । कैंसर के आम मिथकों और तथ्यों को छात्र-छात्राओं के साथ साझा करते हुए उन्होनें कहा कि आमतौर पर लोग यह सोचते हैं कि कैंसर के उतक केवल स्वास्थ्य का मसला होता है जबकि वास्तविकता इसके बिलकुल उलट है ।
डॉ अजय डबास ने कहा कि सामान्य लोग यह भी मानते है कि कैंसर धनवान और बुजुर्ग लोगों की बीमारी है जबकि असल में यह एक वैश्विक रोग है जो किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है । आम आदमी को लगता है कि कैंसर से पीड़ित होने का मतलब एक सजा पाना है लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर कैंसर उपचार योग्य है । कैंसर को अपनी किस्मत मान लेना मूर्खतापूर्ण सोच है क्यूंकि जयादातर मामलों में यदि कैंसर का सही समय पर पता चल जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया या रोका जा सकता है । हमें समय रहते किसी अछि कंपनी से पूरे परिवार का स्वास्थ्य बीमा जरुर करवाना चाहिए । फ़ास्ट फ़ूड की जगह पोषक भोजन खाना चाहिए । ‘बेटी की डोली बाद में उठाओं पहले कैंसर प्रतिरोधी वैक्सीन लगवाओ’ ।
राजेश गोयल ने कहा कि राष्ट्रीय एकता शिविर का हिस्सा बनने से युवाओं को अत्यंत लाभ मिलते है । न सिर्फ युवा अपने टैलेंट का प्रदर्शन करते है बल्कि दूसरे राज्यों से आये कार्यकर्ताओं से मिलकर उनके व्यक्तित्व में भी निखर आ जाता है । विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव, भाईचारा, और साहस की भावना का विकास होता है और उन्हें एक बेहतर इंसान बनता है ।
डॉ आनंद कुमार ने कहा कि यदि ओटीपी की मदद से कोई हमारे पैसे निकाल ले तो हमें बिना वक्त गवाएं 1930 साइबर हेल्प लाइन नंबर पर कॉल करनी चाहिए । जितनी जल्दी हम अपनी शिकायत दर्ज करवाएंगे उतना ही फायदा हमें होगा । हमें भूल कर भी अपना ओटीपी किसी को नहीं देना चाहिए और अनचाहे लिंक एवं इमेल पर हमें क्लिक नहीं करना चाहिए ।. हमें आसान संख्या वाले, अपना जन्मदिन, अपनी गाड़ी के नंबर आदि जैसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए । साइबरफिशिंग के माध्यम से किसी के पास स्पैम ईमेल भेजी जाती है ताकि वह व्यक्ति अपनी निजी जानकारी दे और उस जानकारी से फिर उसी का नुकसान कर दिया जाए । ऐसी इमेल ज्यादातर आकर्षक होती है । डेटा उल्लंघन एक सुरक्षा उल्लंघन है जिसमें संवेदनशील, संरक्षित या गोपनीय डेटा की प्रतिलिपि बनाई, प्रेषित, देखी या चुराई जाती है । ऐसी घटनाएं व्यक्तिगत लाभ या द्वेष (ब्लैक हैट्स), संगठित अपराध, राजनीतिक कार्यकर्ताओं या राष्ट्रीय सरकारों के लिए हैक करने वाले व्यक्तियों द्वारा की जाती है । फोटो मोर्फिंग तकनीक और फेक यूआरएल पर भी उन्होनें विस्तार से चर्चा की और इनसे बचने की सलाह दी ।
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जिसमें कंप्यूटर, आईओटी, मोबाईल, टेब और नेटवर्क इत्यादि शामिल होते है । किसी भी कंप्यूटर का अपराधिक स्थान पर मिलना या कंप्यूटर से कोई अपराध करना ही साइबर क्राइम कहलाता है । किसी की निजी जानकारी को कंप्यूटर से निकाल लेना या फिर चोरी कर लेना भी साइबर अपराध का ही हिस्सा है ।

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