Saturday, April 18, 2026
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26 जनवरी महज कैलेंडर में दी गई एक डेट नहीं-जस्टिस ललित बत्रा

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at January 26, 2025 Tags: , , , , ,

-तीन नए आपराधिक कानूनों के आधार में दंड की जगह न्याय-जस्टिस ललित बत्रा

-गणतंत्र दिवस भाषाओं, परंपराओं की विविधताओं के बाद भी सांस्कृतिक एकता का उत्सव

-केस की सुनवाई कर न्याय भी करेंगे और समाज के प्रति दायित्वों को भी निभायेंगे-जस्टिस ललित बत्रा

BOL PANIPAT : चंडीगढ़ 26 जनवरी- हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने कार्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ गणतंत्र दिवस मनाया. तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान के बाद जस्टिस ललित बत्रा ने अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस महज कैलेंडर में दी गई एक डेट नहीं है।आज का दिन एक ऐसा अवसर है जब हमें भारत के नागरिक होने के नाते मिलने वाले वाले अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी याद करना चाहिए। कानूनी ढांचे से परे, गणतंत्र दिवस हमारे देश की भिन्न-भिन्न भाषाओं, परंपराओं की विविधताओं के बाद भी सांस्कृतिक एकता  का उत्सव है।

 जस्टिस ललित बत्रा ने अपने संबोधन में बोला कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम दिए संदेश में महामहिम राष्ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू ने भी हमें याद दिलाया है कि न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता केवल सैद्धांतिक अवधारणाएं नहीं हैं जिनका परिचय हमें आधुनिक युग में ही प्राप्त हुआ हो।भारत के गणतांत्रिक मूल्यों का प्रतिबिंब हमारी संविधान सभा की संरचना में ही दिखाई देता है।समावेशी विकास हमारी प्रगति की आधारशिला है जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर अधिक से अधिक देशवासियों तक पहुंचता है।भारत सरकार द्वारा Indian Penal Code (IPC), Criminal Procedure Code (CrPC) और Indian Evidence Act (IEA) के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को लागू करने का निर्णय सर्वाधिक उल्लेखनीय है।जस्टिस ललित बत्रा ने बताया कि 01 जुलाई 2024 से लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के आधार में दंड की जगह न्याय, देरी की जगह त्वरित ट्रायल और न्याय है।पहले के कानूनों में सिर्फ पुलिस के अधिकारों की रक्षा की गई थी लेकिन नए आपराधिक कानूनों में पीड़ितों और शिकायतकर्ता के अधिकारों की भी रक्षा करने का प्रावधान है।

 समारोह में बोलते हुए जस्टिस ललित बत्रा का कहना था कि हमारे गणतंत्र का 75वां वर्ष, कई अर्थों में, देश की यात्रा में एक ऐतिहासिक पड़ाव है।यह उत्सव मनाने का विशेष अवसर है, जैसे हमने, स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे होने पर, “आजादी का अमृत महोत्सव” के दौरान अपने देश की अतुलनीय महानता और विविधतापूर्ण सांस्कृतिक एकता का उत्सव मनाया था। वैसे ही आज के दिन हम संविधान के प्रारंभ का उत्सव मना रहे है।संविधान की प्रस्तावना “हम, भारत के लोग”, इन शब्दों से शुरू होती है। ये शब्द, हमारे संविधान के मूल भाव अर्थात लोकतंत्र को रेखांकित करते हैं। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था, लोकतंत्र की पश्चिमी अवधारणा से कहीं अधिक प्राचीन है। इसीलिए ही भारत को “लोकतंत्र की जननी” कहा जाता है।

 अपने संबोधन में जस्टिस ललित बत्रा ने बताया कि मैंने 27 नवंबर 2024 को हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार संभाला था।सितंबर 2023 से लेकर नवंबर 2024 तक लगभग 14 महीनों से आयोग गठित नहीं था, इसलिए काफ़ी केस लंबित थे।हरियाणा मानव अधिकार आयोग में मेरी कुर्सी के पीछे राष्ट्रीय चिन्ह “अशोक स्तंभ” लगा है और उसके नीचे “सत्यमेव जयते” भी लिखा है।कार्यभार संभालने के बाद “अशोक स्तंभ” और “सत्यमेव जयते” से प्रेरणा लेते हुए मैंने आयोग के दोनों सदस्यों श्री कुलदीप जैन और श्री दीप भाटिया के साथ संकल्प लिया कि- सभी लंबित केसों की जल्द सुनवाई कर न्याय करेंगे और साथ ही समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी निर्वहन करेंगे।

 आगे बोलते हुए हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने बताया कि दिसंबर में हमने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग द्वारा दिल्ली में आयोजित महामहिम राष्ट्रपति आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी के कार्यक्रम में भाग लिया था।इस कार्यक्रम के साथ ही भारत के अन्य प्रदेशों के मानव अधिकार आयोगों के प्रतिनिधियों की बैठक भी आयोजित की गई थी।उस बैठक में सम्मिलित सभी प्रतिनिधियों ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग के कार्यों का लोहा माना था।हम चाहते है कि भारत, हरियाणा और हमारे आयोग का मान ऐसे ही बढ़ता रहे।

बॉक्स: अपने संबोधन में जस्टिस ललित बत्रा ने बताया कि हम  human rights पर जागरूकता फैलाने के लिए  प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, और सेमिनार आयोजित करते हैं। इन अभियानों के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हर नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों से परिचित हो।मैं यह साझा करना चाहूंगा कि Haryana Human Rights Commission के दोनों सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया के साथ हाल ही में अपने कार्यक्षेत्र का  विस्तार करते हुए  कई सुधारात्मक कदम उठाए हैं। पिछले दो महीनों में, आयोग ने अंबाला और कुरुक्षेत्र की जेलों का दौरा किया और वहां की स्थितियों का गहराई से निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण  कमियां पाई गईं, जिनमें कैदियों की मूलभूत सुविधाओं और जेल प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता थी।आयोग ने इन समस्याओं को गंभीरता से लिया और जेल सुधार से संबंधित सिफारिशें तैयार कीं। इन सिफारिशों को डायरेक्टर जनरल, प्रिज़न को भी भेजा गया है, ताकि आवश्यक कदम उठाकर इन खामियों को दूर किया जा सके। हमारा मानना है कि जेलों में रहने वाले inmates के भी human rights  हैं, और उनके जीवन को गरिमापूर्ण बनाना हमारा कर्तव्य है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मैं आयोग के सभी अधिकारियों, मीडिया के साथियों और जन-सामान्य से अपील करता हूँ – आप भी जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए सजक रहे। आप हरियाणा मानव अधिकार आयोग में शिकायत या अर्जी आने की इंतज़ार मत करें।अगर जन-सामान्य के अधिकारों के हनन का मामला आपके संज्ञान में आता हमें बताओं।आयोग सू-मोटो एक्शन लेगा।पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग व नगर पालिकाओं के अधिकार क्षेत्रों से संबंधित कुछ मामले हमारे संज्ञान में है।हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने सू-मोटो एक्शन लेते हुए नोटिस जारी कर रिपोर्ट माँगी हुई है।अगर इन विभागों ने जनता के कार्यों में कोताही की होगी तो फिर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी।

हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा ने बताया कि लंबित सभी केसों की सुनवाई जल्द हो और नए आने वाले केसों में भी देरी न हो इसलिए मैं और आयोग के दोनों सम्मानित सदस्य, सिंगल बेंच में केसों अलग-अलग सुनवाई करते है और मामला बड़ा हो तो फुल बेंच में एक साथ सुनवाई भी करते है।दक्षिणी हरियाणा के छ: जिलों से संबंधित मामलों के लिए महीने में दो बार गुरुग्राम में कैम्प कोर्ट भी लगाते है। दिसंबर-जनवरी मिलाकर अभी तक हमने गुरुग्राम में तीन बार कैम्प-कोर्ट भी लगाई है। 27 जनवरी को भी गुरुग्राम में कैम्प-कोर्ट लगेगी।कार्यभार संभालने के 60 दिनों के भीतर ही गुरुग्राम में चौथी बार कैम्प-कोर्ट लग रही है।

 हरियाणा मानव अधिकार आयोग के प्रोटोकॉल,सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ.पुनीत अरोड़ा ने बताया कि गणतंत्र दिवस के समारोह में डीजीपी संजीव कुमार जैन, पूनम बत्रा, डिप्टी रजिस्ट्रार वरिंदर शाही,  संयुक्त रजिस्ट्रार अरुण ठाकुर, एडिशनल डायरेक्टर सतपाल चौहान, सुपरिटेंडेंट आनंद सिंह, आयोग के अधिकारीगण, इन्वेस्टिगेशन विंग के पुलिस अधिकारी तथा कर्मचारी भी सम्मिलित हुए।

 डिप्टी रजिस्ट्रार वरिंदर शाही ने गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारियों में लगे व उपस्थिति सभी अधिकारियों, कर्मचारियों का आभार प्रकट करने के लिए राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की रचना ‘भारत माता’ की प्रसिद्ध पंक्तियों – “जो भरा नहीं है भावों से, जिसमें बहती रसधार नहीं, वह हृदय नहीं पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं” का चयन किया। उन्होंने कहा कि हमारे चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा, दोनों सदस्य कुलदीप जैन व दीप भाटिया प्रेरक व्यक्तित्व के स्वामी होने के  साथ-साथ न्यायिक क्षेत्र में भी मजबूत पकड़ रखते है। इनके साथ कार्य करके हम बहुत कुछ सीखने का प्रयास करेंगे।

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