एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व कैंसर दिवस पर एक दिवसीय सेमीनार काआयोजन
डॉ ललित वर्मा डिप्टी सीएमओ पानीपत ने की ओरल कैंसर के कारणों और इससे बचने के उपायों पर विस्तृत चर्चा
जागरुकता कैंसर के विरुद्ध लड़ाई का प्रथम हथियार है: डॉ ललित वर्मा, डिप्टी सीएमओ
BOL PANIPAT , 04फरवरी : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्व कैंसर दिवस के अवसर पर एक दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया गया जिसमे बतौर मुख्य वक्ता डॉ ललित वर्मा डिप्टी सीएमओ सिविल हॉस्पिटल ने शिरकत की और ओरल(मुंह)कैन्सरहोने के कारणों और इससे बचने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की और अपने अनुभव साझा किये.प्राचार्यडॉ अनुपम अरोड़ा के साथ-साथ विज्ञान संकाय से डॉ प्रियंका चांदना, डॉ रवि कुमार, डॉ राहुल जैन, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया और डॉ बलजिंदर सिंह भी सेमीनार का हिस्सा बने. डॉ ललित वर्मा ने विद्यार्थियों के मन में व्याप्त कैंसर के भय को दूरकर उनके सवालों के जवाब भी दिए. विदित रहे की अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ ने जिनेवा स्विट्जरलैंड में 1933 में पहली बार विश्व कैंसर दिवस मनाया था. आज का दिन कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने, लोगों को शिक्षित करने और इस रोग के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए दुनिया भर में सरकारों और व्यक्तियों को समझाने तथा लोगों की जान बचाने के लिए मनाया जाता है. आजके सेमीनार का मुख्य विषय ओरल कैंसर के कारणों और इससे बचने के उपायों पर केन्द्रित रहा.प्रत्येक वर्ष की तरह 2023वर्ष के विश्व कैंसर दिवस का थीम ‘क्लोज़द केयर गैप’ हैऔर इस थीम के माध्यम से कैंसर के प्रति जंग के लिए सभी नागरिको को समान देखभाल एवं स्वास्थ्य सेवाओं तक समुचित पहुँच को सुनिश्चित करने की मुहिम चलायी जा रही है. सेमिनारमें कॉलेज के बीएससी प्रथम, द्वितीय और तृतीय के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया जिन्हें डॉ ललित वर्मा ने कैंसर से लड़ने और दूसरों को कैंसर के प्रति जागरूक करने की शपथ भी दिलाई.
डॉ ललित वर्मा डिप्टी सीएमओ सिविल हॉस्पिटल पानीपत ने ओरल अर्थात मुंह के कैंसर पर बोलते हुए कहा कि धूम्रपान, तम्बाकु, सुपारी, पान-मसाला, गुटका, शराब आदि का सेवन मुंह के कैंसर को बढ़ावा देता है. मुंह में कैंसर के लक्षणों पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि मुंह में सफ़ेद या लाल चक्कत्ता या घाव होना, किसी जगह पर त्वचा का कड़ा हो जाना, ऐसे घाव जो 1 माह से अधिक अवधि तक न भरे, मुंह में श्लेषमा का पीला पड़ जाना,मसालेदार भोजन का मुंह के अन्दर सहन न होना, मुंह खोलने में कठिनाई, जीभ को बाहर निकालने में कठिनाई, आवाज़ में परिवर्तन, अतुधिक लार का श्राव, चबाने और निगलने में कठिनाई आदि ओरल कैंसर के लक्ष्ण है. आईने के सामने खड़ेहोकर हम खुद भी इन सभी लक्षणों की पहचान कर सकते है. उन्होनें कहा कि विटामिन युक्त और रेशे वाला पौष्टिक भोजन कैंसर की रोकथाम में बहुत सहायक है बशर्ते इनमे कीटनाशक एवं खाद्य संरक्षण रसायणों का प्रयोग न किया गया हो. अधिक तलें, भुने, बार-बार गर्म किये तेल में बने भोजन से भी कैंसर हो सकता है. वजन का बढ़ना, नियमित व्यायाम न करना, साफ-सुथरे और प्रदूषण रहित वातावरण में न रह पाना भी कैंसर को दावत देता है. प्रारम्भिक अवस्था में पता चलने पर कैंसर का निदान काफी हद तक कामयाब रहता है. कोई भी लक्षण नजर आने पर हमें तुरन्तअपनीजांच करवानी चाहिए क्यूंकि जल्द कैंसर का पता चलने पर इसके ठीक होने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा किजो व्यक्ति सदा खुश रहता है उसे न सिर्फ कैन्सर होने की सम्भावना कम रहती है बल्कि अगर हो भी जाए तो खुशदिल व्यक्ति बेहतर तरीके से कैन्सर से लड़कर इस जंग को जीत सकताहै. हमेशा खुश रहना कैन्सर से खिलाफ सबसे सर्वोत्तम दवाई और इलाज है. उन्होनें कहा किदुनिया भर में हर साल लगभग 76 लाख लोग कैंसर से दम तोड़ते हैं जिनमें से 40 लाख लोग समय से पहले अर्थात 30 से 69 वर्ष आयु वर्ग में ही मृत्युको प्राप्त हो जाते हैं. समय की मांग है कि इस बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ कैंसर से निपटने की व्यावहारिक रणनीति को विकसित किया जाए. यदि विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2025 तक कैंसर के कारण समय से पहले होने वाली मौतों में 25 प्रतिशत कमी के लक्ष्य को हासिल किया जाए तो हम लगभग 15 लाख जीवन प्रति वर्ष बचा सकते है. कैंसर जैसी जानलेवाबीमारी के खतरे से बचने और इससे जुड़े एहतियात के कदम उठाने, लोगों को इसके लक्षणों की जाँच करने के लिये निर्देश देने के साथ-साथ कैंसर से लाखों लोगो के जीवन को बचाने के लिये 4 फरवरी के दिन को एक उत्सव के रूप में मनाया जाना चाहिए. एसडीपीजीकॉलेज ने कैन्सर पर सेमिनारआयोजित करके अपने सामाजिक बोध और दायित्व का निर्वाह किया है.
डॉ रवि रघुवंशी ने कैंसर के प्रति जागरूकता और कैंसर के पीछे की अनुवांशिकी विषय पर बोलते हुए कहा कि कैंसर रोगों काएक वर्ग हैजिसमें कोशिकाओं का एक समूह अनियंत्रित वृद्धि, रोग और कभी-कभी अपररूपांतरण जैसे गुणों को प्रदर्शित करता है. कैंसर सभी उम्र के लोगों कोयहाँ तक कि भ्रूण को भी प्रभावित कर सकता है. परन्तु कैंसर का जोखिम उम्र बदने के साथ ज्यादा बढ़ता है. लगभग सभी कैंसर रूपांतरित कोशिकाओं के आनुवंशिक पदार्थ में असामान्यताओं के कारण पैदा होते हैं. ये असामान्यताएं कैन्सर पैदा करने वाले तत्वों जैसे तम्बाकू धूम्रपान, विकिरण, रसायन आदि के कारण हो सकती है. अन्य आनुवंशिक असामान्यताएं भी डीएनए में त्रुटि का कारण बन सकती हैं जिससे कैंसर हो जाताहै.
वेबिनार में डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया और दीपक मित्तल ने भी सेमिनारमें हिस्सा लिया और कैन्सर से जुड़े सवाल पूछे.

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