Wednesday, June 17, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप का चौथा दिन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 4, 2023 Tags: , , , , ,

एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को किया बेटे-बेटियों को स्कूल में पढ़ाने हेतु प्रेरित

आग के कई प्रकार है और इसीलिए इसके बुझाने के तरीकों और उपकरणों का ज्ञान होना जरुरी: धर्मेन्द्र सिंह

युवा उम्र में समाज और देश की सोचना एक गौरवपूर्ण गुण: सोनू कुमार, सरपंच

पानीपत, 04 मार्च. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार 1 से 7 मार्च तक चलने वाले सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप के चौथे दिन स्वयंसेवकों ने ग्राम काबड़ी में घर-घर जाकर ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं को कन्याओं और बेटियों स्कूल और कॉलेज में पढ़ाने हेतु प्रेरित किया. ग्रामीणों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और छात्रवृति की जानकारियाँ भी दी गई ताकि ग्रामीण जानकारी के अभाव में अपने बच्चों को शिक्षा से वंचित न रखें. सुबह के सत्र में सभी एनएसएस कार्यकर्ताओं को योग और शारीरिक प्रशिक्षण दिया गया. तत्पश्चात कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा के मार्गदर्शन और एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर एवं वाईआरसी अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी की अगुआई में एनएसएस स्वयंसेवकों ने ग्राम काबड़ी जाकर सबसे पहले जल संरक्षण और पर्यवरण को बचाने का आह्वान किया. विशिष्ट उपस्थिति में धर्मेन्द्र सिंह अग्निचालक बंधु फायर और सेफ्टी विभाग थर्मल पानीपत ग्राम काबड़ी पहुंचे और उन्होनें एनएसएस कार्यकर्ताओं के साथ लोगों को आग के प्रकार और उन्हें कैसे बुझाया जाए बारे व्यावहारिक ज्ञान दिया और अग्निशमन यंत्र को सभी को चलाना सिखाया. मेहमानों का स्वागत सरपंच सोनू कुमार और अन्य वरिष्ठ ग्रामीणों ने किया.
धर्मेन्द्र सिंह अग्निचालक बंधु फायर और सेफ्टी विभाग थर्मल पानीपत ने व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए कहा कि आग चार प्रकार की होती है और इसीलिए उसकी प्रकृति और उसके बुझाने के तरीके और उपकरण अलग-अलग है. पहली आग को जनरल फायर कहते है. कोयला, कपड़ा और कागज की आग इसी श्रेणी में आती है और इसे हम पानी और कार्बन-डाई-ऑक्साइड आधारित अग्निशामक से बुझा सकते है. दूसरी आग तेल की होती है जैसे डीजल, पेट्रोल की आग. इसे हम डीसीपी एवं फोम आधारित अग्निशामक से बुझाते है. रासायनिक एवं बिजली के शॉर्ट सर्किट की आग तीसरी श्रेणी में आती हैं और इसे डीसीपी एवं कार्बन-डाई-ऑक्साइड आधारित अग्निशामक से बुझाते है. चौथी आग धातु की आग होती है और इसे भी डीसीपी से बुझाते है. उन्होनें कहा कि आग के लिए आवश्यक ईंधन भोजन का काम करता है और यदि ईंधन को आग से अलग कर दिया जाए तो आग खुद-ब-खुद मर जाएगी. आग लगने में ऑक्सीजन प्राणवायु का काम करता है और यदि किसी भी तरीके से ऑक्सीजन को आग से अलग कर दिया जाये तो इस के अभाव में आग दम घुटने के कारण बुझ जाती है. आग लगने के ताप को यदि कम या न्यूनतम कर दिया जाए तो भी आग बुझ जाती है. कुछ आगों को हम पीट-पीट कर भी बुझा सकते है जैसे घास, पत्ते या जंगल की आग.

सोनू कुमार काबडी ग्राम सरपंच ने कहा कि उन्हें एसडी पीजी कॉलेज के युवाओं पर गर्व है. युवा उम्र में समाज और देश की सोचना एक गौरवपूर्ण गुण है जो सभी युवाओं को विकसित करना चाहिए. उन्होनें सभी एनएसएस कार्यकर्ताओं को 7 दिवसीय कैंप में पूरी लगन से कार्य करने को कहा.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आज का ज्ञान वाकई में ग्रामीणों के लिए बहुत लाभप्रद सिद्ध होगा. राष्ट्रीय सेवा योजना छात्रों को समुदाय में काम करने का अवसर प्रदान करता है. ग्रुप में काम करने के फायदे भविष्य के जीवन में जाकर मिलते है. कॉलेज अपनी बेटियों का विशेषतौर पर ध्यान रखता है. ग्रामीणों को चाहिए कि वे बेहिचक अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाये. डॉ राकेश गर्ग एनएसएस अधिकारी ने कहा कि एनएसएस एक कल्याणकारी सोच है और इसके माध्यम से सकारात्मक कार्य कर समाज और देश का हित होता है. समाज की मदद करने वाला व्यक्ति समाज में अपने आप ही विशिष्ट बन जाता है. सामाजिक कार्यकर्ता किसी भी व्यक्ति या समूह की सम्पूर्ण स्थिति को समझकर उसके साथ कार्य करता है. ‘मैं नहीं, तुम’ का भाव लिए एनएसएस हमें समर्पण भाव से सभी कुछ दूसरों के लिए न्यौछावर करने का पाठ सिखाता है. सच्चा कार्यकर्ता खुद को भूलकर सबसे पहले दूसरो के भले की सोचता है.
इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, प्रो पवन कुमार, डॉ दीपिका अरोड़ा मदान, दीपक मित्तल आदि मौजूद रहे.

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