ज्ञानी, कर्मयोगी और भगवान का भक्त यह तीनों श्रेणियां हैं भगवान तक पहुँचने की : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT :16 मार्च 2023, श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2080 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के दूसरे दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि कि दीवार से नहीं द्वार से सुनाई देगा, गुरूद्वार में आओगे तो कुछ न कुछ सुनाई पड़ेगा, कुछ न कुछ परिवर्तन होगा, बदलाव होगा। जीवन से कपट निकल जाए, छल निकल जाए, भगवान कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति मुझे प्रिय है जिसमें छल कपट न हो, लेकिन यह निकलेगा कैसे। आंखों में भी नम्रता हो, वाणी में भी नम्रता हो, चाल में भी नम्रता हो। जब इस भाव से व्यक्ति भगवान की शरण में आए तो मनोकामना पूर्ण होती है। ज्ञानी, कर्मयोगी और भगवान का भक्त यह तीनों श्रेणियां हैं भगवान तक पहुँचने की। परीक्षा तो भक्त की भी होती है और संत की भी होती है। रामायण में दो अग्नि परीक्षा हुई हैं। दोनों परीक्षा लंका में हुई हैं। सीता माता की परीक्षा हुई और हनुमान जी की अग्नि परीक्षा हुई। सीता माता की परीक्षा स्वयं प्रभु राम ने ली। हनुमान जी की परीक्षा रावण ने ली। भक्ति की परीक्षा भगवान लेते हैं और संत की परीक्षा रावण जैसे आतातायी लेते हैं। ज्ञानी जब भी देखेगा तो भगवान की आंखों में देखेगा, कर्मयोगी जब भी भगवान को देखेगा तो भगवान के हाथों में देखेगा और भक्त जब भी भगवान को देखेगा तो भगवान के चरणों में देखेगा। जिसने चरण का आश्रय ले लिया, फिर परमात्मा उसको दण्ड दे ही नहीं सकता। भगवान सबको अपने पास बुलाते हैं लेकिन मन में इतनी चालाकी भरी है कि व्यक्ति भगवान के पास नहीं जा सकता।
इस अवसर पर प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, पवन चुघ, उत्तम आहूजा, कर्म सिंह रामदेव, शाम सपड़ा, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, ओमी चुघ, मोहन रामदेव, राघव चुघ, अमन रामदेव, शक्ति सिंह रेवड़ी, ईश्वर लाल रामदेव, जगदीश जुनेजा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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