अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पर्यावरण के साथ सदभाव में रहना और इसकी सुरक्षा के प्रति सभी की चेतना को जागृत करना है: डॉ अनुपम अरोड़ा
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के एनएसएस कार्यकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस को गंभीर भाव के साथ मनाया
सिंगल यूज़ प्लास्टिक विषय को लेकर पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में बीए तृतीय वर्ष की तन्नू ने मारी बाजी
BOL PANIPAT , 05 जून,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के एनएसएस कार्यकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस को पर्यावरण जागरूकता और सिंगल यूज़ प्लास्टिक को इस्तेमाल न करने के भाव के साथ मनाया. कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत अतिविशिष्ट अतिथियों प्रधान पवन गोयल उप-प्रधान मनोज सिंगला, महासचिव तुलसी सिंगला और कोषाध्यक्ष विकुल बिंदल ने की. इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और इसकी सुरक्षा को लेकर सेमीनार का आयोजन किया गया जिसे प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने संबोधित किया. उनके साथ कॉलेज में एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग, वनस्पति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ रवि रघुवंशी, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, प्रो मनोज कुमार आदि ने सेमिनार में शिरकत की. विदित रहे कि विश्व पर्यावरण दिवस 2023 का थीम ‘प्लास्टिक के प्रदुषण को हराएं’ है. युवाओं में पर्यावरण बचाने की अलख जगाने हेतू और उन्हें संवेदनशील नागरिक बनाने के उद्देश्य से कॉलेज प्रांगण में मेगा वृक्षारोपण ड्राइव भी चलाई गई जिसमे विभिन्न प्रकार के फलदार और छायादार पौधे कार्यकर्ताओं ने अपने घर और आस-पास लगाये. तत्पश्चात पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई जिसका विषय सिंगल यूज़ प्लास्टिक को नकारना रहा और इसमें बीए तृतीय वर्ष की छात्रा अन्नू ने प्रथम स्थान हासिल किया. दूसरा स्थान बीकॉम द्वितीय के छात्र सौरभ को और तीसरा स्थान बीकॉम तृतीय की ख़ुशी ने हासिल किया. हाथ में बैनर और पलाकार्ड्स उठाये हुए एनएसएस कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण जागरूकता रैली निकाली और ‘जिस दिन पृथ्वी में पर्यावरण नहीं होगा, उस दिन पृथ्वी में जीवन भी नहीं होगा’, ‘जहाँ न पेड़-पौधे हैं, न चिड़िया है, न हरियाली है, वहाँ जीवन केवल एक बोझ है’, ‘जब तक मानव अपना कर्तव्य नहीं समझेगा, तब तक पर्यावरण पर खतरा मंडराता हीं रहेगा’ जैसे नारों से कॉलेज में सम्पूर्ण माहौल पर्यावरण को लेकर संजीदा नजर आया. इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पर्यावरण को बचाने और प्लास्टिक को जीवन से बाहर निकालने की शपथ सभी एनएसएस कार्यकर्ताओं और स्टाफ सदस्यों को दिलाई.
पवन गोयल एसडी पीजी कॉलेज प्रधान ने कहा कि हमें अपने चारों ओर के वातावरण को संरक्षित करने का तथा उसे जीवन के अनुकूल बनाए रखने का प्रयास निरंतर करना होगा. पर्यावरण और प्राणी एक दूसरे पर आश्रित हैं और यही कारण है कि भारतीय चिन्तन में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा उतनी ही प्राचीन है जितना यहाँ की मानव जाति का इतिहास है. पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ सम्बन्ध है. बढ़ते प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और यदि इसे अब भी रोका न गया तो उन्हें भविष्य में मानव सभ्यता का अंत होता दिखाई दे रहा है.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति सभी की चेतना को जागृत करना है. अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है और इसे पहली बार संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में 5 जून 1974 को मनाया गया. इसके बाद से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस को मनाया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के मन में पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति चेतना को जागृत करना है. उन्होनें कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान पूरे देश और दुनिया में लॉकडाउन लग गया था जिससे न केवल उद्योग-धंधे एवं कल-कारखाने भी बंद हो गए थे बल्कि लोगों का जीवन भी रुक गया था. अगर हमने पर्यावरण में संतुलन बनाए रखा होता और इसका अर्थहीन दोहन न किया होता तो शायद ऐसे हालात धरती पर न पैदा हुए होते. प्रकृति ने हमे एक बार फिर चेतावनी दी है कि हम उससे अनवांछित छेडछाड़ न करे और उसके साथ भी उचित व्यवहार करे. हमें एक ही धरती मिली है और हमें ही इसका ख्याल रखना होगा. अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पर्यावरण के साथ सदभाव में रहना और इसकी सुरक्षा के प्रति सभी की चेतना को जागृत करना है.
डॉ राकेश गर्ग एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि आज दुनिया प्लास्टिक से जलमग्न हो रही है. हर साल 400 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है जिसमें से आधे को केवल एक बार उपयोग करने के लिए बनाया जाता है. इसमें से 10 फीसदी से भी कम को रिसाइकिल किया जाता है. अनुमानित 19 से 23 मिलियन टन प्लास्टिक झीलों, नदियों और समुद्रों में समाप्त हो जाता है. आज प्लास्टिक हमारे जमीनों को बंद कर देता है, समुद्र में समा जाता है और जहरीले धुएं के रूप में जल जाता है जिससे यह धरती के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक बन गया है. विश्व पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है और यह दिन पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जागरूकता और कार्रवाई को प्रोत्साहित करता है और इसे कई गैर-सरकारी संगठनों, व्यवसायों तथा सरकारी संस्थाओं का समर्थन प्राप्त है. विश्व पर्यावरण दिवस सार्वजनिक पहुंच के लिए एक वैश्विक मंच है जिसमें सालाना 143 से अधिक देशों की भागीदारी होती है. हालात अब बहुत खतरनाक स्तर तक पहुँच चुके है और हमें पर्यावरण को बचाना ही होगा.
डॉ एसके वर्मा ने कहा कि आज पर्यावरण को लेकर हालात बेहद चिंताजनक है और यदि इस पर अभी भी गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो मानव जाति का जीवित रहना ही मुश्किल हो जायेगा. ग्लोबल वार्मिंग के कारण लगातार ग्लेसियर पिघल रहे हैं जिसकी वजह से समुद्र में जल का स्तर बढ़ रहा है. यदि सब ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब धरती के ज्यादातर शहर जलमग्न हो जायेंगे.
कार्यक्रम में डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, डॉ पवन कुमार,डॉ रवि कुमार, दीपक मित्तल समेत प्राध्यापकों एवं लगभग 150 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया.

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