Friday, April 17, 2026
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भारत देश की मजबूत परिकल्पना लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की ही देन है: डॉ अनुपम अरोड़ा  

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 31, 2023 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस यूनिट्स ने राष्ट्रीय एकता दिवस हर्षौल्लास के साथ मनाया  

राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने जिला प्रशासन द्वारा आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ में हिस्सा लेकर उठाई राष्ट्रीय एकता की शपथ  

BOL PANIPAT , 31 अक्टूबर:

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस यूनिट्स द्वारा लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में पूरे संकल्प और राष्ट्र भक्ति भाव के साथ मनाया गया । कॉलेज एनएसएस यूनिटस द्वारा विशेष तौर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने की और उन्होनें सभी स्टाफ सदस्यों, एनएसएस स्वयंसेवकों एवं कॉलेज के छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय एकता और अखंडता की शपथ दिलाई । इसी श्रृंखला में कॉलेज के एनएसएस यूनिट के लगभग 150 कार्यकर्ता प्रात: 7 बजे प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ पवन कुमार, डॉ रवि रघुवंशी, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रो इंदु पुनिया, प्रो मनोज कुमार, प्रो तन्नू मेहता, प्रो आशीष गर्ग, प्रो रजनी देवी, प्रो सचिन, प्रो हर्ष के नेतृत्व में कॉलेज से रवाना होकर जिला सचिवालय पानीपत पर ‘रन फॉर यूनिटी’ में भाग लेने पहुंचे जहाँ महिपाल डांडा विधायक पानीपत (ग्रामीण), अर्चना गुप्ता भाजपा जिला अध्यक्ष, उपायुक्त पानीपत वीरेंद्र कुमार दहिया, पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत और अन्य गणमान्य अधिकारियों ने दौड़ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया । जोश और उर्जा से भरी ‘रन फॉर यूनिटी’ लघु सचिवालय से शुरू होकर सेक्टर 18 से होते हुए सेक्टर 13-17 के मैदान में पहुंची जहाँ सभी धावकों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई गई ।  

“मैं सत्यनिष्ठा से शपथ लेता हूँ कि मैं राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाये रखने के लिए स्वयं को समर्पित करूँगा और अपने देशवासियो के बीच यह सन्देश फैलाने का भी भरसक प्रयत्न करूँगा । मैं यह शपथ अपने देश की एकता की भावना से ले रहा हूँ जिसे स्वर्गीय सरदार वल्लभ भाई पटेल की दूरदर्शिता एवं कार्यों द्वारा संभव बनाया जा सका । मैं अपने देश की आतंरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान करने का भी सत्यनिष्ठा से संकल्प करता हूँ” ।

दिनेश गोयल प्रधान ने अपने सन्देश में कहा कि भारतीय नागरिक सेवाओं का भारतीयकरण कर इसे भारतीय प्रशासनिक सेवाओ में परिवर्तित करना सरदार पटेल की ही देन है । यदि सरदार पटेल को कुछ समय और मिलता तो संभवत: नौकरशाही का पूरी तरह से कायाकल्प हो जाता । उनके मन में किसानो एवं मजदूरों के लिये असीम प्रेम था तथा उन्होनें कहा था कि दुनिया की सम्पूर्ण जिम्मेदारी किसानो और मजदूरो के कांधों पर हैं  वल्लभभाई पटेल भारत के राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम में अक्षम शक्ति स्तम्भ थे । आत्म-त्याग, अनवरत सेवा तथा दूसरों को दिव्य-शक्ति की चेतना देने वाला उनका जीवन सदैव प्रकाश-स्तम्भ की अमर ज्योति बना है । सरदार पटेल मितभाषी, अनुशासनप्रिय और कर्मठ व्यक्ति थे और उनके व्यक्तित्व में संगठन कुशलता, राजनीतिक दूरदर्शिता तथा राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट निष्ठा थी । अपने अदम्य उत्साह, असीम शक्ति एवं मानवीय समस्याओं के प्रति व्यवहारिक दृष्टिकोण से उन्होंने निर्भीक तरीके से स्वतंत्र राष्ट्र की प्रारम्भिक कठिनाइयों का समाधान अद्भुत सफलता से किया । राष्ट्र के प्रति प्रेम एवं योगदान के कारण ही आज विश्व के श्रेष्ठ राजनीतिज्ञों की श्रेणी में सरदार पटेल को भी याद किया जाता है । सरदार पटेल मन, वचन तथा कर्म से सच्चे देशभक्त थे । वे वर्ण-भेद तथा वर्ग-भेद के कट्टर विरोघी थे । अपूर्व संगठन-शक्ति एवं शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता रखने वाले सरदार पटेल आज भी युवा पीढी के लिये प्रेरणा स्रोत हैं । कर्म और संघर्ष को वे जीवन का ही एक रूप समझते थे । भारत रत्न से सम्मानित सरदार वल्लभ भाई पटेल को हमेशा याद किया जाता रहेगा तथा युवा पीढ़ी को उनके बताये मार्ग पर चलकर लाभ ही लाभ प्राप्त होगा ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि सरदार वल्लभ भाई राष्ट्रीय एकता के अदभुत शिल्पी थे और भारत उनके ह्रदय में बसता था । वे सच्चे अर्थो में भारतीय जनमानस और विशेष तौर पर किसानो के मसीहा थे । स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी एवं स्वतन्त्र भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल बाहर से जितने सौम्य और शांत थे भीतर से उतने ही दृढ़निश्चयी और दूरदर्शी थे । भारत देश की मजबूत परिकल्पना के कारण ही उन्हे भारत का लौह पुरूष कहा जाता है । स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बडा योगदान खेडा संघर्ष में दिखा जहाँ से वे एक कद्दावर नेता के रूप में उभरे । सरदार पटेल ने इस आन्दोलन में किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर न देने के लिये प्रेरित किया जिसके फलस्वरूप सरकार झुकी और किसानो को करों में राहत दी । यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी और इसी बात ने निर्धारित कर दिया कि आने वाले वर्षो में इस महान व्यक्तित्व ने देश के लिए क्या कुछ करना है ।

एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि देसी रियासतों को भारत में मिलाने का साहसिक कार्य सरदार पटेल के प्रयासों से ही संभव हुआ । 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो उस समय देश में लगभग 562 रियासतें थीं जिन्हें ब्रिटिश सरकार ने खुला छोड़ दिया था । सरदार पटेल द्वारा इन सभी रियासतों का एकीकरण विश्व इतिहास का सबसे बड़ा आश्चर्य था क्योंकि भारत में यह रक्तहीन क्रांति थी ।  गाँधी जी ने सरदार पटेल का लोहा मानते हुए कहा था कि रियासतों की समस्या इतनी जटिल थी जिसे केवल वल्लभभाई पटेल ही हल कर सकते थे । ऐसा व्यक्तित्व हम सभी के लिए प्रेरणा और उर्जा का श्रोत है । उनके आदर्शो पर चलकर ही हम उन्हें सच्ची श्रद्धान्जली दे सकते है ।

कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ राकेश गर्ग, डॉ पवन कुमार, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला समेत स्टाफ के अन्य सदस्य मौजूद रहे ।    

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