Tuesday, June 2, 2026
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एसडीपीजी कॉलेज पानीपत की एन.एस.एस. यूनिट्स द्वारा विश्व एड्स दिवस के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at December 1, 2023 Tags: , , , , ,

एचआईवी-एड्स के रोग से घृणा करे, रोगी से नहीं: डॉ ललित वर्मा डिप्टी सीएमओ पानीपत

एन.एस.एस. स्वयंसेवकों को एचआईवी-एड्स से बचाव और मदद की दिलाई शपथ, निकाली जागरूकता रैली        

BOL PANIPAT, 01 दिसम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वर्ल्ड एड्स डे के अवसर पर कॉलेज एन.एस.एस. यूनिट्स द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमे एन.एस.एस. स्वयंसेवकों के साथ छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । कार्यशाला के मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ ललित वर्मा डिप्टी सीएमओ सिविल हॉस्पिटल पानीपत रहे । कार्यशाला का प्रारम्भ प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज एन.एस.एस. अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने किया । कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को एड्स की बिमारी से बचने और एड्स के रोगी की मदद और उसके प्रति आदर-भाव दिखाने की शपथ दिलाई गई और एचआईवी-एड्स जागरूकता रैली निकाली गई ।

डॉ ललित वर्मा डिप्टी सीएमओ सिविल हॉस्पिटल पानीपत ने कहा कि एड्स  बीमारी एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस से फैलती है । यह वाइरस शरीर के इम्यून सिस्टम पर हमला करता है जिससे अन्य बीमारियाँ इंसान को जकड़ने लगती है । एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति बेशक अपनी स्थिति को बदल नहीं सकता है परन्तु हम अपना व्यवहार और रवैया जरुर बदल सकते है. हमें चाहिए की हम रोग से घृणा करें रोगी से नहीं । अब एड्स से ग्रसित लोगों की सरकार भरपूर मदद करती है ताकि वे अच्छे इलाज से वंचित न रह सके । एचआईवी-एड्स बिमारी का आज भी कोई कारगर इलाज उपलब्ध नहीं है । लेकिन इस बिमारी को फैलने से रोका अवश्य जा सकता है और एचआईवी संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक जिंदा रह सकता है ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि एड्स पर सेमिनार और प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवाओं के ज्ञान में वृद्धि होती है और उन्हें एचआईवी-एड्स को समझने में तथा इस से जुड़ी भ्रांतियों और मिथकों को तोड़ने में मदद मिलती है । एड्स से बचने के उपायों पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि हमें संयमित और अनुशासित जीवन जीना चाहिए । मादक औषधियों के अभ्यस्त व्‍यक्ति के द्वारा उपयोग में ली गई सिरिंज व सूई का प्रयोग नहीं करना चाहिए । एड्स पीडित महिलाओं को सोच-समझकर गर्भधारण करना चाहिए. रक्‍त की आवश्‍यकता होने पर हमें अनजान व्‍यक्ति का रक्‍त लेने से बचना चाहिए । अगर रक्त लेना अवश्यम्भावी हो तो पहले रक्त की एचआईवी के लिए जांच अवश्य करवानी चाहिए । दूसरे व्‍यक्ति द्वारा प्रयोग में लिया हुआ ब्‍लेड और पत्‍ती काम में नहीं लेनी चाहिए ।

डॉ राकेश गर्ग एन.एस.एस. अधिकारी ने कहा कि एड्स का खतरा एक से अधिक लोगों से यौन संबंध रखने वाले व्यक्ति, नशीली दवाईयां और इन्‍जेकशन लेने वाले व्‍यक्ति, पिता एवं माता के एचआईवी संक्रमण के पश्‍चात पैदा होने वाले बच्‍चें और बिना जांच किया हुआ रक्‍त ग्रहण करने वाले व्यक्ति में सबसे अधिक होता है । हमें ब्यूटी पार्लर और हजामत बनाते समय भी किसी और पर प्रयोग हुए ब्लेड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए । एचआईवी-एड्स का बचाव ही इसका उपचार है । एचआईवी पोजिटिव व्‍यक्ति में7  से 10  साल बाद विभिन्‍न बीमारिंयों के लक्षण पैदा हो जाते हैं जिनमें गले या बगल में सूजन भरी गिल्टियों का हो जाना, लगातार कई-कई हफ्ते अतिसार घटते जाना, कई हफ्ते बुखार और खांसी का रहना, अकारण वजन का घटना, मूंह में घाव हो जाना और त्‍वचा पर दर्द भरे और खुजली वाले ददोरे एवं चकते हो जाना इस बीमारी के कुछ लक्षण है । इस तरह के आयोजनों से छात्र-छात्राओं के मन तक अच्छे नैतिक सन्देश पहुँचते है और वे समाज की बेहतर सेवा कर पाते है ।

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