तीन दिवसीय श्री राम कथा सत्संग का आरंभ हुआ।
BOL PANIPAT : सनौली रोड, नेता जी कालोनी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण गणेश मन्दिर के 57वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर तीन दिवसीय श्री राम कथा सत्संग का आरंभ हुआ। जिसमंे प्रवचन करते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने राम नाम की महिमा का वर्णन किया।
सर्वप्रथम कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि अशोक रेवड़ी व रमेश माटा ने ध्वजारोहण किया तथा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज मुरथल एवं महामण्डलेश्वर स्वामी अरूणदास जी महाराज (हरिद्वार), जी का स्वागत मंदिर पदाधिकारियों द्वारा फूलमालाओं द्वारा किया गया। स्वामी श्री दयानन्द सरस्वती जी महाराज ने राम नाम महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल नाम स्मरण से ही सार्थक जीवन जिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब रावण सीता को हर लाया तो कुम्भकर्ण से रावण ने कहा कि मैंने बहुत सारे रूप बनाये लेकिन सीता ने मेरी ओर देखा तक नहीं। इस पर कुम्भकर्ण ने पूछा कि क्या आपने राम का रूप बनाया तो इस पर रावण ने कहा कि मैं जब भी राम का रूप बनाता तो मुझे दूसरे की नारी माता समान लगने लगती। उन्होंने कहा कि रामायण सत चित आनन्द रूप है। उन्होंने कहा कि जब कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन में सद्गुण आते हैं तो व्यक्ति का चित्त शांत होने लगता है तथा स्थिर होने लगता है। उन्होंने कहा कि माँ के गर्भ से निकलकर हम माया के गर्भ में प्रवेश करते हैं और माया रूपी अंधकार में भटकते रहते हैं। सत्य के इस भंवर में हम भौतिक और शारीरिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं। थोड़े से धन के लालच में पाप करते हैं। हमें इस पाप की अंधियारी नगरी से सत्य के सूरज की ओर ले जाने वाला केवल एक ही मार्गदर्शक होता है और वह है राम नाम स्मरण। मंच संचालन कैलाश नारंग ने किया। इस अवसर पर प्रधान किशन लखीना, राजेन्द्र टुटेजा, पंकज नारंग, सुषांत सेठी, गुलशन लखीना, राजेश लखीना, राम नारायण तनेजा, तिलक राज सेठी, मोहित नारंग, शशांक नारंग, रिषभ सेठी, योगेश बांगा, सतीश जुनेजा, अनिल रेवड़ी, बंटी लखीना, गुलशन खुराना, दिनेश ढींगड़ा, विजय नारंग, नारायण बठला, राममेहर चौहान व महिला संकीर्तन मण्डल के सदस्य उपस्थित थे

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