Saturday, April 18, 2026
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स्वयंसेवकों ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और महाशिवरात्रि का पर्व आदर और सम्मान भाव के साथ मनाया.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 8, 2024 Tags: , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय आवासीय राष्ट्रीय सेवा योजना कैंप का चौथा दिन
-आत्मविश्वास से हमें अपने विचारों की स्वाधीनता प्राप्त होती है: डॉ प्रेरणा डावर सलूजा, प्रोफेसर और निदेशक प्रशिक्षण, गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ पानीपत  
– लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण: डॉ नीलम आर्य, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग, मधुबन
-दीर्घकालिक लाभ के लिए अल्पकालिक बलिदान करने पड़ते है:  डॉ राजेन्द्र कुमार अरोड़ा, उप-प्राचार्य राजकीय महिला महाविधालय चीका

BOL PANIPAT , 08 मार्च, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में चल रहे विश्वविधालय स्तरीय सात दिवसीय आवासीय राष्ट्रीय सेवा योजना कैंप के चौथे दिन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एवं महाशिवरात्रि का पर्व आदर और सम्मान भाव के साथ मनाया गया । इस दिन बतौर मुख्य वक्ता डॉ प्रेरणा डावर सलूजा प्रोफेसर और निदेशक प्रशिक्षण गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ पानीपत, डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी फॉरेंसिक विभाग मधुबन (करनाल) और डॉ राजेन्द्र कुमार अरोड़ा उप-प्राचार्य राजकीय महिला महाविधालय चीका (पेहोवा) ने कैंप में शिरकत की और स्वयंसेवकों को अपने ज्ञान और अनुभव का लाभ दिया । प्रो नीरू मुथरेजा और ‘आध्यात्म का विज्ञान’ एनजीओ के मीडिया प्रभारी चमन लाल गुलाटी ने कैंप में बतौर अतिविशिष्ट मेहमान शिरकत की । डॉ प्रेरणा डावर सलूजा ने अपना व्याख्यान ‘व्यक्तित्व निर्माण और लक्ष्य निर्धारण’, डॉ नीलम आर्य ने ‘महिला अपराध और फॉरेंसिक साइंस ‘ और डॉ राजेन्द्र कुमार अरोड़ा ने ‘जीवन के खेल को कैसे जीते’ विषयों पर दिया । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कैंप सेक्रेटरी डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, प्रो जुगमती और प्रो शिवरानी ने किया । मंच संचालन डॉ संतोष कुमारी ने किया । कैंप समन्वयक डॉ आनंद कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय सांयकालीन सत्र का हिस्सा बने ।

कैंप के चौथे दिन की शुरुआत प्रातः: 5 बजे योग और ध्यान शिविर से हुई जिसमें सभी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया । तत्पश्चात खो-खो के माध्यम से सभी स्वयंसेवकों ने स्वास्थ्य लाभ हासिल किया । नाश्ते के उपरान्त स्वयंसेवकों ने महिला सशक्तिकरण कार्यशाला और सेमिनार के लिए प्रस्थान किया । विदित रहे कि कैंप को एनएसएस सेल, कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र का संरक्षण तथा राज्य एनएसएस सेल उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजन हासिल है । आज महाशिवरात्रि के अवसर पर मेहँदी लगाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे एनएसएस छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मनमोहक डिजाईन अपने हाथों पर बनाए । तत्पश्चात महाशिरात्रि ‘तांडव’ पर्व नृत्य का आयोजन किया गया जिसमे ‘बम बम भोले’ के उदघोष पर स्वयंसेवक जमकर नाचे । विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को कैंप के अंतिम दिन सम्मानित किया जाएगा ।
डॉ प्रेरणा डावर सलूजा, प्रोफेसर और निदेशक प्रशिक्षण, गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ पानीपत ने कहा कि किसी भी ऐसी धारणा को जो हमारे मन में किसी व्यक्ति के प्रति उसका सदभाव, हितैषिता, सत्यता, दृढ़ता आदि अथवा किसी सिद्धांत आदि की सत्यता अथवा उत्तमता का ज्ञान होने के कारण होती है  ही हमारा विश्वास है । आत्मविश्वास से ही हमें अपने विचारों की स्वाधीनता प्राप्त होती है और इसके कारण ही महान कार्यों के सम्पादन में सरलता और सफलता मिलती है । इसी के द्वारा आत्मरक्षा होती है । जो व्यक्ति आत्मविश्वास से ओतप्रोत है उसे अपने भविष्य के प्रति किसी प्रकार की चिंता नहीं रहती है । हमें खुद को प्रेरित करने के लिए अपने हर लक्ष्य के प्राप्त करने के उपरान्त खुद को पुरस्कृत करना चाहिए । हमें हर रोज़ अपने जीवन दिन दिनचर्या की योजना बनाकर उस को क्रियान्वित करना चाहिए । याद रहे की कभी-कभी दृढ़ निश्चयी लोग भी अपना उत्साह खो देते है और ऐसे में थोडा आराम और ध्यान बड़ा लाभकारी सिद्ध होता है । हमें अपनी किसी भी हार से डरना नहीं चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति ने कभी न कभी असफलता का स्वाद जरूर चखा होता है । हमारे जीवन में जो कुछ भी अच्छा है हमें उसके लिए शुक्रगुजार रहना सीखना होगा क्योंकि ऐसा करने से हमारा ध्यान सकारात्मक पॉजिटिव चीजों पर ही रहता है और दिमाग में नकारात्मक ख्याल नहीं आते है । हमें सकारात्मक सोच रखने वाले लोगों के साथ रहना चाहिए । जैसी हमारी संगति होगी वैसी ही हमारी सोच बन जाती है ।

डॉ नीलम आर्य वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग मधुबन करनाल ने कहा कि लिंग अनुकूल वातावरण का अभाव ही देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का मुख्य कारण है । फॉरेंसिक साइंस अपराध से जुड़ा विज्ञान है और इसमें अपराध का पता लगाने के लिए शरीर के तरल पदार्थों की जांच की जाती है । फॉरेंसिक रिपोर्ट को अदालत भी अहम साक्ष्य मानती है । देश-विदेश में बढ रही आतंकी घटनाओं और अपराधियों ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढा दी है । आपराधिक वारदातों के सूत्रधारों की धर-पकड के लिए प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत आज समाज और समय की मांग है । इस साइंस का जानकार अपराध से जुड़े लोगों को पकडवाने में काफी मददगार होता है । आतंकवादी गुत्थियां हों या रहस्यमय मौत, इसे सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस की अहम भूमिका होती है । फॉरेंसिक साइंस अब विदेश में ही नहीं देश में भी लोकप्रिय होती जा रही है । इस क्षेत्र में बढ़ती नौकरियों ने विद्यार्थियों को फॉरेंसिक साइंस का कोर्स करने के लिए प्रेरित किया है । इसकी पढाई करने वालों के लिए नौकरियों के कई विकल्प हैं. इसमें डिप्लोमा कोर्स से लेकर पीएचडी करने वालों के लिए हर स्तर पर नौकरी के अवसर है । एक अच्छे फॉरेंसिक एक्सपर्ट का स्वभाव जिज्ञासु, उसकी कानून-व्यवस्था पर आस्था, उसमे सटीकता का गुण, तार्किक, व्यावहारिक, व्यवस्थित दृष्टिकोण तथा उसमे वैज्ञानिक विश्लेषण की क्षमता होनी चाहिए । फॉरेंसिक साइंस में प्राप्त शिक्षा के आधार पर हम अध्यापक, फॉरेंसिक इंजीनियर, जेनेटिक एक्सपर्ट, फॉरेंसिक साइकोलॉजिस्ट, फॉरेंसिक साइंटिस्ट, फॉरेंसिक इंवेस्टिगेटर, सिक्योरिटी एक्सपर्ट, फॉरेंसिक कंसलटेंट, डिटेक्टिव आदि महत्वपूर्ण पदों पर नौकरियां पा सकते है ।
राष्ट्र निर्माण रत्न 2022 से सम्मानित और 150 से अधिक प्रेरक भाषण देने वाले डॉ राजेन्द्र कुमार अरोड़ा ने कहा कि हमें जीवन से जो भी परिणाम मिलते हैं वे हमारे अभ्यस्त विचारों, शब्दों और कार्यों का ही प्रत्यक्ष प्रतिबिंब होते हैं । हमें अपना रास्ता खुद चुनना चाहिए न कि हमें दूसरों द्वारा बताये गए रास्ते पर चलना चाहिए । हमें खुद को को किसी सार्थक चीज़ के लिए समर्पित करना चाहिए और यह एक उच्च कोटि का उद्देश्य होना चाहिए । हमें प्रत्येक दिन खुद का विकास और अनुभव प्राप्त करना चाहिए और दूसरे लोगों से, अपनी गलतियों से और असफलता से सीखने के लिए समर्पित होना चाहिए । अवसरों का लाभ उठाकर हमें अपने जीवन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाना चाहिए । बिना किसी शिकायत, दोषारोपण या बहाना बनाए हमें अपने जीवन, विकल्पों, निर्णयों और कार्यों की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए । हर रोज़ हमें जिज्ञासा से भरपूर माहौल अपने आस-पास रखना चाहिए । विचारों में लचीले बने रहना और नए दृष्टिकोणों, विचारों और राय के प्रति खुले दिमाग से रहना ही सफल जीवन की कुंजी है । हमें दीर्घकालिक लाभ के लिए आवश्यक अल्पकालिक बलिदान करने ही होंगे । हमें ऐसे कठोर निर्णय जो हमें असहज महसूस कराते हों और जिनमें जोखिम शामिल हो सकता है भी लेने चाहिए । लगातार खुद को चुनौती देना और अपने व्यक्तिगत मानकों को लगातार ऊपर उठाना ही कामयाबी का मूल मंत्र है । हमें ऐसे बेकार विचारों, विश्वासों, आदतों और डर पर काबू पाना चाहिए जो हमारे जीवन को सर्वोत्तम तरीके से जीने में बाधक है । टालमटोल का रवैया और जल्द संतुष्टि का कुचक्र हमारे जीवन को नुकसान पहुंचाता है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि वर्तमान में व्याप्त समयाओं से निपटने की अगुआई भी महिलाओं ने ही की है । शिक्षित महिला परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण के दायित्वों का सबसे संतुलित एवं श्रेष्ठ मार्ग है । उन्होनें कहा कि महिलाओं की शिक्षा के माध्यम से ही विकसित भारत का सपना साकार हो सकता है क्यूंकि महिलाएं एक नहीं बल्कि दो-दो परिवारों को संभालती है । उन्होंने कहा कि सभी को यह जानकर आश्चर्य होगा कि पहले अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार भी नहीं था । उन्हें ये अधिकार दिलाने के उद्देश्य से 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन सम्मेलन में महिला दिवस को अंतरराष्ट्रीय दर्जा दिया गया । उन्होंने कहा कि नारी  में अपरिमित शक्ति और क्षमता विद्यमान हैं । व्यावहारिक जगत के सभी क्षेत्रों में उन्होने कीर्तिमान स्थापित किये हैं । अपने अदभुत साहस, अथक परिश्रम तथा दूरदर्शी बुद्धिमत्ता के आधार पर विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाने में महिलाएं कामयाब रहीं हैं । मानवीय संवेदना, करुणा, वात्सल्य जैसे भाव से परिपूर्ण अनेक नारियों ने युग निर्माण में अपना योगदान दिया है । छात्राओं को आत्मसुरक्षा और आत्मसम्मान के लिए खुद ही पहल करनी पड़ेगी । छात्राओं को चाहिए की वे अपने अधिकारों का निरंतर और बेखौफ तरीके से प्रयोग करे और अपने घर मे भी अपने भाइयो को सिखाये की वे जीवन मे महिलाओं का सम्मान करे तथा समाज में उन्हे उनका उचित स्थान दिलवाने में मदद करे ।
दिनेश गोयल कॉलेज प्रधान ने अपने सन्देश में कहा कि महिलाओं के बिना दुनिया की कल्पना करना भी मुश्किल है । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का दिन असमानता को दूर करने तथा समाज का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का दिन है । इस उद्देश्य के लिए पूरे विश्व की महिलाएं एकजुट होती है । कई देशों में महिलाएं एकत्रित होकर मार्च, रैलीयां निकालती है और कही पर कला कार्यक्रम, भाषण और सेमिनार आयोजित किये जाते है. समाज की इकाई हर एक व्यक्ति है और जब तक हर व्यक्ति में महिलाओं के लिए सम्मान पैदा नहीं होगा तब तक कोई बात बनने वाली नहीं है ।
डॉ राकेश गर्ग प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि भारतीय महिलाएं बहुत प्रतिभाशाली है और उन्होंने अनेक क्षेत्रों में विश्व में अपना नाम चमकाया है । लेकिन आज भी भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अभाव, अभिभावकों के मानसिक पूर्वाग्रह के कारण लोग अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा से वंचित रखते है हालांकि इन बेटियों में असीमित संभावनाएं है ।
डॉ संतोष कुमारी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों का यह मानना है कि शिक्षा एक व्यवसाय नहीं अपितु एक सामाजिक दायित्व है । महिलाओं को शिक्षित करना एवं शिक्षा के माध्यम से सशक्त समाज का निर्माण करने से श्रेष्ठ कार्य कोई दूसरा नहीं है ।

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