एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा विश्व मधुमेह दिवस जागरूकता भाव के साथ मनाया गया
प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के रक्त में ग्लूकोज़ की नि:शुल्क जांच की गई
उचित खान-पान, नियमित व्यायाम और संयमित जीवन शैली मधुमेह से बचने के कारगर हथियार है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT, 14 नवम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा विश्व मधुमेह दिवस जागरूकता भाव के साथ मनाया गया जिसमें प्राध्यापकों, एनएसएस स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने शिरकत की । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा की अगुआई में प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के रक्त में ग्लूकोज़ की मात्र जानने हेतू नि:शुल्क जांच की गई । एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया आदि ने कैंप और सेमिनार में हिस्सा लिया । विदित रहे कि वैश्विक स्तर पर 2014 में 422 मिलियन वयस्क मधुमेह से पीड़ित थे जबकि 1980 में यह संख्या 108 मिलियन थी । 1980 के बाद से मधुमेह का वैश्विक प्रसार लगभग दोगुना हो गया है और यह वयस्क आबादी में 4.7% से बढ़कर 8.5% हो गया है । यह अधिक वजन या मोटापे जैसे संबंधित जोखिम कारकों में वृद्धि को दर्शाता है । पिछले दशक में उच्च आय वाले देशों की तुलना में निम्न और मध्यम आय वाले देशों में मधुमेह का प्रचलन भी तेजी से बढ़ा है । सभी स्वस्थ्य रहे और इस बिमारी का शिकार न बने, इसी उद्देश्य हेतू आज सेमिनार और हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन किया गया । वर्ल्ड डायबिटीज डे 2024 का थीम ‘बाधाओं को तोड़ना, अंतराल को पाटना’ है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि मधुमेह अंधापन, गुर्दे की विफलता, दिल का दौरा, स्ट्रोक और निचले अंग विच्छेदन का एक प्रमुख कारण बनता है । स्वस्थ आहार, शारीरिक गतिविधि और तंबाकू के सेवन से परहेज करने से टाइप-2 मधुमेह को रोका या विलंबित किया जा सकता है । इसके अलावा दवा, नियमित जांच और विभिन्न तरीकों से मधुमेह का इलाज किया जा सकता है और इसके परिणामों से बचा जा सकता है या फिर इसे टाला जा सकता है । वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में नामित करते हुए प्रस्ताव 61/225 अपनाया और मानव स्वास्थ्य को बढ़ावा देने, सुधारने, और उपचार एवं स्वास्थ्य देखभाल शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने के लिए बहुपक्षीय प्रयासों को आगे बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता को मान्यता दी और इसे अपनाया । इस संकल्प ने सदस्य राज्यों को उनकी स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सतत विकास के अनुरूप मधुमेह की रोकथाम, उपचार और देखभाल के लिए राष्ट्रीय नीतियां विकसित करने के लिए भी प्रोत्साहित किया । यदि हम अपनी बुरी आदते सुधार ले तो मधुमेह को ठीक किया जा सकता है ।
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि मधुमेह एक दीर्घकालिक बीमारी है जो तब होती है जब पेंक्रीएस (अग्न्याशय) या तो पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या फिर शरीर अपने द्वारा उत्पादित इंसुलिन का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता है । इससे रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है । टाइप-1 मधुमेह में इंसुलिन उत्पादन की कमी हो जाती है या फिर यह बनता ही नहीं है । टाइप-2 मधुमेह शरीर द्वारा इंसुलिन के अप्रभावी उपयोग के कारण होता है । यह अकसर शरीर के अतिरिक्त वजन और शारीरिक निष्क्रियता के कारण होता है ।
डॉ एस के वर्मा ने कहा कि स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, शरीर का सामान्य वजन बनाए रखना और तंबाकू के सेवन से बचना टाइप-2 मधुमेह की शुरुआत को रोकने या विलंबित करने के तरीके हैं । मधुमेह का इलाज किया जा सकता है और इसके परिणामों को आहार, शारीरिक गतिविधि, दवा और जटिलताओं के लिए नियमित जांच और उपचार से टाला या विलंबित किया जा सकता है । ज्यादा फाइबर से भरपूर भोजन का सेवन करना, पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाने से बचना, ज्यादा पानी का सेवन करना और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना और नियमित ब्लड शुगर चेक करवाना आदि मधुमेह से बचने के कुछ उपाय है ।

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