Saturday, May 2, 2026
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आई.बी. (पीजी) कॉलेज, पानीपत में एनएसएस इकाई द्वारा ‘वीर बाल दिवस’ का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at December 26, 2024 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : 26 दिसंबर को आई.बी. (पीजी) कॉलेज, पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई द्वारा ‘वीर बाल दिवस’ के उपलक्ष्य में एक ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

कार्यक्रम का उद्देश्य गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों के अतुलनीय बलिदान को स्मरण करना और उनकी शौर्यगाथा से प्रेरणा लेना था। वीर बाल दिवस गुरु जी के छोटे साहिबजादों – साहिबजादा जोरावर सिंह और साहिबजादा फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है। धर्म और मानवता की रक्षा के लिए जब उन्‍होंने अपने प्राण न्योछावर किए, तब साहिबजादा जोरावर सिंह की उम्र मात्र 9 वर्ष और साहिबजादा फतेह सिंह की उम्र मात्र 6 वर्ष थी।ऑनलाइन कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अजय गर्ग के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, “वीर बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि साहिबजादों ने छोटी उम्र में ही बड़े आदर्श प्रस्तुत किए। उनका बलिदान हमें न केवल धर्म और सत्य के प्रति दृढ़ रहना सिखाता है, बल्कि यह भी प्रेरणा देता है कि हमें किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए। मैं इस आयोजन के लिए एनएसएस इकाई की सराहना करता हूं।”

कार्यक्रम में एनएसएस स्वयंसेवकों ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी कविताओं और प्रस्तुतियों के जरिए साहिबजादों की वीरता को श्रद्धांजलि दी। स्वयंसेविका रीतिका ने अपनी कविता “बलिदानों की अमर कहानी, वीर बालकों की जुबानी” प्रस्तुत की, जिसमें साहिबजादों के त्याग और वीरता को बड़े मार्मिक ढंग से व्यक्त किया। वहीं स्वयंसेविका अनामिका ने अपनी कविता “तुम्हें सलाम, ओ वीरों के वीर बाल” के माध्यम से उनकी शौर्यगाथा को याद कर सभी को प्रेरित किया।

एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी खुशबू ने कहा, “यह ऑनलाइन आयोजन इस बात का उदाहरण है कि तकनीक का उपयोग कर हम अपने इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचा सकते हैं। साहिबजादों का बलिदान हमारे लिए सदैव प्रेरणास्त्रोत रहेगा।”

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से सहभागिता दिखाई और साहिबजादों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम ने साहिबजादों की वीरता और बलिदान को यादगार बनाने में अहम भूमिका निभाई।

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