एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में तीन दिवसीय कार्यशाला का शानदार आगाज़
-कॉलेज की विभिन्न संकायों की छात्राओं को आत्मनिर्भर एवं कौशलपूर्ण बनाने हेतू हो रहा आयोजन
पहले दिन टाई एंड डाई (शिबोरी) की कला को छात्राओं को सिखाया गया
-यह प्रशिक्षण न सिर्फ छात्राओं को आत्मनिर्भर करेगा बल्कि उन्हें दूसरों को रोजगार देने वाला भी बनाएगा: शिव वाणी वरिष्ठ विशेषज्ञ पीडीलाईट, दिल्ली कॉलेज ऑफ़ आर्ट
BOL PANIPAT , 18 अप्रैल, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में 18 से 21 अप्रैल तक चलने वाली तीन दिवसीय पीडीलाईट कंपनी द्वारा प्रायोजित कार्यशाला का शानदार आगाज़ हुआ जिसका उद्देश्य कॉलेज की गृह विज्ञान एवं अन्य संकायों की छात्राओं को आत्मनिर्भर और कौशलपूर्ण बनाने हेतू जागरूक एवं प्रशिक्षित करना है । कार्यशाला के पहले दिन पीडीलाईट विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षिका शिव वाणी दिल्ली स्कूल ऑफ़ आर्ट्स ने पधार कर छात्राओं को टाई एंड डाई के टिप्स के साथ व्यावहारिक ज्ञान एवं प्रशिक्षण दिया और सरकार के कौशल विकास के उद्देश्य की पूर्ति की । शिव वाणी को पिडिलाईट की विशेष आर्टिस्ट के तौर पर एक लम्बा अनुभव प्राप्त है । उनके दिए इस ज्ञान और अनुभव की बदौलत कॉलेज की छात्राएं भविष्य में इस हुनर को प्रोफेशनल तौर पर किसी व्यवसाय में शुरू कर सकती है । यह प्रशिक्षण न सिर्फ छात्राओं को आत्मनिर्भर करेगा बल्कि उन्हें दूसरों को रोजगार देने वाला भी बनाएगा । माननीय प्रशिक्षिका का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और गृह विज्ञान विभाग से प्रो तन्नु वैद ने किया । तीन दिवसीय कार्यशाला में गृह विज्ञान की 40 छात्राओं के साथ-साथ विभिन्न संकायों की 250 छात्राओं को प्रशिक्षित किया गया ।
शिव वाणी पीडीलाईट विशेषज्ञ प्रशिक्षिका ने टाई एंड डाई के बारे में समझाते हुए कहा कि यह एक रंगाई की कला है जिसमें कपड़े को बांधकर या सिकोड़कर विभिन्न प्रकार के पैटर्न बनाए जाते हैं । इसे बांधनी या शिबोरी भी कहा जाता है । इस तकनीक में कपड़े को अलग-अलग तरीकों से बांधने के बाद डाई (रंग) में भिगोकर रंगाई की जाती है जिससे अनोखे और आकर्षक पैटर्न बनते हैं । टाई एंड डाई एक प्राचीन रंगाई तकनीक है जो दुनिया भर में कई संस्कृतियों में प्रचलित है । इस तकनीक में, कपड़े को विभिन्न तरीकों से बांधकर, मोड़कर या सिकोड़कर उसके विभिन्न हिस्सों को डाई के संपर्क में आने से रोका जाता है । जब कपड़े को डाई में डुबोया जाता है तब जो भाग बंधे या सिकोड़े हुए होते हैं वहां रंग नहीं लगता है जिससे एक अनोखा पैटर्न बन जाता है । टाई एंड डाई की कई तकनीकें हैं जिनमें क्रम्प्ल्ड टाई एंड डाई तकनीक जिसमें कपड़े को मुड़ाकर, फोल्ड करके या सिकोड़कर बांधा जाता है जिससे विभिन्न रंगीन पैटर्न बनते हैं, स्पाइरल टाई एंड डाई तकनीक जिसमें कपड़े को घुमाकर बांधा जाता है जिससे सर्पिल पैटर्न बनते हैं और एवियन टाई एंड डाई विधि जिसमें कपड़े को अलग-अलग आकार में मोड़कर या बांधकर डाई किया जाता है, जिससे पक्षी के पंखों जैसा पैटर्न बनता है । टाई एंड डाई का उपयोग विभिन्न प्रकार के कपड़ों और परिधानों पर किया जा सकता है जैसे कि टी-शर्ट, शर्ट, स्कार्फ़, दुपट्टा, एक्सेसरीज, बैग, टेबलक्लोथ, होम डेकोर आइटम इत्यादि ।
डॉ अनुपम अरोड़ा प्राचार्य ने कहा कि टाई एंड डाई विधि के बहुत से फायदे हमें मिल सकते है । यह एक कलात्मक और रचनात्मक प्रक्रिया है जो अनोखे और आकर्षक डिज़ाइन बनाने की अनुमति देती है । यह तकनीक काफी किफायती है जिसे घर पर भी आसानी से किया जा सकता है । यह विधि पर्यावरण के अनुकूल भी है क्योंकि इसमें प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा सकता है । टाई एंड डाई एक आकर्षक और रचनात्मक रंगाई तकनीक है जो कपड़ों और परिधानों पर अद्वितीय और सुंदर डिज़ाइन बनाने में मदद करती है । होम साइंस और कामर्शियल आर्ट में कोर्स करने के बाद हम पेंटर, क्राफ्ट आर्टिस्ट, विजुअलाइजेशन प्रोफेशनल, इलस्ट्रेटर, डिजिटल डिजाइनर, ग्राफिक डिजाइनर, आर्ट प्रोफेशनल, आर्ट डायरेक्टर, आर्ट कंजर्वेटर, आर्ट रीस्टोरेशन स्पेशलिस्ट, कॉमिक आर्टिस्ट, इंटीरियर डिजाइनर आदि में अपना करियर बना सकते हैं ।
प्रो तन्नु वैद ने कहा कि टाई एंड डाईंग विधि हाथ से रंगाई की विधि होती है जिसमें सामग्री के कई छोटे हिस्सों को एक साथ इकट्ठा करके कपड़े में रंगीन पैटर्न तैयार किए जाते हैं और कपड़े को डाईबाथ में डुबाने से पहले उन्हें स्ट्रिंग से कसकर बांध दिया जाता है । डाई बंधे हुए हिस्सों में प्रवेश करने में विफल रहती है और इस प्रकार हमें कपड़ों पर बहुत ही आकर्षक डिजाईन प्राप्त होते है । यही विधि प्रशिक्षिका ने छात्राओं को करके दिखाई है ।

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