हिंदी एक सनातन भाषा – अविरल धारा, हिंदी का भविष्य उज्जवल है: पदमा शर्मा अध्यक्ष बाल कल्याण समिति
– हिंदी हमारी राष्ट्रीयता एवं अस्तित्त्व का मूल आधार : प्रदीप शर्मा, अध्यक्ष अखिल भारतीय साहित्य परिषद्
– हिंदी भाषा पर इतना गर्व करो कि यह हमारी पहचान और हमारा साक्षात्कार बन जाए: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 13 सितम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की पानीपत इकाई के सहयोग से हिंदी दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया । इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पदमा शर्मा अध्यक्ष बाल कल्याण समिति और विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् पानीपत इकाई के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा तथा डॉ. अनुपम अरोड़ा ने समारोह में हिस्सा लिया । कार्यक्रम में डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. कविता, डॉ. जुगमती, प्रो सचिन, प्रो किरण मलिक, प्रो अन्नू आहूजा, प्रो मीतू सैनी, प्रो शिवरानी आदि ने शिरकत की । प्रो सचिन ने ‘हिंदी नंबर वन’ कविता, प्रो कविता ने हिंदी भाषा कि उत्पत्ति और डॉ संतोष कुमारी ने कविता पाठ किया । हिंदी विदित रहे कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया था और इसलिए प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है । हिंदी दिवस भारत में भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी भावना और समर्पण का प्रतीक है । हिंदी दिवस भारत की एकता और एकजुटता का प्रतीक है । हिंदी भाषा भारत की विविधता को एक साथ लाने में मदद करती है और भारतीय संगठन को एक बनाने का काम करती है । हिंदी भाषा भारतीय समाज में एकता और एकजुटता की संजीवनी है और देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों को एक साथ लाती है । कार्यक्रम में प्रो सचिन, डॉ कविता ने हिंदी भाषा कि उत्पत्ति और इसके महत्व पर प्रकाश डाला । कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा द्वारा ‘वन्दे मातरम्’ गीत के गायन से हुई । विजेताओं को सर्टिफिकेट्स और शील्ड से सम्मानित किया गया और सभी प्रतिभागियों को नकद राशि दी गयी ।
इस अवसर पर हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता, कविता पाठ और दोहा पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया जिसके परिणाम इस प्रकार है-
हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता परिणाम
प्रथम दीपांजली बीए-प्रथम एसडी कॉलेज
द्वितीय अंजली बीएससी-तृतीय आर्य कॉलेज
तृतीय नीलाक्षी बीबीए-तृतीय एसडी कॉलेज
दोहा पाठ प्रतियोगिता परिणाम
प्रथम अंजली बीएससी-तृतीय आर्य कॉलेज
द्वितीय खुशबू एमए आर्य कॉलेज
तृतीय ऋतिका एमए-हिंदी आईबी कॉलेज
कविता पाठ प्रतियोगिता परिणाम
प्रथम ऋषभ तिवारी आईबी कॉलेज
द्वितीय खुशबू आर्य कॉलेज
तृतीय टीनू एसडी कॉलेज
पदमा शर्मा ने कहा कि हम हिंदी को सिर्फ पढ़ते या बोलते नही बल्कि जिते है । हम स्वप्न आज भी अपनी मात्र भाषा हिंदी में ही देखते है । हिंदी मात्र सफलता ही नहीं संस्कार की भाषा है । उन्होंने बल दिया कि प्रत्येक व्यक्ति चाहे उसका कोई भी रोजगार या व्यवसाय क्यों न हो उसे कुछ न कुछ हिंदी साहित्य का अध्ययन करते रहना चाहिए । यह व्यक्तित्व में पूर्णता व स्थिरता के लिए नितांत आवश्यक है ।
प्रदीप शर्मा वरिष्ठ अधिवक्ता और अध्यक्ष अखिल भारतीय हिंदी साहित्य परिषद् ने हिंदी की अविरल धारा को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए सभी का आह्वान किया । उन्होंने कहा कि ये विडम्बना ही है कि न्यायालयों में अधिवक्ता जब अग्रेजी में मुकदमे की पैरवी करते है तो उनके मुवक्किल को एक अक्षर भी समझ नही आता कि उनके भाग्य का निर्णय होते समय आखिर बोला क्या जा रहा है । उन्होंने हिंदी भाषा के उद्भव और विकास पर भी विस्तार से प्रकाश डाला । हिंदी भाषा के प्रयोग से न सिर्फ हमारा उच्चारण शुद्ध होता है बल्कि हिंदी हमारे रग-रग में समाहित होकर हमारी संस्कृति को भी संजोती है । आज हिंदी जनमानस की भाषा बन गई है । हिंदी अब सर्वव्यापक है बस इसको लेकर हमें अपनी सोच बदलनी होगी । वर्तमान में सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी का प्रयोग बढ़ा है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा कि मानविक एवं कला के विषय ही एक मात्र विषय है जो समाज के भले और इंसानियत के भाव को संजोते और आगे बढाते है । भाषा इन्सान को इन्सान से जोड़कर इंसानियत का पैगाम देती है । हिंदी मात्र एक भाषा नहीं अपितु राष्ट्रीय संस्कृति की प्रतीक, ध्वजवाहक एवं संरक्षक है । तकनीक के इस युग में पाश्चात्य प्रभाव से विदेशी भाषाओं का विशेष तौर पर अंग्रेजी का प्रचलन यद्यपि बढ़ा है परंतु भारत राष्ट्र एवं इसके नागरिकों एवं युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय मुद्दों व संस्कृति का विनाश न हो इस दृष्टिकोण से हिंदी के महत्व को हमें पूर्णतया समझना और अपनाना है । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में सभी को निरंतर प्रयास करने चाहिए ताकि हिंदी भारतीय युवा में लोकप्रिय रहे और हमारे युवा जितना हिंदी से जुड़ पाएंगे उतने ही जिम्मेदार व समर्पित नागरिक बन पाएंगे । किसी दूसरी भाषा पर दोष मढ़ने की आदत से हमें बचना होगा । अगर हम हिंदी को उसका उचित स्थान नहीं दिला पाए तो इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार होंगे कोई और नहीं । उन्होंने कहा कि प्रत्येक हिंदी प्रेमी का एक कर्तव्य है कि राष्ट्र एकीकृत हो, लोकतंत्र सुदृढ़ हो व प्रत्येक नागरिक की सशक्त लोकतंत्र के निर्माण अपेक्षित भूमिका हो ।
दीपांजली ने अपनी कविता पेश की:
त्याग, तपस्या, तपोभूमि की वासी पूछ रही हूँ, मैं
हंसकर चूमी वीरों ने वो फांसी पूछ रही हूँ, मैं
हरिद्वार, मथुरा, वृन्दावन, काशी पूछ रही हूँ, मैं
दुनिया जहाँ कि सोच से आगे बढ़कर पूछ रही हूँ, मैं
अंजली ने गाया:
विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार
ऋतिका ने गाया:
दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय
जो सुख में सुमिरन करे, दुःख काहे को होय

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