Thursday, April 30, 2026
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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ स्थापना के 100वे स्थापना दिवस पर पानीपत में शस्त्र पूजन व भव्य पथ संचलन का आयोजन.

By LALIT SHARMA , in Politics , at October 5, 2025 Tags: , , ,

हिंदू समाज ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के महान विचार का पोषक और संरक्षक है: रामेश्वर वरिष्ट प्रचारक 

-भारत माता को परम वैभव तक ले जाने का संकल्प ले संघ का प्रारंभ 100 वर्ष पूर्व हुआ : राजेश कुमार प्रान्त प्रचार प्रमुख (RSS) हरियाणा 

BOL PANIPAT : 05-अक्टूबर -2025, आरएसएस द्वारा पानीपत नगर के चंद्रशेखर आजाद,प्रताप,हेमचंद ,डॉ अम्बेडकर,श्रीराम,भक्त सिंह,महर्षि बाल्मीकि,राजगुरु, उपनगर में शस्त्र पूजन व पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित

समालखा नगर अनाज मंडी में शस्त्र पूजन व पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित

ग्रामीण क्षेत्र के निम्न मंडलो में बापोली,खेडा,सनोली,कुराड,बराना, रिफाइनरी ,गांजबड,उरलाना,सुताना, अलुपुर,अहर,मतलोडा,थर्मल, नोल्था,डाहर,हथवाला,जोरासी,बिहोली ,शस्त्र पूजन व पथ संचलन कार्यक्रम आयोजित 

संघ की परंपरा के अनुरूप यह कार्यक्रम अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति का सशक्त प्रदर्शन देता है। इस अवसर पर स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में अनुशासित पंक्तियों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरे। नगरवासियों ने इस पथ संचलन को देखकर न केवल संगठन की शक्ति का अनुभव किया, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव का सशक्त संदेश भी प्राप्त किया।

चंद्रशेखर आज़ाद  उपनगर में पथ संचलन सिवाह गाँव में हुआ,गाँव में पथ संचलन को लेकर सिवाह गाँव उत्साह का माहोल था , उन्होंने ने स्थान स्थान पर जय घोष और पुष्प वर्षा के साथ स्वयंसेवकों का स्वागत किया डॉ अम्बेडकर उपनगर में पथ संचलन काबरी रोड पर हुआ, राजगुरु  उपनगर सेक्टर 24 क्षेत्र में  पथ संचलन हुआ ,नगर वासियों के लिए आकर्षण का केंद्र स्वयंसेवकों की दृढ़ चाल, अनुशासनबद्ध कदम और राष्ट्रगीतों की धुन थी। कार्यक्रम की भव्यता में और वृद्धि इस तथ्य से हुई कि इसमें विभिन्न आयु वर्ग के स्वयंसेवकों ने एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर भाग लिया और राष्ट्रहित के प्रति अपने संकल्प को प्रकट किया। 

राजगुरु उपनगर सेक्टर 24 क्षेत्र में रामेश्वर वरिष्ट प्रचारक मुख्य वक्ता रहें। उन्होंने कहा हिंदू समाज की शक्ति, सद्गुण और संगठित चरित्र राष्ट्रीय एकता,अखंडता और विकास की गारंटी देते हैं। हिंदू समाज भारत के प्रति उत्तरदायी है। यह एक समावेशी समाज है। यह ‘हम और वे’ की मानसिकता से मुक्त है और मुक्त रहेगा, जो अनेक नामों और रूपों के सतही भेदों के आधार पर विभाजन पैदा करती है। हिंदू समाज ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के महान विचार का पोषक और संरक्षक है। 

चंद्रशेखर आज़ाद  उपनगर में  राजेश कुमार प्रान्त प्रचार प्रमुख (RSS) मुख्य वक्ता रहें। उन्होंने कहा संघ पिछले 100 वर्षों से विजयदशमी का उत्सव मनाता आ रहा है ,भारत माता को परम वैभव तक ले जाने का संकल्प जो कि संघ ने 100 वर्ष पूर्व लिया था उसको गति देने हेतु इस वर्ष संघ पूरे जोर-शोर से अनेको कार्यक्रम करेगा जिस प्रकार स्वामी दयानंद जी ने आर्य समाज की स्थापना से समाज को एकजुट कर हिंदुओं को संगठित करने का कार्य किया, इस प्रकार से 1925 से संघ इसी दिशा में अनवरत यही कार्य कर रहा है आरंभ में 17 से स्वयंसेवकों के साथ शुरू हुआ संघ  आज एक विशाल वट वृक्ष बन चुका है 1940 तक डॉक्टर हेडगेवार जी के रहते संघ पूरे भारत में फैल चुका था श्री गुरु जी द्वितीय सरसंघचालक जी के सानिध्य में संघ देश के प्रत्येक जिले तक अपना विस्तार कर चुका था दो-दो बार प्रतिबंध लगने के बाद भी संगठन दुगनी गति से अपना विस्तार करता रहा बहुत पहले हिंदू आत्म विस्मृति का भाव लेकर बहुत संकोच में गुलामी का जीवन जी रहा था अब शाखों के माध्यम से स्वयंसेवकों के व्यक्ति निर्माण से संघ द्वारा लाखों कार्यकर्ता देश की प्रगति देश की अस्मिता तथा देश की उन्नति में दिन-रात सभी कार्य करने में पूरी लगन से जुड़े हुए हैं 

रणदीप कादयान,सरपंच सिवाह ने स्वयंसेवकों और समाज को सम्बोधित करते कहा कि आर्य समाज और आरएसएस दोनों ही धर्म और राष्ट्र सेवा को प्रथम रखते हैं। डॉ हेडगेवार ने धर्म और राष्ट्र सेवा के लिए आरएसएस की स्थापना की। आरएसएस के बारे दूर से बोलना सरल होता है,आप शाखा में आए आपको पता चल जाएगा कि आरएसएस की शाखा में केबल धर्म और राष्ट्र सेवा की बात होती है। धर्म केवल एक ही है।सूर्य का धर्म सभी को प्रकाश देना है, वह प्रकाश देते हुए यह नहीं देखते कि कोई छोटा है कोई बड़ा है। इसी प्रकार संघ भी अपने सेवा कार्य कर रहा हैं 

इस अवसर समाज से  गणमान्य भगिनी और बंधु बड़ी संख्या में उपस्तिथ रहे,सतपाल बंसल (संस्थापक एवं कुलपति- गीता विश्वविद्यालय) , ब्रिगेडियर यशपाल, दमन प्रधानाचार्य शिवा सैनिक स्कूल सिवाह, डॉक्टर पवन कुमार समाजसेवी, ब्रह्मकुमारी बहने,राजीव कुमार,कपिलदेव, राजिंदर सिंह,डॉ नवीन सुनेजा आदि मुख्य तौर पर मौजूद रहे.

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