पंजीकरण पोर्टल में नई सुविधाएँ और सुधार लागू – नागरिकों के लिए हुई प्रक्रिया और अधिक सरल व पारदर्शी
BOL PANIPAT , 13 नवम्बर। हरियाणा सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा पंजीकरण पोर्टल में कई नई सुविधाएँ और तकनीकी सुधार सफलतापूर्वक लागू किए गए हैं, जिनसे नागरिकों को अधिक सहज, तेज़ और पारदर्शी सेवाएँ प्राप्त होंगी।
विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि नागरिक अब नमूना विलेख (सेम्पल डीड) का पूर्वावलोकन अनुमोदन से पहले देख सकेंगे। गलत फोटो या उपस्थिति की स्थिति में उप-पंजीयक (सब रजिस्ट्रार) अनुमोदन से पूर्व केस को पंजीकरण रजिस्टर (आरसी) को वापस कर सकेगा। इसके अलावा, विधवा आदि जैसे संबंध विकल्प जोड़े गए हैं, जो विलेख पर भी प्रदर्शित होंगे।
उन्होंने बताया कि सरकारी हस्तांतरण विलेखों के लिए अब केवल विभाग का नाम आवश्यक होगा, पैन और आधार संख्या नहीं मांगी जाएगी। सरकारी एजेंसियों जैसे एचएसवीपी, एचएसआईआईडीसी, एचएसएएमबी और हाउसिंग बोर्ड के मामलों में किला/खसरा अनिवार्य नहीं रहेगा।
जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) से संबंधित मामलों में अधिकृत व्यक्ति की उपस्थिति अब दर्ज की जाएगी और विलेख में मुद्रित होगी। डीड प्रिंटिंग प्रक्रिया में सुधार किया गया है, जिससे अब विलेख पर अधिकतम उपलब्ध जानकारी मुद्रित होगी।
लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के लिए खसरा चयन की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। अब सिस्टम प्रोपर्टी आईडी (पीआईडी) के आधार पर स्वचालित रूप से आगे बढ़ेगा। ट्रांसफर परमिशन केवल सेल, गिफ्ट या एक्सचेंज डीड के लिए आवश्यक होगी, जबकि वसीयत विलेख (विल डीड) में दूसरी पार्टी वैकल्पिक रहेगी।
विभाग ने बताया कि अब एक से अधिक प्रथम एवं द्वितीय पक्ष जोड़े जा सकेंगे। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में नो ड्यूज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता समाप्त की गई है। पोर्टल पर दस्तावेज़ अपलोड सीमा को 10 एमबी से बढ़ाकर 50 एमबी कर दिया गया है तथा नियम और शर्तों की सीमा 500 शब्दों से बढ़ाकर 10,000 शब्द कर दी गई है।
अधिकारियों के लॉगिन में ब्लॉक खसरा पृष्ठ जोड़ा गया है और आपत्ति के समय किसी भी दस्तावेज़ की मांग नहीं की जाएगी। पुराने शहर क्षेत्रों में खसरा अनिवार्य नहीं रहेगा, वहीं जीपीए रद्दीकरण मामलों में दूसरी पार्टी की आवश्यकता नहीं होगी। इसके साथ ही एनओसी नंबर अब विलेख पर मुद्रित किया जाएगा।
शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) क्षेत्रों में जहाँ एकल स्वामी है, वहाँ शेयर को 1/1 माना जाएगा। सीआरओ लॉगिन में एड/डिलिट सिगमेंट पृष्ठ सक्रिय किया गया है। अब विलेख के प्रकार के अनुसार प्रथम पक्ष की गतिशील परिभाषा (डायनामिक डेफिनेशन) स्वचालित रूप से निर्धारित होगी — जैसे सेल डीड में ‘विक्रता’ और जीपीए में ‘मूलधन’।
विकासाधीन नई सुविधाएँ:
नागरिक आपत्ति के समय (13 नवम्बर 2025 से) अतिरिक्त दस्तावेज़ संलग्न कर सकेंगे।
विलेख-वार डिफ़ॉल्ट नियम एवं शर्तें निर्धारित की जाएँगी — इस कार्य में जिला राजस्व अधिकारी करनाल सहयोग करेंगे।
विलेखों पर बारकोड मुद्रण की सुविधा जोड़ी जाएगी ताकि डिज़ाइन और प्रामाणिकता में सुधार हो।
एक्सचेंज डीड वर्कफ़्लो जोड़ा जाएगा।
तहसीलवार कैश बुक मॉड्यूल विकसित किया जा रहा है।
नियुक्तियों और आवेदनों की निगरानी हेतु डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है।

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