डॉ. एम.के.के. स्कूल, मॉडल टाऊन में गीता पर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : 28 नवम्बर। 28 नवम्बर। जिला प्रशासन और सूचना, जन सम्पर्क एवं भाषा विभाग की ओर से गीता महोत्सव के तहत प्रथम दिन डॉ. एम.के.के. स्कूल, मॉडल टाऊन में गीता पर विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में विभिन्न वक्ताओं ने गीता की महत्त्वता पर रोशनी डाली। फल कर्म का आधार है , फल कर्म को निर्धारित करता है व कर्म पर मनुष्य का अधिकार है इत्यादि बातों को लेकर चर्चा की गई।
एसडीएम मनदीप कुमार ने सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचकर स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि गीता के साथ जीवन का सच जुड़ा है और यह जीवनशैली को दर्शाती है। गीता के प्रति श्रद्धा चाहिये। गीता के समान ऊंचा प्रेरणा परक कोई ग्रंथ नही है। गीता प्रेरणा देती है और असहाय जीवन में जान फूंकती है। यह किसी मजहब का नही मानव जीवन का सारांश है। उन्होंने स्कूली छात्राओं से नियमित अभ्यास करने व मैडिटेशन करने का आह्वान किया।
उन्होंने जीवन प्रबंधन को गीता के साथ जोडक़र अदभूत सारांश प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि समय में भले ही बदलाव आया हो लेकिन गीता की प्रासांगिकता कम नहीं हुई है। सभी प्रकार की जिज्ञासाओं का समाधान गीता है। उन्होंने अनेक उदाहरण देकर गीता के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गीता में विपरित परिस्थितियों में जीना सिखाती है और जीवन के थपेड़ों में आगे बढऩा सिखाती है।
गीता विश्वविद्यालय से पहुंची डॉ. प्रेरणा डावर ने विद्यार्थियों को अपने सही कर्मो का निरंतर अभ्यास करने की बात कहते हुए कहा कि निराशा में पार निकालने वाला ग्रंथ ही गीता है। गीता हमें कर्म करने का संदेश देती है। आलस्य त्यागने का संदेश देती है। अकर्मनता को त्याग कर कर्म करने से जीवन स्वस्थ होता है। लोगों को गीता के उपदेशों को अपने आचरण में ढालना चाहिये। गीता को समझने के लिए परमात्मा में विश्वास जरूरी होना चाहिये। उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों को इसकी लत लगाई जा रही है जोकि भविष्य में बहुत खतरनाक साबित होगी। इसलिए बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रहकर अपने काम पर फोकस करना चाहिए।
सेमिनार में अग्रवाल समाज पानीपत के अध्यक्ष विकास गोयल ने कहा कि गीता हमें यही सिखती है कि हमें सरल रहना चाहिए और विद्यार्थियों को पक्षियों की तरह हल्का होकर अपने काम पर फोकस करना चाहिए ताकि वे जीवन में ऊंचा उड़ सकें। बच्चों को हमेशा जिज्ञासु बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि गीता में ही शांति है। इससे मनुष्य को पूर्ण संतुष्टि मिलती है। गीता को समझने के लिए कर्म में योग करना होगा। गीता जीवन की नैय्ïया पार उतारने वाला ग्रंथ है। हमें इसे घर में आवश्यक रूप से पढऩा चाहिये।
राजकीय वरिष्ठï मा. वि. वैसर के प्रधानाचार्य महेन्द्र दीक्षित ने कहा कि मनुष्य के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं आज का मानव चारों और से चुनौतियों और द्वंदो से घिरा है। उसका इस स्थिति में मार्गदर्शन गीता कर सकती है। गीता को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गीता का सार कर्मके प्रति प्ररित करना है। गीता में सभी संस्कृतियों का जीवन है।
राष्टï्रीय सैनी समाज के पानीपत के अध्यक्ष कंवर रविन्द्र सैनी ने गीता के विभिन्न अध्यायों के श्लोकों का वाचन कर बच्चों को अपने जीवन के अनुभव सांझा किए और कहा कि बच्चों को कड़ी मेहनत करनी चाहिए और अपना ध्यान भटकाना नहीं चाहिए। गीता सैमिनार में जीओ गीता की ओर से अनिल मदान ने गीता स्तुति कर विभिन्न अध्यायों का अनुवाद हिन्दी में बताया।
इस मौके पर एसडीएम मनदीप कुमार को शाल भेंट कर स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। एसडीएम मनदीप कुमार ने गीता सैमिनार में पहुंचे वक्ताओं को स्मृति चिन्ह भेट कर सम्मानित किया। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी राकेश बुरा, एलडीएम राजकुमार, डीआईपीआरओ सुनील बसताड़ा, डॉ. एम.के.के.स्कूल के एडमिनिस्ट्रेटर दीपक कुमार इत्यादि मौजूद रहे।

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