डीपीएस पानीपत रिफाइनरी के गर्वित कौशिक ने क्लैट व ऐलेट दोनों परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर बढ़ाया जिले का मान
BOL PANIPAT : डी पी एस पानीपत रिफाइनरी के बारहवीं कक्षा के छात्र गर्वित कौशिक ने क्लैट 2026 एवं ऐलेट 2026 परीक्षाएँ उत्तीर्ण करके अपने स्कूल एवं पानीपत जिले का मान बढ़ाया है। क्लैट की परीक्षा जहाँ देश के सर्वोच्च लॉ यूनिवर्सिटीज में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है, वहीं ऐलेट की परीक्षा एन आई आर एफ रेंकिंग में द्वितीय स्थान रखने वाली नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली में प्रवेश दिलाती है। गर्वित कौशिक ने क्लैट की परीक्षा में ऑल इंडिया 50 वी रैंक हासिल की, वहीं हरियाणा राज्य में उसकी रैंक 5 रही। एलेट की परीक्षा में उसने नंबर 1 नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, “नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलुरू” में प्रवेश के लिए पात्रता प्राप्त बनाई। इससे साथ ही उसने ऐलेट 2026 की परीक्षा मीन इंडिया में ऑल इंडिया 49वीं रैंक हासिल करके नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली में प्रवेश के लिए भी योग्यताएँ सिद्ध कीं।
गर्वित के पिता अनुज कौशिक पानीपत रिफाइनरी के विद्युत एवं उपकरण विभाग में सीनियर इंजीनियरिंग असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं। परिवार में उनकी माता ऋतु कौशिक, जो कि गृहिणी हैं, के अलावा एक बड़ी बहन हैं और वह भी कानून की छात्रा हैं। गर्वित आठवीं से ही डी पी एस पानीपत रिफाइनरी का मेधावी छात्र रहा है। जब वह मात्र 8 वर्ष का था तभी से गर्वित का झुकाव कानून एवं न्याय प्रणाली की ओर रहा। इसका प्रमुख कारण उनके पिता को उच्च शिक्षा के एक मामले में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उनके पक्ष में दिया गया निर्णय था। इस कारण कानून और न्याय व्यवस्था में गर्वित का विश्वास और मनोबल बना।
इन दोनों परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए गर्वित ने दो वर्षों तक ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से निरंतर कठिन परिश्रम किया। अपनी सफलता का श्रेय वह ईश्वर की कृपा, माता–पिता और अपने शिक्षकों के आशीर्वाद को देता है।
अपनी उपलब्धि पर गर्वित ने कहा,
“यदि किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करनी है तो सबसे पहले उस क्षेत्र में रुचि होना आवश्यक है। जब रुचि होती है, तभी इंसान अपना 100% दे पाता है। मैंने स्कूल की परीक्षाओं के साथ-साथ क्लैट की तैयारी के लिए भी समय निकाला और दोनों को अच्छी तरह प्रबंधित किया। मैंने समय-समय पर मॉक टेस्ट दिए, जिनसे मेरी तैयारी को न केवल दिशा मिली बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा।”

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