माता सावित्री बाई फुले के विचारों, आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया
BOL PANIPAT : क्रांति ज्योति सावित्रीबाई फुले की जयंती का दिन। दुनिया भर में इसे हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। सावित्रीबाई फुले न केवल भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, बल्कि एक समाज सुधारक, कवियत्री और महिलाओं के अधिकारों की प्रबल पैरोकार भी थीं। उनके जीवन, विचारों और संदेशों ने लाखों लोगों व आम जनमानस के जीवन में परिवर्तन किया। ये विचार आज यहां स्थानीय भगत सिंह स्मारक में स्वतंत्रता सेनानी कामरेड टीका राम सखुन सभागार में सीपीआई की हरियाणा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य एवं जिला सचिव कामरेड पवन कुमार सैनी एडवोकेट ने व्यक्त किए ।
कामरेड पवन कुमार सैनी एडवोकेट सैनी ने बताया कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में एक किसान परिवार में हुआ था।उनके पिता का नाम खंडोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। उस समय की प्रथा के अनुसार, मात्र 9 वर्ष की आयु में 1840 में उनका विवाह 12 वर्षीय ज्योतिराव फुले के साथ हो गया। ज्योतिराव फुले स्वयं एक क्रांतिकारी समाज सुधारक, विचारक और लेखक थे, जिनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को सतारा में हुआ था। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई को घर पर ही शिक्षा दी, क्योंकि उस युग में महिलाओं की शिक्षा पर प्रतिबंध था।
सावित्रीबाई ने अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद 1848 में पुणे के भिड़े वाड़ा में भारत के पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की। यह स्कूल न केवल लड़कियों के लिए था, बल्कि दलित और पिछड़े वर्गों की बच्चियों को भी शिक्षा प्रदान करता था। इस कदम से उन्हें समाज के रूढ़िवादी तत्वों से भारी विरोध का सामना करना पड़ा। लोग उन्हें अपमानित करते, पत्थर मारते, कीचड़ फैंकते लेकिन सावित्रीबाई और ज्योतिराव ने हार नहीं मानी। उन्होंने कुल 18 स्कूल खोले, जिनमें से कई दलितों और महिलाओं के लिए थे। माता सावित्रीबाई फूले ने सती प्रथा, बाल-विवाह व अन्य सामाजिक कुरितियों के खिलाफ व विधवा पुनर्विवाह के लिए संघर्षरत रहते हुए अपना जीवन यापन किया।
इस अवसर पर भूपेन्द्र कश्यप, ओम सिंह, मोहम्मद शमीम, सुभाष चन्द्र, सतीश यादव, अशोक कुमार, संदीप कुमार, छोटे लाल, पंडित लक्ष्मी चंद, प्रदीप कुमार, नवल किशोर, जय कुमार आदि ने माता सावित्री बाई फुले के चित्र पर माल्यार्पण किया और पुष्प अर्पित करते हुए उनके विचारों, आदर्शों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

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