बाल विवाह मुक्त भारत के लिए समाज की निर्णायक भागीदारी ज़रूरी: उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया
BOL PANIPAT , 8 जनवरी। बाल विवाह को रोकना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उपायुक्त डॉ विरेंदर कुमार दहिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक धार्मिक संस्थाएँ, विवाह सेवा प्रदाता, पंचायतें और आम नागरिक एकजुट होकर यह संकल्प नहीं लेते कि वे बाल विवाह को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करेंगे, तब तक इस सामाजिक बुराई का स्थायी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन बाल विवाह मुक्त भारत अभियान को पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है और इसके लिए हर स्तर पर आवश्यक सहयोग, निगरानी और सख्ती सुनिश्चित की जाएगी।
बाल संरक्षण अधिकारी-सह-बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने बताया कि बाल विवाह केवल एक सामाजिक कुप्रथा नहीं, बल्कि बच्चों के अधिकारों, उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षित भविष्य पर सीधा प्रहार है। कई बार इसे परंपरा, सामाजिक दबाव या मजबूरी के नाम पर स्वीकार कर लिया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि बाल विवाह बच्चों से उनका बचपन और संभावनाएँ छीन लेता है। बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य इसी सोच को बदलना है।
उन्होंने बताया कि जनवरी माह में अभियान के दूसरे चरण के अंतर्गत विशेष रूप से धार्मिक संस्थाओं और विवाह से जुड़े सेवा प्रदाताओं को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल क़ानून के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक ज़िम्मेदारी और संवेदनशीलता को मजबूत करना है।

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