Wednesday, April 22, 2026
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युवा अपने सामाजिक कार्यों और दायित्वों में नशामुक्ति का संकल्प भी शामिल करे: डॉ ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन पानीपत

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 25, 2026 Tags: , , , , ,

एड्स से बचना ही इसका सबसे बेहतरीन इलाज है: सुदेश

वाईआरसी कार्यकर्ताओं को दिलाई गई नशे से दूर रहने की शपथ

भाषण, सामूहिक नृत्य और गायन प्रतियोगिताओ का हुआ आयोजन

BOL PANIPAT , 25 फरवरी. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया, आईएएस, उपायुक्त एवं प्रधान जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत का आशीर्वाद और मार्गदर्शन में आयोजित पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन की विधिवत शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई जिसे मुख्य अतिथि डॉ ललित वर्मा डिप्टी सिविल सर्जन पानीपत ने वाईआरसी काउंसलरस और कार्यकर्ताओं के साथ फहराया । तत्पश्चात डॉ ललित वर्मा डिप्टी सिविल सर्जन पानीपत, सुदेश प्रोजेक्ट मैनेजर टीआई पानीपत और विकास अग्नि-शमक प्रशिक्षक पानीपत ने अपने विषयों और अनुभव को कार्यकर्ताओं और काउंसलरस के साथ बांटा । माननीय मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, वाईआरसी काउंसलर डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने पौधा-रोपित गमलें भेंट करके किया । तीसरे दिन स्वास्थ्य विभाग पानीपत द्वारा वाईआरसी कार्यकर्ताओं के लिए डेंटल चेक-अप और हिमोग्लोंबिन की जांच हेतू हेल्थ कैंप लगाया गया । सांयकालीन सत्र में भाषण प्रतियोगिता, ग्रुप डांस और गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसके परिणाम अंतिम दिन घोषित किये जायेंगे । हरमेश चंद कैंप निदेशक की अगुआई और प्रेरणा से प्रतियोगिताओं में कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया । भाषण प्रतियोगिता के विषय रक्त दान, प्राथमिक चिकित्सा, बेटी बचाओ-बेटी पढाओ, स्वच्छता अभियान, मोबाइल का सदुयोंग और दुरूपयोग, वाईआरसी का योगदान रहे । तीसरा दिन ड्रग एडिक्शन, आग से बचाव और एचआईवी एड्स जैसे विषयों पर केन्द्रित रहा । 

डॉ ललित वर्मा डिप्टी सिविल सर्जन ने अपने संबोधन में युवा वाईआरसी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सदा नशे से दूर रहेंगे और अपने दोस्तों एवं रिशेदारों को भी इससे दूर रखने में मदद करेंगे । कभी शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में, कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके, तो कभी कोई मज़बूरी बताकर, कभी टेंशन तो कभी बोरियत दूर करने के लिए लोग शराब, सिगरेट, तम्बाकू, ड्रग्स आदि अनेक प्रकार के मादक द्रव्यों को लेना शुरू करते है । लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । मुँह, गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रैशर, अल्सर, यकृत रोग, अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा है । उन्होनें नशा छोड़ने के उपाय एवं उपचारों बारे भी विस्तार से बताया । उन्होनें कहा कि युवाओं को अपने सामाजिक कार्यों और दायित्वों में नशामुक्ति प्रकल्प भी शामिल करना चाहिए । अंत में उन्होनें युवाओं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई ।

सुदेश, प्रोजेक्ट मैनेजर ने ‘एचआईवी एवं एड्स जागरूकता विषय पर अपना व्याख्यान दिया । उन्होनें कहा कि एड्स का पूरा नाम ‘एक्वायर्ड इम्यूनों डेफिशिएंसी सिंड्रोम’ है । यह एक संक्रामक रोग है और जिस वायरस से यह पैदा होता है उसे ‘ह्यूमन इम्यूनों डेफिशिएंसी वायरस’ (एचआईवी) कहते हैं । ड्स बिमारी का वायरस किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में मुख्य रूप से लार से, रोगग्रस्त व्यक्ति के खून से और ब्लड चढ़ाने के दौरान या नशे के लिए शिराओं में प्रयुक्त एक ही सिरिंज की निडिल की प्रयोग से पहुंच जाता है । एड्स के कारण मुंह में सफेद चकत्तेदार धब्बे उभरना, शरीर से अधिक पसीना निकलना, बार-बार थकान की शिकायत होना, अचानक वजन कम होने लगना, तेज बुखार रहना, बार-बार दस्त लगना, लगातार खांसी आना, गले, जांघों और बगलों में गांठें पड़ना, सारे शरीर में खुजली और जलन हो सकते है । इस रोग से बचाव करना ही इसका सबसे बेहतरीन इलाज है । फिर भी कुछ सावधानियां अपना कर हम इस बिमारी से दूर रह सकते है । होठों पर घाव या कहीं भी खून का रिसाव हो हमें ऐसे व्यक्ति के सीधे संपर्क में नहीं आना चाहिए । सैलूनों में शेविंग करवाते समय नई ब्लेड का उपयोग करना चाहिए । खून लेते और देते समय एचआईवी मुक्त होने की जांच अवश्य करवानी चाहिए । हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम अपने परिजनों, परिचितों और निकट संबंधियों का खून ही उपयोग में ले । इंजेक्शन लगवाते समय डिस्पोजेबल सिरिंज और निडिल का प्रयोग करना चाहिए ।

     विकास कुमार अग्नि शमक प्रशिक्षक ने बताया कि साधारणतः पांच प्रकार से आग की घटनाएं होती । पहली साधारण आग जो घास-फूस आदि में लगती है, दूसरी तरल पदार्थ तेल आदि की आग, तीसरी गैस की आग जिसमें रसोई गैस शामिल है, चौथी धातु की आग और पांचवीं बिजली से लगने वाली आग है । इन सभी प्रकार से लगने वाली आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए अलग-अलग तौर-तरीके अपनाए जाते हैं । उन्होंने सभी प्रकार से लगने वाली आग पर काबू पाने के तौर-तरीकों की विस्तार से जानकारी दी और सभी को व्यावहारिक तरीके से आग लगाकर और फिर उसे बुझाकर दिखाया । उन्होनें कहा कि आग और आपदाओं पर काबू पाने का सबसे महत्वपूर्ण गुण मनुष्य का मनोबल और साहस है क्यूंकि निडर और साहसी व्यक्ति ही बिना घबराए प्राकृतिक आपदाओं और आग पर काबू पा सकता है । उन्होंने बताया कि स्कूल, कॉलेज या घर में अग्नि शमन यंत्रों को सही जगह पर रखना चाहिए ताकि आगजनी के समय उनका इस्तेमाल करने में आसानी हो । अग्निशमन यंत्र चालू हालत में होने चाहिए और हमें उन्हें चलाना भी आना चाहिए । इस अवसर पर कार्यकर्ताओं एवं काउंसलरस ने आग लगने पर अग्नि शमन यंत्र का इस्तेमाल करना सीखा ।

     डॉ अनुपम अरोड़ा ने वाईआरसी कार्यकर्ताओं को जीवन में सकारात्मक सोच रखते हुए आगे बढ़ने की सलाह दी और कहा कि तभी वे देश के जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्रीय निर्माण में अपना योगदान दे पायेंगे । 

इस अवसर पर विभिन्न कालेजों से आये काउंसलरस प्रो सुमन वर्मा, जीडीआर कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, प्रो मंजली वैश गर्ल्ज कॉलेज समालखा, डॉ शिवाली देवगन एनसी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल इसराना, प्रो खुशबू वर्मा आर्य कॉलेज पानीपत, डॉ किरण देवी चौधरी देवी लाल गर्ल्ज कॉलेज सिवाह, डॉ पूजा रानी राजकीय गर्ल्ज कॉलेज मतलौडा, प्रो अभिषेक मोगा राजकीय महाविधालय बापौली और 120 वाईआरसी कार्यकर्ता मौजूद रहे । 

    

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