दूसरों की सेवा करने से पहले युवा अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करे: अंकुश मिगलानी
–जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी: अंकुश मिगलानी
–वाईआरसी कार्यकर्ताओं ने निकाली ‘नशे के विरुद्ध’ मेगा रैली
BOL PANIPAT , 26 फरवरी,एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में आयोजित पांच दिवसीय जिला स्तरीय यूथ रेड क्रॉस प्रशिक्षण शिविर के चौथे दिन की विधिवत शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई जिसे मुख्य अतिथि अंकुश मिगलानी उपाध्यक्ष भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी हरियाणा राज्य शाखा एवं सैंट जॉन एम्बुलेंस ने फहराया और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया । तत्पश्चात विशिष्ट मेहमान डॉ पंकज चौधरी असिस्टेंट प्रोफेसर पानीपत और डॉ राकेश गर्ग ने अपने-अपने विषयों और अनुभव को कार्यकर्ताओं और काउंसलरस के समक्ष रखा । हरमेश चंद कैंप निदशक ने सभी कार्यकर्ताओं को रेड क्रॉस के कार्यों और उपयोगिता के बारे में बताया । चौथा दिन कैरियर काउंसलिंग, पर्यावरण संरक्षण एवं पौधारोपण, ड्रग एब्यूज जैसे विषयों पर केन्द्रित रहा ।
वाईआरसी कार्यकर्ताओं ने ड्रग एडिक्शन के खिलाफ एक विशाल जन चेतना रैली में भी भाग लिया जिसे मुख्य अतिथि अंकुश मिगलानी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और जो कॉलेज प्रांगण से शरू होकर सनौली रोड, रेलवे रोड, लाल बत्ती चौंक, एसएचओ पुलिस स्टेशन सिटी, पुराने बस अड्डे, लाल बत्ती चौंक, रेडक्रॉस भवन से होते हुए वापिस कॉलेज पहुंची । विदित रहे कि इस पांच दिवसीय कैंप को डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया, आईएएस, उपायुक्त एवं प्रधान जिला रेड क्रॉस सोसाइटी पानीपत का आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त है ।

अंकुश मिगलानी उपाध्यक्ष ने कहा कि वे इस कैंप के हर वाईआरसी कार्यकर्ता से उम्मीद करते है कि वह अपने आस-पडौस में किसी दिव्यांग की पहचान कर उसकी जानकारी रेडक्रॉस को दे ताकि उनकी मदद की जा सके । दूसरों की मदद से पहले अपने माता-पिता की सेवा करे । उनका मकसद रेडक्रॉस को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है । आर्थिक रूप से असमर्थ विद्यार्थियों की फीस भरने का कार्य भी रेडक्रॉस द्वारा किया जा रहा है । उन्हें उम्मीद है हर वाईआरसी कार्यकर्ता यहाँ से कुछ न कुछ सिख कर जाएगा और उसे समाज के भले के लिए इस्तेमाल करेगा ।
डॉ पंकज चौधरी असिस्टेंट प्रोफेसर ने अपने व्याख्यान में कहा कि जीवन में हर चीज हमें कुछ न कुछ सिखाने में सक्षम है बशर्ते हममे सिखने की इच्छा-शक्ति हो । हर बड़े काम की शुरुआत पहले साधारण से कदम से ही होती है । जीवन में कुछ चीजों पर बेशक हमारा बस नहीं होता परन्तु आत्म-विश्वास, सकारात्मक रवैया, लक्ष्यों का निर्धारण, हमारे दोस्त कैसे हो, कैसी पुस्तकें हमें पढनी चाहिए इत्यादि पर हमारा खुद का ही बस होता है । ग्रेजुएशन के बाद कैरियर चुनने से पहले हमें अपनी कमियां, मजबूत बिंदु, अवसरों और संभावित खतरों का आकलन पहले से कर लेना चाहिए । ग्रेजुएशन के बाद बीकॉम के छात्र सीए, एमकॉम, एमबीए, सीएस, सीऍफ़ए, बीएड जैसे कोर्स और बैंकिंग एवं टीचिंग सेक्टर, डिजिटल मार्केटिंग एवं अन्य व्यवसायिक उद्यमों में नौकरियां कर सकते है । इंश्योरेंस सेक्टर में भी नौकरियों की अपार संभावनाएं है । एसबीआई एवं अन्य बैंकों में प्रोबेशनरी ऑफिसर, क्लर्क, स्पेशलिस्ट ऑफिसर आदि के पद विज्ञापित किये जाते है । एसबीआई को छोड़कर अन्य सभी बैंकों की भर्ती आईबीपीएस द्वारा की जाती है । उन्होनें बैंकों की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किये जाने वाले विषयों और उन से सम्बंधित पुस्तकों की जानकारी भी छात्र-छात्राओं के साथ साझा की और उन्हें पूछे जाने वाले प्रश्नों के उदाहरण बताये और उनकी प्रेक्टिस कराई । बैंकिंग सेक्टर प्रति वर्ष 50 हजार से अधिक पद निकालता है और यहाँ सैलरी भी अच्छी मिलती है । बैंकों में प्रिलिमिनरी स्टेज के बाद मुख्य परीक्षा ली जाती है और अंत में साक्षात्कार के बाद अंतिम चयन किया जाता है । टीचिंग में केंद्र सीटेट और राज्य सरकारें एचटेट परीक्षाका आयोजन वर्ष में दो बार करते है । इन्हें पास करने वाले छात्र बाद में स्कूलों में प्री-प्राइमरी टीचर, पीआरटी, टीजीटी, पीजीटी आदि पदों के लिए आवेदन कर सकते है । कॉलेज और विश्वविधालय में कार्य करने के लिए एमए के बाद यूजीसी नेट परीक्षा या पीएचडी की डिग्री की आवश्यकता होती है । अध्यापन के क्षेत्र में भी सैलरी अच्छी, जॉब की संतुष्टि और प्रमोशन की अपार संभावनाएं है । उन्होनें इन सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कैसे करे को भी विस्तार से बताया । जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी । एक और शानदार कैरियर सीए का है जिसका काम वित्तीय लेखा-जोखा तैयार करना, वित्तीय सलाह देना, ऑडिट अकाउंट का विश्लेषण करना और टैक्स से संबंधित काम करना होता है ।
डॉ राकेश गर्ग वाईआरसी काउंसलर ने प्रदूषण और पर्यावरण संतुलन पर समझाते हुए कहा कि धान और गेहूं की कटाई के बाद लोग खेतों को जल्दी खाली करके दूसरी फसल रोपने के उद्देश्य से खेतों में ही पराली और अन्य कूड़े को जला देते हैं । इस पराली को जलाने से भूमि को बहुत क्षति पहुंचती है । इससे खेतों के आसपास के वातावरण का तापमान बहुत बढ़ जाता है तथा पानी सूख जाने के कारण फसल के लिए पानी की आवश्यकता भी बढ़ जाती है । खेतों में मौजूद भूमिगत कृषि मित्र कीट तथा अन्य सूक्ष्म-मित्र जीव आग की तपिश से मर जाते हैं और शत्रु कीटों का प्रकोप बढ़ जाने के कारण नई बोई गई फसलों को तरह-तरह की बीमारियां घेर लेती हैं । इसके परिणामस्वरूप भूमि की उर्वरता कम हो जाती है तथा उत्पादन घट जाता है । इससे निपटने के उपाय सुझाते हुए उन्होनें कहा कि जलाने की बजाय किसान सीधी बिजाई का तरीका अपना सकते हैं । वे पिछली फसल की खड़ी पराली के बीच ही अगली फसल रोप सकते है और सूखी हुई खड़ी फसल धीरे-धीरे खाद में बदल कर फायदेमंद साबित होती है । हमें पर्यावरण से स्नेह का रिश्ता बनाकर रखना चाहिए वरना इसके दुष्परिणाम हमारी आने वाली पीढ़ियों को झेलने होंगे ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि रेडक्रॉस एक शानदार और वैचारिक रूप से प्रेरित करने वाली सेवा इकाई है । यदि वाईआरसी को स्कूलों और कालेजों में हर विद्यार्थी के लिए अनिवार्य कर दिया जाए और इसे पाठ्यक्रम के भाग के रूप में एकीकृत कर दिया जाए तो इसके जो फायदे हमें मिलेगे उनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते है ।
इस अवसर पर विभिन्न कालेजों से आये काउंसलरस प्रो सुमन वर्मा, जीडीआर कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन, प्रो मंजली वैश गर्ल्ज कॉलेज समालखा, डॉ शिवाली देवगन एनसी कॉलेज ऑफ़ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल इसराना, प्रो खुशबू वर्मा आर्य कॉलेज पानीपत, डॉ किरण देवी चौधरी देवी लाल गर्ल्ज कॉलेज सिवाह, डॉ पूजा रानी राजकीय गर्ल्ज कॉलेज मतलौडा, प्रो अभिषेक मोगा राजकीय महाविधालय बापौली और 120 वाईआरसी कार्यकर्ता कैंप में उपस्थित रहे ।

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