पी-25 परियोजना सहित रिफाइनरी के सभी संचालन एवं उत्पाद आपूर्ति पूर्णतः सामान्य एवं सुचारु.
-पीआरपीसी प्रबंधन श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षित कार्य वातावरण तथा श्रम कानूनों के पूर्ण अनुपालन के प्रति प्रतिबद्ध है।
–पीआरपीसी प्रबंधन द्वारा जारी नोटिफ़िकेशन
BOL PANIPAT : इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड का पानीपत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (पीआरपीसी) की पी-25 परियोजना में दिनांक 23 फरवरी 2026 को संविदा श्रमिकों द्वारा कुछ मांगों के संबंध में अपनी चिंताएँ व्यक्त की गई थीं। श्रमिकों का एक समूह गेट संख्या 3 एवं बाद में गेट संख्या 1 के निकट एकत्रित हुआ तथा विभिन्न श्रम संबंधी मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।
पीआरपीसी प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्परता एवं संवेदनशीलता के साथ संवाद की प्रक्रिया प्रारंभ की। मुख्य नियोक्ता, संबंधित ठेकेदारों, श्रमिक प्रतिनिधियों तथा जिला प्रशासन की उपस्थिति में विस्तृत एवं सकारात्मक वार्ता आयोजित की गई।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी वेतन भुगतान संबंधी अधिसूचना के अनुसार पानीपत “सिटी एरिया–सी” श्रेणी के अंतर्गत आता है। उक्त अधिसूचना के अनुरूप पानीपत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स (पीआरपीसी) द्वारा श्रमिकों को राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दरों में से जो भी अधिक दर होते है, जो वर्तमान में केंद्र सरकार की निर्धारित दर है, उसी के अनुसार भुगतान किया जाता है। इसके साथ ही श्रमिकों को पारिश्रमिक के अतिरिक्त अन्य सभी वैधानिक देय लाभ भी प्रदान किए जाते हैं।
केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दरों का विवरण निम्नलिखित है :-
| श्रेणी | मुख्य श्रम आयोग का कार्यालय (केंद्रीय)क्षेत्रवार प्रति दिन वीडीए सहित मजदूरी दर(रुपए में) |
| अकुशल | 541 |
| अर्ध-कुशल | 632 |
| कुशल | 760 |
| उच्च कुशल | 893 |
सकारात्मक एवं रचनात्मक संवाद के परिणामस्वरूप 28 फरवरी 2026 को श्रमिक प्रतिनिधियों द्वारा हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की गई तथा यह आश्वासन दिया गया कि अब कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं की जाएगी।
वर्तमान में पी-25 परियोजना सहित रिफाइनरी के सभी संचालन एवं उत्पाद आपूर्ति पूर्णतः सामान्य एवं सुचारु हैं।
पीआरपीसी प्रबंधन श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षित कार्य वातावरण तथा श्रम कानूनों के पूर्ण अनुपालन के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि पारस्परिक संवाद एवं सहयोग से ही औद्योगिक विकास और श्रमिक कल्याण के लक्ष्यों को साथ-साथ प्राप्त किया जा सकता है।

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