Friday, April 17, 2026
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व्यक्ति स्वयं का अवलोकन कर ही यह जान सकता है कि बुद्धि का इस्तेमाल किधर कर रहा है : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले)


BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2083 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में चार दिवसीय संत समागम कार्यक्रम के दूसरे दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि दो चीजें सबके अन्दर होती हैं सुमति और कुमति। जैसे मोबाईल फोन में अच्छी बातें भी होती हैं और बुरी भी। यह व्यक्ति पर है कि वह उसका इस्तेमाल कैसे करता है। प्रश्न यह है कि आप बुद्धि का इस्तेमाल किधर कर रहे हो अच्छाई में या बुराई में। व्यक्ति स्वयं का अवलोकन कर ही यह जान सकता है। व्यक्ति जब सत्संग में बैठता है तो उसमें दैवीय गुण प्रकट होते हैं जिससे व्यक्ति निर्भय हो जाता है। जब व्यक्ति निर्भय होता है तभी वह अपनी बुद्धि और विवेक का सही इस्तेमाल करता है। जिस प्रकार दूध से दही बनती है लेकिन फिर दही से दूध नहीं बनाया जा सकता, उसके बाद जिस प्रकार दही से छाछ बनती है लेकिन फिर उससे दही नहीं बनाई जा सकती, उसके बाद निकले हुए छाछ में से मक्खन बन सकता है लेकिन फिर मक्खन से छाछ नहीं बन सकती। तथा जब मक्खन को जब अग्नि में पकाते हैं तो घी बन जाता है लेकिन घी से पुनः मक्खन नहीं बनाया जा सकता इसी को रूपान्तर कहते हैं जब रूपान्तर होता है तो फिर पहले वाली स्थिति नहीं रहती। मनुष्य के जीवन में जब रूपान्तर होता है व्यक्ति संत बन जाता है उस रूपान्तरण के बाद व्यक्ति पहले वाली स्थिति में नहीं जा सकता, उसके बाद परिवर्तन नहीं होता। यही रूपान्तर और परिवर्तन में फर्क है। इससे पूर्व भजन गायक बब्बू कत्याल ने ‘‘ मुरली वाले, जो तू न संभाले तो हमें कौन संभाले’’ भजन गाकर सबको भाव विभोर कर दिया। इस अवसर ब्रह्मर्षि श्रीनाथ जी महाराज, प्रधान रमेश चुघ, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, अमन रामदेव, धर्मवीर नन्दवानी, ओमी चुघ, मोहन लाल जुनेजा, कर्म सिंह रामदेव, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, हरनारायण जुनेजा, श्याम लाल सपड़ा, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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