पड़ोसी नाराज होंगे तो अल्लाह कभी खुश नहीं हो सकते : मौलाना हारून
-पानीपत ईदगाह में 6 बच्चों ने कुरान-ए-करीम को पूरा किया
-बच्चों की दस्तारबंदी पर कई प्रदेशों से पहुंचे उलेमा
BOL PANIPAT : ईदगाह रोड स्थित मदरसा इस्लामिया तजविदुल कुरान पानीपत में आज ‘दरतार ए फजिलत’ का कार्यक्रम किया गया। जिसमें मुख्यातिथि जामिया बदुलूल उलूम गढ़ी दौलत से शेखूल हदीस रहे जबकि अन्य मुख्य मेहमानों में हजरत मौलाना आकील साहब, जमीयत उलेमा हिंद हरियाणा-पंजाब के सदर हजरत मौलाना हारून, हजरत मौलाना महफूजू रहमान कैराना, जमियत उलेमा हिंद के सदर पानीपत मौलाना इलियास, शहरी सदर मुफ्ती मोहम्मद शराफत साहब के साथ अलावा शहर के दिगर उलेमाओं ने शिरकत फरमाई। कार्यक्रम का संचालन अंजूमन इस्लामिया कमेटी ईदगाह मॉडल टाउन पानीपत की ओर से करवाया गया। कार्यक्रम में ६ बच्चों की दस्तारबंदी हुई, इन बच्चों ने कुरान ए करीम को मुक्कमल हिफ्ज किया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जमीयत उलेमा हिंद हरियाणा-पंजाब के सदर हजरत मौलाना हारून ने फरमाया कि कुरान हमें शिक्षा देती है कि हमें अपने पड़ोसियों की मदद करनी चाहिए। उन्हें अपने दुख सुख में शरीक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर आपसे आपका पड़ोसी नाराज है तो फिर समझो खुदा नाराज है। इसलिए हमें कोशिश करनी चाहिए कि हमारा पड़ोसी हमेशा खुश रहे।
बच्चों ने कुरान को सीने में उतार लिया
खुशकिस्मत है वो मां-बाप जिनके बच्चे कुराना ए हाफिज हो जाते हैं। उन्होंने उन माता-पिताओं को दिल से मुबारकबाद देते हुए कहा कि जिन 6 बच्चों ने कुरान-ए-करीम पूरा कर लिया है। उन्होंने मजलिश में बैठे सभी लोगों का आह्वान किया कि वो भी अपने बच्चों को दीनी शिक्षा के साथ साथ टैक्नॉलाजी शिक्षा भी दें। जिन बच्चों ने कुरान पूरा किया है उन बच्चों के मां-बाप को जब तक इनकी सांसें चलेंगी तब तक सवाब मिलता रहेगा। इसलिए खुश नसीब हैं वो मां-बाप जिनके बच्चे कुरान को दिलों में उतार लेते हैं और फिर उसकी रोशनी से पूरे जहां को रोशन करते हैं।
पुरानी बातें और अपनी जड़े नहीं भूलनी चाहिए : मौलाना हारून
जमीयत उलेमा हिंद हरियाणा-पंजाब के सदर हजरत मौलाना हारून ने बताया कि आज जिस मदरसे में हमें सभी बैठे हैं एक समय शरारती तत्वों ने इसे खंडित कर दिया था। 1962 के आसपास की बात है पानीपत की विधानसभा में जब यमुना से लगते हुए गांव में आते थे। पानीपत शहर से फतेह चंद विज अपने चुनाव प्रचार के लिए आए तो उन्होंने ईदगाह के मदरसे का जिक्र किया और विज साहब ने आश्वासन दिया कि अगर वे विधायक बने तो मदरसे को दोबारा से बना दिया जाएगा और विज साहब विधायक बने। उन्होंने इस मदरसे को बनवाने में बहुत बड़ा योगदान दिया। आज अल्लाह का कर्म है कि फिर से वहीं बहार पानीपत में देखने को मिल रही हैं।
‘तेरे नाम’ के बाल याद हैं लेकिन नबी का सलीका नहीं : मुफ्ती दाऊद
मुफ्ती दाऊद पानीपती ने मोबाइल दौर को इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन करार देते हुए कहा कि आज के युवाओं को इस मोबाइल ने पूरी तरह से जकड़ लिया है। एक उदाहरण देते हुए मुफ्ती साहब ने कहा कि युवाओं को तेरे नाम फिल्म में सलमान के बाल कैसे हैं, यह तो पता है, लेकिन हमारे नबी के बाल कैसे थे, इसका पता नहीं। हमारे नबी के नाखून कैसे थे, नबी के कपड़े कैसे थे, नबी चलते कैसे थे, नबी खाते-पीते कैसे थे। नबी का चाल चलन कैसे था। नबी सोते कैसे थे। उन्होंंने कहा कि आज मुसलमान अपनी हालत का खुद जिम्मेदार है। नमाज से दूर होती नस्लों को चेताते हुए उन्होंने कहा कि अब भी नहीं सुधरे तो फिर पछताने का वक्त भी नहीं मिलेगा।
पानीपत के इल्म का बजता था डंका : शेखूल हदीस
कैराना से आए मौलाना शेखूल हदीस ने पानीपत की पढ़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय पानीपत के इल्म (ज्ञान) का ढंका पूरी दुनिया में बजता था। हाली पानीपत द्वारा शिक्षा को लेकर किये गए प्रयास की भी उन्होंने जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज इन बच्चों को कुरान ए करीम पूरा होते देखकर वहीं जमाना याद आ रहा है। उन्होंने कहा कि अब वो दिन दूर नहीं जब दोबारा से पानीपत का नाम शिक्षा जगत में लिया जाएगा।
अमन, शांति व भाईचारे की दुआएं मांगी गई
कार्यक्रम के समापन से पहले देश-दुनिया में अमन, शांति, भाईचारे की दुआएं मांगी गई। वहीं कर्नाटक में हिजाब को लेकर छात्रा मुस्कान को परेशान करने वाले गमछाधारियों की भी कड़े शब्दों में निंदा की गई। मंच का संचालन कैराना से मौलाना मुर्सलीन व मौलाना वासिल ने संयुक्त रूप से किया।
हर साल रखेंगे प्रोग्राम : सादिक
मदरसे के जिम्मेदार मौलाना सादिक ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम हर साल रखें जाएंगे। उन्होंने बाहर से आए सभी मेहमानों का तहदिल से शुक्रिया करते हुए आगे भी इसी तरह के सहयोग कामना की। उन्होंने कहा कि यहां की कमेटी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में दिलों जान से मेहनत की है। इसलिए वो तारीफ के काबिल हैं।

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