यूरोप यात्रा से लौटे राम मोहन राय और कृष्ण कांता राय का निर्मला देशपांडे संस्थान में भावभीना स्वागत
महात्मा गांधी का संदेश आज भी पूरी दुनिया को शांति, अहिंसा और मानवता की राह दिखा रहा है : राम मोहन राय
BOL PANIPAT । यूरोप की लगभग सवा महीने की यात्रा के बाद स्वदेश लौटे गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव एवं निर्मला देशपांडे संस्थान के निदेशक राम मोहन राय और उनकी पत्नी श्रीमती कृष्ण कांता राय का निर्मला देशपांडे संस्थान में विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा भावभीना स्वागत किया गया।
इस अवसर पर संस्थान की निदेशिका पूजा सैनी ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनकी यूरोप यात्रा न केवल व्यक्तिगत अनुभवों से समृद्ध रही, बल्कि इससे गांधीवादी विचारों, शांति और भारत की सांस्कृतिक एवं मानवीय विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर भी मिला। उन्होंने राम मोहन राय और कृष्ण कांता राय के सकुशल स्वदेश लौटने पर प्रसन्नता व्यक्त की।
राम मोहन राय ने विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ अपनी यूरोप यात्रा के विभिन्न अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि नीदरलैंड सहित यूरोप के विभिन्न स्थानों पर महात्मा गांधी के विचारों के प्रति लोगों में आज भी गहरा सम्मान और आकर्षण है। उन्होंने कहा कि गांधी केवल भारत के नहीं, बल्कि पूरी मानवता के नेता हैं। सत्य, अहिंसा, शांति और आपसी सद्भाव का उनका संदेश आज के हिंसा और तनाव से भरे विश्व में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
उन्होंने बताया कि यूरोप प्रवास के दौरान विभिन्न सामाजिक एवं शांति संगठनों, गांधीवादी कार्यकर्ताओं और मित्रों से मुलाकात हुई तथा विश्व शांति, भारत-नीदरलैंड मैत्री और गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने को लेकर सार्थक संवाद हुआ।
स्वागत समारोह को विद्यार्थियों ने विशेष रूप से आत्मीय बना दिया। संस्थान में अध्ययनरत बच्चों ने अपने हाथों से बनाए हुए सुंदर ग्रीटिंग कार्ड और फूल भेंट कर राम मोहन राय एवं कृष्ण कांता राय का स्वागत किया। बच्चों के इस स्नेह और आत्मीयता से दोनों भावुक हो उठे और उन्होंने विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर संस्थान के विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण आत्मीयता, स्नेह और गांधीवादी मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम के अंत में राम मोहन राय ने कहा कि विदेश यात्रा से लौटकर अपने ही संस्थान के बच्चों के बीच पहुंचना उनके लिए विशेष आनंद और संतोष का विषय है। उन्होंने कहा कि बच्चों के मन में प्रेम, शांति, सद्भाव और मानवता के संस्कार विकसित करना ही महात्मा गांधी और निर्मला देशपांडे के सपनों को साकार करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

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