एस.डी. (पी.जी.) कॉलेज, पानीपत में शिक्षण एवं गैर-शिक्षण मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : डॉ. सुनीता चाँद
BOL PANIPAT , 19 अगस्त 2026, एस.डी. (पी.जी.) कॉलेज, पानीपत में आज दिनांक 19 अगस्त 2026 को शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए “Mental Health Awareness and Well-being Training Programme” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य कर्मचारियों को मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण के प्रति जागरूक करना, विद्यार्थियों के व्यवहार में आने वाले मानसिक एवं भावनात्मक परिवर्तनों को समय रहते पहचानने की क्षमता विकसित करना तथा किसी भी मानसिक स्वास्थ्य संकट की स्थिति में उचित सहायता एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित करना रहा।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में डॉ. सुनीता चाँद, एसोसिएट प्रोफेसर, मनोविज्ञान विभाग, देशबंधु गुप्ता राजकीय महाविद्यालय, पानीपत ने प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व, शैक्षणिक प्रदर्शन, सामाजिक संबंधों तथा जीवन की गुणवत्ता से जोड़ते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल किसी मानसिक बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि व्यक्ति का अपनी भावनाओं, विचारों, व्यवहार और परिस्थितियों के साथ संतुलित एवं सकारात्मक रूप से आगे बढ़ने की क्षमता भी है।
डॉ. सुनीता चाँद ने अपने प्रशिक्षण की शुरुआत “Understanding Mental Health and Well-being” विषय से करते हुए कहा कि आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य को उतनी ही गंभीरता से समझने की आवश्यकता है, जितनी शारीरिक स्वास्थ्य को दी जाती है। विशेष रूप से युवाओं एवं विद्यार्थियों के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विद्यार्थी जीवन में शैक्षणिक दबाव, भविष्य की चिंता, पारिवारिक अपेक्षाएं, सामाजिक संबंध, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और करियर से संबंधित तनाव जैसी अनेक परिस्थितियां सामने आती हैं।
उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान आत्महत्या के विषय पर भी संवेदनशीलता से चर्चा की और बताया कि प्रशिक्षण में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार युवा आयु वर्ग में आत्महत्या की घटनाओं को लेकर विशेष चिंता की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी विद्यार्थी द्वारा स्वयं को नुकसान पहुंचाने अथवा आत्महत्या से संबंधित बात करना कभी भी केवल मजाक या ध्यान आकर्षित करने का प्रयास मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल उसके अभिभावकों, महाविद्यालय के प्राचार्य अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को सूचित कर विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने Mental Health Continuum के माध्यम से समझाया कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल “स्वस्थ” अथवा “बीमार” के दो वर्गों में नहीं बांटा जा सकता। व्यक्ति विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग अवस्थाओं से गुजर सकता है। उन्होंने इसके प्रमुख चरणों को Thriving, Coping, Struggling, In Distress और In Crisis के रूप में समझाया। उनके अनुसार व्यक्ति कभी अच्छा प्रदर्शन करते हुए मानसिक रूप से समृद्ध स्थिति में हो सकता है, कभी सामान्य कठिनाइयों से जूझते हुए उनका सामना कर सकता है और कभी इतनी गंभीर परेशानी में पहुंच सकता है कि उसे तत्काल पेशेवर सहायता की आवश्यकता हो।
विद्यार्थियों की समस्याओं को Bio-Psycho-Social Model से समझने पर दिया जोर
प्रशिक्षण में विद्यार्थियों के मानसिक संघर्ष के कारणों को समझने के लिए Bio-Psycho-Social Model पर विशेष बल दिया गया। डॉ. सुनीता चंद ने बताया कि विद्यार्थियों की समस्याओं को केवल एक कारण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें Biological, Psychological और Social तीनों पहलुओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
जैविक स्तर पर स्वास्थ्य, नींद, हार्मोनल परिवर्तन अथवा अन्य शारीरिक परिस्थितियां प्रभाव डाल सकती हैं। मनोवैज्ञानिक स्तर पर तनाव, नकारात्मक सोच, आत्मविश्वास की कमी, भावनात्मक संघर्ष और असफलता का डर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं सामाजिक स्तर पर परिवार, मित्र, सहपाठी, सामाजिक अपेक्षाएं, आर्थिक परिस्थितियां तथा शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थी के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थी की परेशानी को केवल “पढ़ाई में मन नहीं लग रहा” या “अनुशासन की समस्या” मानने के बजाय उसके पीछे छिपे कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े Stigma और Myths को दूर करने की आवश्यकता
डॉ. सुनीता चंद ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक Stigma और Common Myths पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर समाज में आज भी अनेक गलत धारणाएं मौजूद हैं। मानसिक परेशानी को कमजोरी, चरित्र की कमी या केवल इच्छाशक्ति से जुड़ी समस्या मानना उचित नहीं है। मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सहायता लेना भी उतना ही सामान्य और आवश्यक है जितना किसी शारीरिक बीमारी में डॉक्टर से परामर्श लेना।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यदि कोई बच्चा या विद्यार्थी आत्महत्या करने अथवा स्वयं को नुकसान पहुंचाने की बात करता है तो उसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत उसके माता-पिता/अभिभावकों तथा महाविद्यालय के प्राचार्य या संबंधित जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क करना चाहिए। ऐसी स्थिति में विद्यार्थी को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सहायता प्राप्त करने की दिशा में तुरंत कदम उठाना चाहिए।
Warning Signs की पहचान पर जोर
प्रशिक्षण में “Warning Signs – What to Look For” विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों में मानसिक परेशानी के संभावित संकेतों को पहचानने के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि ये संकेत Academic, Emotional, Behavioural और Verbal स्तर पर सामने आ सकते हैं।
अचानक शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट, पढ़ाई में रुचि कम होना अथवा कक्षाओं से दूरी बनाना Academic संकेत हो सकते हैं। अत्यधिक उदासी, चिंता, चिड़चिड़ापन, निराशा या भावनात्मक अस्थिरता Emotional संकेतों की ओर इशारा कर सकते हैं। व्यवहार में अचानक बदलाव, सामाजिक गतिविधियों से दूरी, अलग-थलग रहना या सामान्य व्यवहार में महत्वपूर्ण परिवर्तन Behavioural warning signs हो सकते हैं। वहीं मृत्यु, स्वयं को नुकसान पहुंचाने या जीवन से निराशा से जुड़ी बातें करना गंभीर Verbal red flags हो सकते हैं, जिन्हें किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
Psychological First Aid : Look, Listen, Link
डॉ. सुनीता चाँद ने संकट की स्थिति में Psychological First Aid के तीन महत्वपूर्ण चरणों Look, Listen और Link को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
Look का अर्थ है व्यक्ति और उसके आसपास की परिस्थितियों का निरीक्षण करना तथा यह समझना कि वह तत्काल संकट में तो नहीं है।
Listen का अर्थ है व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक और बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनना तथा उसकी भावनाओं को समझना।
Link का अर्थ है जरूरत पड़ने पर व्यक्ति को उचित अभिभावक, शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक अथवा मानसिक स्वास्थ्य सेवा से जोड़ना तथा आगे भी उसका follow-up सुनिश्चित करना।
आवश्यकता पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी
डॉ. चाँद ने बताया कि आत्महत्या अथवा गंभीर मानसिक संकट की स्थिति में विशेषज्ञ सहायता लेना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि पानीपत में उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तथा मनोवैज्ञानिक सहायता से संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त Tele-MANAS के टोल-फ्री नंबर 14416 पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है। भारत सरकार के अनुसार Tele-MANAS सेवा 24×7 उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी बताया कि तत्काल चिकित्सा आपातस्थिति में 108 जैसी आपातकालीन सेवा का उपयोग किया जा सकता है। पानीपत जिला प्रशासन की आधिकारिक हेल्पलाइन सूची में 108 को Emergency & Management Disaster Services के अंतर्गत तथा 102 को Ambulance Control Room (Medical Help) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
इस अवसर पर एस.डी. (पी.जी.) कॉलेज, पानीपत के प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से संभव नहीं है, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी समान रूप से आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के साथ प्रतिदिन संपर्क में रहते हैं, इसलिए वे उनके व्यवहार में आने वाले छोटे-से-छोटे बदलाव को भी पहचानने की महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर कॉलेज के सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे|

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