Saturday, August 22, 2026
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शोध से समाज को क्‍या लाभ हुआ, यह सवाल जरूर सामने रखें : डॉ. ब्रह्मजीत सिंह

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 22, 2026 Tags: , , , , ,

पाइट में कंप्यूटेशनल इंटेलीजेंस पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, एनआइटी के निदेश्‍क ने किया प्रेरित

BOL PANIPAT : समालखा : शोध की वास्तविक सार्थकता इस बात से तय होनी चाहिए कि उससे कितनी वास्तविक समस्याओं का समाधान हुआ। शोध का उद्देश्य केवल शोध-पत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज और उद्योग के सामने मौजूद चुनौतियों का व्यावहारिक हल तलाशना होना चाहिए। एनआइटी कुरुक्षेत्र के निदेशक प्रो. डॉ. ब्रह्मजीत सिंह ने यह संदेश पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (पाइट) में कंप्यूटेशनल इंटेलीजेंस पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को दिया।

उन्होंने युवा शोधकर्ताओं को अपने काम का मूल्यांकन केवल प्रकाशनों की संख्या से नहीं करने की सलाह दी। कहा कि शोध करते समय यह सवाल भी सामने होना चाहिए कि विकसित तकनीक या मॉडल वास्तविक जीवन में किस समस्या का समाधान कर सकता है और उससे समाज को क्या लाभ मिलेगा। उन्होंने शोध को प्रयोगशालाओं और शोध-पत्रों से आगे ले जाकर व्यावहारिक उपयोग से जोड़ने के लिए प्रेरित किया। पाइट में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को समापन हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और उभरती तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग पर विचार साझा किए।

700 शोध-पत्र मिले, विशेषज्ञों ने चुने 145

पाइट के निदेशक डॉ.शक्ति कुमार ने बताया कि सम्मेलन का आयोजन बीटेक सीएसई एआइ-एमएल विभाग की ओर से इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर्स के सहयोग से किया गया। सम्मेलन की मुख्य थीम ‘कंप्यूटेशनल इंटेलीजेंस : फ्यूचर ऑफ एडेप्टिव सिस्टम्स’ रही। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों पर कुल 16 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। देश-विदेश से सम्मेलन के लिए लगभग 700 शोध-पत्र प्राप्त हुए। विशेषज्ञों की समीक्षा प्रक्रिया के बाद इनमें से 145 शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण के लिए चयनित किए गए। पहले दिन करीब 75 और दूसरे दिन 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। उन्‍होंने ‘डिजाइन द डिजाइनर’ विषय के माध्यम से ऐसे मॉडल की संभावनाओं पर चर्चा की, जो मशीन लर्निंग और तंत्रिका तंत्र आधारित मॉडल तैयार करने में सक्षम हो।

बदलती चुनौतियों के समाधान में तकनीक महत्वपूर्ण : अशोक गुप्ता

समापन समारोह में एसटीपीआइ गुरुग्राम के निदेशक अशोक गुप्ता ने तकनीक, नवाचार और शोध को तेजी से बदलती चुनौतियों के समाधान के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने तकनीकी शोध को उद्योग और वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ने पर जोर दिया। आइआइटी रोपड़ के प्रो. डॉ. नितिन औलख ने ‘रियल टाइम सिक्योरिटी अवेयर शेड्यूलिंग ऑन द नेटवर्क एज’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने नेटवर्क एज पर होने वाली रियल टाइम कंप्यूटिंग में सुरक्षा चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच प्रभावी कार्यप्रणाली की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

बैंकिंग में बढ़ रही एआइ की भूमिका

सिडनी स्थित वेस्टपैक की सॉल्यूशन आर्किटेक्ट पारूल कुलश्रेष्ठ ने बैंकिंग क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एआइ बैंकिंग सेवाओं, ग्राहक सुविधाओं, निर्णय प्रक्रिया और वित्तीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है। पाइट के डीन प्रो. डॉ. जसबीर सिंह सैनी ने जटिल समस्याओं के समाधान में कंप्यूटेशनल इंटेलीजेंस की भूमिका पर प्रकाश डाला। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. डॉ. अब्दुल कय्यूम अंसारी ने अनिश्चितता और जटिल निर्णय लेने की परिस्थितियों में लॉजिक एवं प्रणालियों की उपयोगिता समझाई। आइआइटी दिल्ली के प्रो. डॉ. रविबाबू मुलावीसेला और डॉ. सुमन सांगवान ने भी शोध एवं तकनीकी विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे।

समाधान देना जरूरी : डॉ. देवेंद्र प्रसाद

बीटेक सीएसई एआइ-एमएल विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र प्रसाद ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटेशनल इंटेलीजेंस का उद्देश्य केवल नए मॉडल विकसित करना नहीं है। इन तकनीकों के माध्यम से समाज और उद्योग की वास्तविक समस्याओं का समाधान तलाशना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ने शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर विचारों के आदान-प्रदान और भविष्य में आपसी सहयोग की संभावनाओं को मजबूत किया। समापन पर आयोजन समिति, वक्ताओं, शोधकर्ताओं, समीक्षकों, प्रतिनिधियों और विद्यार्थी स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की गई।

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