एच-1 एन-1 से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सावधानी, व्यक्तिगत स्वच्छता और समय पर उपचार के माध्यम से संक्रमण प्रभाव को किया जा सकता है कम: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
मौसमी फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क, उपायुक्त ने जारी की स्वास्थ्य सलाह
फ्लू से घबराने की जरूरत नहीं, सावधानी और समय पर उपचार से अधिकांश मरीज हो जाते हैं स्वस्थ
फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर चिकित्सकीय सलाह ले
BOL PANIPAT, 26 अगस्त। मौसमी फ्लू यानी एच-1 एन-1 को लेकर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आमजन को सतर्क रहने की सलाह दी है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से जन-सामान्य के लिए स्वास्थ्य सलाह जारी करते हुए लोगों से फ्लू जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। उपायुक्त ने कहा कि एच-1 एन-1 से घबराने की आवश्यकता नहीं है। सावधानी, व्यक्तिगत स्वच्छता और समय पर उपचार के माध्यम से संक्रमण के प्रभाव को कम किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मौसमी फ्लू एक श्वसन संक्रमण है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने तथा निकट संपर्क में आने से फैल सकता है। अचानक बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर एवं मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और थकान इसके प्रमुख लक्षण हैं। बच्चों में कभी-कभी उल्टी अथवा दस्त की शिकायत भी हो सकती है।
उपायुक्त ने लोगों से अपील की कि खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को रूमाल, कागजी रूमाल अथवा कोहनी से ढकें। साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोने या अल्कोहल आधारित हाथ साफ करने वाले द्रव्य का इस्तेमाल करने की आदत अपनाएं। फ्लू के लक्षण होने पर घर पर रहें और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। आवश्यकता पडऩे पर मास्क का प्रयोग करें, विशेषकर घर में अन्य सदस्यों के साथ साझा स्थानों पर। उन्होंने पर्याप्त आराम करने और तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी। साथ ही स्पष्ट किया कि चिकित्सक की सलाह के बिना जीवाणुरोधी दवा अथवा विषाणु रोधी दवा का सेवन न करें।
सीएमओ विजय मलिक ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 65 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों तथा मधुमेह, हृदय, फेफड़ों, गुर्दे, यकृत या अन्य गंभीर बीमारियों से पीडि़त लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे लोगों में फ्लू की जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। इनमें फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है।
सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर लक्षणों को लेकर भी लोगों को सचेत किया है। सांस लेने में कठिनाई या सांस फूलना, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या बेहोशी, खून मिला बलगम, पेशाब की मात्रा कम होना अथवा पहले से मौजूद बीमारी का अचानक बिगडऩा गंभीर संकेत हो सकते हैं। बच्चों में दूध या खाना न लेना, अत्यधिक चिड़चिड़ापन अथवा असामान्य सुस्ती दिखाई देने पर भी तत्काल स्वास्थ्य संस्थान से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि एच-1 एन-1 का उपचार उपलब्ध है और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयुक्त मरीजों को विषाणुरोधी उपचार दिया जा सकता है। इसलिए गंभीर लक्षणों की स्थिति में उपचार में देरी न करें। उन्होंने आमजन से अपील की कि फ्लू जैसे लक्षण होने पर घबराएं नहीं, स्वयं दवा लेने से बचें और नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लें। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्वच्छता, श्वसन संबंधी सावधानियों और समय पर चिकित्सकीय सलाह को अपनाकर संक्रमण के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है। जनहित में सभी नागरिक स्वास्थ्य विभाग की स्वास्थ्य सलाह का पालन करें और स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार को भी सुरक्षित रखें।

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