खेलों से निखरता है व्यक्तित्व, विद्यार्थियों में बढ़ता है आत्मविश्वास : प्राचार्य सुभाष चंद्र जागलान
राष्ट्रीय खेल दिवस पर महाविद्यालय में खेल प्रतिभाओं ने दिखाया दमखम
टेबल टेनिस, शतरंज और पुश-अप चैलेंज में विद्यार्थियों ने बिखेरा खेल कौशल
पढ़ाई के साथ खेल भी जरूरी, स्वस्थ जीवनशैली का आधार हैं खेल
BOL PANIPAT , 29 अगस्त। देशबन्धु गुप्ता राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में विद्यार्थियों के लिए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी खेल प्रतिभा और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।
इस दौरान टेबल टेनिस, शतरंज, पुश-अप चैलेंज तथा तीन टांगड़ी दौड़ जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुभाष चंद्र जागलान ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल विद्यार्थियों के मानसिक, शारीरिक एवं सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, धैर्य, टीम भावना और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास करने तथा खेलों में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिताओं के परिणामों में टेबल टेनिस में शौर्य ने प्रथम, शरभ और सचिन ने द्वितीय तथा रोहित ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। पुश-अप चैलेंज में सुजल ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि अंकित ने द्वितीय और तरुण ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
शतरंज के बालिका वर्ग में रीना ने प्रथम, मुस्कान ने द्वितीय तथा आंचल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। बालक वर्ग में अंश ने प्रथम, रोनित ने द्वितीय तथा एनोश ने तृतीय स्थान हासिल किया।
खेल प्रभारी दलबीर देशवाल ने प्रतियोगिताओं के समन्वय एवं सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि खेल स्वस्थ जीवनशैली का आधार हैं। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ खेल गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी करनी चाहिए, क्योंकि खेल शरीर को स्वस्थ रखने के साथ व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन में डॉ. रितु नेहरा, डॉ. नरसिंह जांगड़ा, सुनीता चाँद, डॉ. शशिकांता, डॉ. सुनील दत्त, डॉ. दलजीत कुमार, डॉ. शिवम धवन तथा संदीप कुमार ने सहयोग प्रदान किया। सभी ने प्रतियोगिताओं के संचालन, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, अनुशासन व्यवस्था एवं आयोजन से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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