Friday, September 18, 2026
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हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में नशे के विरुद्ध अभियान

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at September 18, 2026 Tags: , , , ,

किसी भी प्रकार का नशा भविष्य के लिए घातक; नशा होता अच्छा माँ कहती खा मेरे बच्चा: डॉ. अशोक कुमार वर्मा

BOL PANIPAT, 18 सितंबर। हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक संजय कुमार, आईपीएस के दिशा-निर्देशों तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त, फरीदाबाद एवं ब्यूरो के पुलिस उप-महानिरीक्षक राजेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस के मार्गदर्शन में प्रदेशभर में नशे के विरुद्ध व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में नशा के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राचार्य विवेक रोहिल्ला की उपस्थिति में कार्यक्रम में 1150 छात्र छात्राओं और 90 वर्ग अनुदेशक एवं अनुदेशक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जागरूकता कार्यक्रम एवं पुनर्वास प्रभारी एवं उप निरीक्षक डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल भाषा में समझाया कि नशीले पदार्थ व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक क्षमता, सामाजिक जीवन, पारिवारिक संबंधों तथा आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

डॉ. वर्मा ने कहा कि नशे की शुरुआत प्राय: जिज्ञासा, मित्रों के दबाव, अनुचित संगति अथवा दिखावे के कारण होती है। कई बार युवा इसे केवल मनोरंजन या शौक समझकर प्रारंभ करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत उनके जीवन को प्रभावित करने लगती है। इसलिए नशे से बचने का सबसे सुरक्षित उपाय यही है कि नशे को न कहना सीखे।

उन्होंने विद्यार्थियों को स्पष्ट किया कि केवल प्रतिबंधित मादक पदार्थ ही हानिकारक नहीं हैं, बल्कि चेतावनी सहित उपलब्ध नशीले पदार्थ भी स्वास्थ्य के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हैं। तंबाकू, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट और अन्य तंबाकू युक्त पदार्थों जैसे हुक्का का सेवन भी स्वास्थ्य को गंभीर क्षति पहुंचाता है। उन्होंने युवाओं में बढ़ते हुक्का सेवन पर विशेष चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हुक्का किसी भी दृष्टि से सुरक्षित नहीं है। इसे मनोरंजन, परंपरा अथवा मित्रों के साथ समय बिताने का साधन समझना युवाओं के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। डॉ. वर्मा ने कहा कि प्रतिबंधित मादक पदार्थों से दूर रहना जितना आवश्यक है, उतना ही आवश्यक हुक्का, तंबाकू तथा अन्य चेतावनी वाले नशीले पदार्थों का त्याग करना भी है। युवाओं को यह समझना होगा कि नशामुक्त जीवन केवल कानून का पालन नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का आधार है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि नशे के कारण शरीर की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, मानसिक एकाग्रता कम होती है तथा शिक्षा और रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नशे की आदत व्यक्ति को परिवार और समाज से दूर कर सकती है तथा परिवार की आर्थिक स्थिति को भी कमजोर कर देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी ऊर्जा शिक्षा, खेल, कौशल विकास, रोजगार, सामाजिक सेवा तथा रचनात्मक कार्यों में लगाने का आह्वान किया। भावनात्मक संदेश देते हुए डॉ. वर्मा ने कहा, नशा होता अच्छा तो माँ कहती—खा ले मेरे बच्चा। उन्होंने कहा कि कोई भी माता अपने बच्चे को नशे की गिरफ्त में नहीं देखना चाहती। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने माता-पिता की आशाओं, अपने जीवन के लक्ष्य और उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए नशे से सदैव दूर रहना चाहिए।

डॉ. वर्मा ने कहा कि नशे के विरुद्ध संघर्ष केवल पुलिस या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर नशे के विरुद्ध जनचेतना उत्पन्न करनी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं नशे से दूर रहने तथा अपने मित्रों और आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को नशीले पदार्थों की बिक्री, तस्करी अथवा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलती है तो राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन 1933 पर निर्भीक होकर सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है। डॉ. वर्मा ने कहा कि नशामुक्त युवा ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला हैं। प्रतिबंधित मादक पदार्थों से दूरी के साथ-साथ हुक्का, तंबाकू तथा अन्य चेतावनी वाले नशीले पदार्थों का पूर्ण त्याग करना भी आज की युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के समापन पर संस्थान  के प्राचार्य विवेक रोहिल्ला ने ब्यूरो का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह बहुत ही लाभप्रद जानकारी थी।

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