Friday, September 18, 2026
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पानीपत में स्थापित होगा विश्व का सबसे ऊंचा महाराजा अग्रसेन ध्वज.

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS SOCIAL , at September 18, 2026 Tags: , , , , , ,

BOL PANIPAT : विश्व का सबसे ऊंचा महाराजा अग्रसेन ध्वज पानीपत में स्थापित होगा।अग्रवाल  संगठन द्वारा इसकी घोषणा की गई। सेक्टर 24 में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पानीपत अग्रवाल संगठन के पदाधिकारियों ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि महाराजा अग्रसेन की समाजवाद विचारधारा का ध्वज समानता का प्रतीक है। शौर्य का प्रतीक है। इस ध्वज की स्थापना पानीपत के अग्रवाल भवन में की जाएगी।अग्रवाल संगठन के संरक्षक रामनिवास गुप्ता एवं अग्रवाल संगठन के ट्रस्टी धनराज बंसल ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि कि वर्तमान अध्यक्ष विकास गोयल, महामंत्री मुकेश गर्ग एवं उनकी टीम इस ऐतिहासिक आयाम को स्थापित करेंगे। विकास गोयल ने इस विषय की जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 100 फुट ऊंचा और 1000 स्क्वायर फीट का ध्वज पानीपत में स्थापित किया जाएगा। यह ध्वज संदेश देगा सामाजिक एकता का, सामाजिक समरसता का, सामाजिक विचारधारा का, समाजवाद की विचारधारा का। हम सबको मिलकर चलना होगा। हम सबको एक दूसरे का सहयोग करना होगा। इस बात का संदेश यह ध्वज देगा।

ध्वज की बनावट और उसका प्रतीकात्मक महत्व
​केसरिया/सूरजमुखी रंग: ध्वज का मुख्य रंग केसरिया (या पीला) होता है, जो त्याग, शौर्य, धर्म और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।
​सूर्य और 18 किरणें: ध्वज के केंद्र में सूर्य अंकित होता है, जिसकी 18 किरणें अग्रवाल समाज के 18 गोत्रों (18 पुत्रों और 18 यज्ञों) का प्रतिनिधित्व करती हैं।
​’एक ईंट और एक रुपया’ का सिद्धांत: ध्वज पर अक्सर ईंट और सिक्के का चित्र अंकित होता है। यह महाराजा अग्रसेन के प्रसिद्ध लोकतांत्रिक समाजवाद का प्रतीक है—जिसके तहत अग्रोहा में आने वाले हर नए परिवार को वहां का प्रत्येक नागरिक ‘एक ईंट’ (घर बनाने के लिए) और ‘एक रुपया’ (व्यापार शुरू करने के लिए) देता था।
​अहिंसा और शांति: महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था, इसलिए यह ध्वज जीवों के प्रति दया और अहिंसा का भी संदेश देता है।
​सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
​एकता का संदेश: यह ध्वज पूरे अग्रवाल/वैश्य समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने का काम करता है।
​कल्याणकारी समाज की प्रेरणा: यह केवल एक जातीय प्रतीक नहीं, बल्कि इस बात का रिमाइंडर है कि समाज में कोई भी व्यक्ति बेघर या बेरोजगार न रहे।

इस अवसर पर राजेश गर्ग,मनमोहन अग्रवाल नीरज सिंगला, अशोक सिंगला, अतुल गुप्ता, गंगाराम मंगला, प्रवीण गुप्ता, गोपाल तायल, पुरुषोत्तम अग्रवाल सीमा अग्रवाल सतपाल  गोयल   राम रतन अग्रवाल, अनिल गर्ग आदि मौजूद रहे.

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