डाहर शुगर मिल की राष्ट्रीय उपलब्धि से पानीपत का बढ़ा गौरव, उपायुक्त ने ग्रहण किया प्रथम पुरस्कार
पानीपत सहकारी चीनी मिल डाहर ने रचा इतिहास, तकनीकी दक्षता में देशभर में प्रथम
94.61 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ पानीपत शुगर मिल को राष्ट्रीय स्तर पर पहला पुरस्कार
61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई से राष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचा पानीपत सहकारी चीनी मिल
BOL PANIPAT , 22 सितंबर। पानीपत सहकारी चीनी मिल डाहर ने तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में देशभर में अपनी अलग पहचान कायम करते हुए इतिहास रच दिया है। वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र में शानदार प्रदर्शन के आधार पर मिल को राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया है। 94.61 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ मिली इस उपलब्धि से जिले का गौरव बढ़ा है। नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में मंगलवार को आयोजित राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में उपायुक्त एवं पानीपत सहकारी चीनी मिल के अध्यक्ष डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हाथों यह प्रतिष्ठित पुरस्कार ग्रहण किया। पानीपत सहकारी चीनी मिल की इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण क्षण माना जा रहा है।
बता दे की वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र के दौरान मिल ने 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की तथा 5.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। मिल ने इस दौरान बिजली का उत्पादन कर करीब 29 करोड़ रुपये की बिजली की बिक्री भी की। तकनीकी दक्षता और क्षमता के बेहतर उपयोग के चलते मिल को राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान हासिल हुआ है।
विदित रहे कि राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ की ओर से वर्ष 2025-26 के दक्षता पुरस्कारों के लिए विभिन्न सहकारी चीनी मिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया गया।
ध्यान रहे कि मूल्यांकन के आधार पर मुख्य निदेशक (शुगर), भारत सरकार की अध्यक्षता वाली पुरस्कार चयन समिति ने परिणाम को अंतिम रूप दिया। पानीपत सहकारी चीनी मिल को तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया। मिल ने 94.61 प्रतिशत क्षमता उपयोग के साथ यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की।
राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ ने दक्षता के आकलन के लिए चीनी मिलों को रिकवरी के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में विभाजित किया था। पानीपत सहकारी चीनी मिल ने तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हुए अग्रणी स्थान हासिल किया।
61.50 लाख क्विंटल गन्ने की हुई पेराई।
पेराई सत्र 2025-26 में पानीपत सहकारी चीनी मिल ने 61.50 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की। यह प्रदेश की 11 सरकारी चीनी मिलों में सबसे अधिक पेराई बताई गई है। इसी अवधि में मिल ने 5.62 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया। इसके अलावा मिल द्वारा बिजली का उत्पादन कर करीब 29 करोड़ रुपये की बिजली की बिक्री की गई। मिल के तकनीकी प्रबंधन, क्षमता उपयोग और उत्पादन के क्षेत्र में किए गए बेहतर प्रदर्शन का परिणाम राष्ट्रीय पुरस्कार के रूप में सामने आया है।
गौरतलब है कि पानीपत में वर्ष 1956 में 18 हजार क्विंटल प्रतिदिन पेराई क्षमता वाली चीनी मिल की शुरुआत हुई थी। समय के साथ पुरानी मिल की सीमित क्षमता के कारण जिले के किसानों को अपना गन्ना प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों तक भेजना पड़ता था। किसानों की मांग को देखते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में डाहर गांव में 50 हजार क्विंटल प्रतिदिन पेराई क्षमता वाला नया गन्ना मिल संयंत्र स्थापित किया। नई क्षमता और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं के चलते मिल के प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ और अब राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी दक्षता का प्रथम पुरस्कार मिलना इसी प्रगति का प्रमाण है।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने इस उपलब्धि पर पानीपत सहकारी चीनी मिल के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार मिल के अधिकारियो,कर्मचारियों और किसानों के संयुक्त प्रयास, मेहनत, लगन और सहयोग का परिणाम है। चुनौतीपूर्ण पेराई सत्र के बावजूद मिल ने तकनीकी दक्षता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है।
उपायुक्त ने कहा कि पानीपत के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। सहकारी चीनी मिल डाहर को राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान पूरे जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने मिल के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का भी विशेष रूप से आभार प्रकट किया।
मिल के प्रबंध निदेशक नवदीप सिंह नैन ने भी इस उपलब्धि को मिल के लिए बड़ी सफलता बताते हुए उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान मिल के अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। राष्ट्रीय स्तर पर मिले इस सम्मान ने पानीपत सहकारी चीनी मिल डाहर की कार्यक्षमता और तकनीकी दक्षता को नई पहचान दी है। यह उपलब्धि न केवल मिल प्रबंधन और कर्मचारियों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पानीपत के किसानों और पूरे जिले के लिए भी सम्मान की बात है।

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