Saturday, October 3, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने जीती कुरुक्षेत्र विश्वविधालय शतरंज चैंपियनशिप में रनर-अप ट्राफी  

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at October 3, 2026 Tags: , , , ,

दो खिलाड़ी आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चेस चैंपियनशिप के लिए चयनित 

शतरंज एक बेहतरीन दिमागी कसरत है जो याददाश्त, एकाग्रता और तार्किक सोच को तेज करती: डॉ अनुपम अरोड़ा

BOL PANIPAT , 03 अक्टूबर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की महिला चेस टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय शतरंज चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के बल पर रनर-अप ट्राफी पर कब्ज़ा किया । इसके साथ-साथ कॉलेज की दो छात्रा खिलाड़ियों नवजिश और मृदुल का आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चेस चैंपियनशिप के लिए भी चयन हो गया है जिसका आयोजन कानपुर (उत्तर प्रदेश) में होगा । कॉलेज की महिला चेस टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय में ओवर आल दूसरा स्थान हासिल किया । एसडी पीजी कॉलेज की टीम ने एम् एन कॉलेज अमला कि टीम को 4-0, आर्य कॉलेज पानीपत की टीम को 3-1 और खालसा कॉलेज यमुनानगर को 4-0 के अंतर से हराया । विजेता छात्राओं का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर स्वागत प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो नीलम, ग्राउंड्समैन राम प्रताप आदि ने किया ।  

एसडी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि शतरंज खेलने से दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है जिससे बुद्धिमत्ता लेवल में सुधार होता है । खेल के दौरान चालों को याद रखने और एकाग्र रहने से मानसिक सतर्कता बढ़ती है जो हमारी स्मृति को मजबूत करती है । शतरंज खिलाड़ियों को दूरगामी परिणाम सोचने और योजना बनाने में निपुण बनाता है । इसके खिलाड़ी सामने वाले की चालों का विश्लेषण कर, समस्या का हल ढूँढना सीखते हैं । सभी विजेता खिलाड़ियों को आशीर्वाद और भविष्य के लिए शुभकामनायें ।

डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि शतरंज एक बेहतरीन दिमागी कसरत है जो याददाश्त, एकाग्रता और तार्किक सोच को तेज करती है । यह रचनात्मकता, योजना बनाने की क्षमता और धैर्य को बढ़ाता है, साथ ही मानसिक तनाव कम करने और बौद्धिक क्षमता में सुधार करने में मदद करता है । शतरंज खेलने से मस्तिष्क का दायाँ हिस्सा सक्रिय होता है जिससे रचनात्मक सोच विकसित होती है । हार-जीत का सामना करने से खिलाड़ियों में आत्म-नियंत्रण, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास बढ़ता है । चेस तनाव को कम करने और मानसिक व्याकुलता को प्रबंधित करने में मदद करता है । दिमाग को सक्रिय रखने के कारण, यह डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है । बच्चों के लिए, यह खेल गणित और विज्ञान जैसे विषयों में तार्किक क्षमता को बढ़ाकर उनका प्रदर्शन सुधारता है । शतरंज हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है और यह एक मनोरंजक ‘माइंड थेरेपी’ की तरह भी काम करता है । 

सभी खिलाड़ियों ने कहा कि उनकी जीत का श्रेय उनके माता-पिता, एसडी कॉलेज प्रबंधकारिणी, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और प्रो सुशीला बेनीवाल को जाता है । उनके माता-पिता सदा उनके साथ खड़े है और कॉलेज से भी उन्हे भरपूर मदद और हौंसला मिला है । वे अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ना चाहते है और इसके लिए वे निरंतर अभ्यास में जुटे हुए है ।

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