एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास हरियाणा प्रांत द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन
–कार्यशाला का विषय: चरित्र निर्माण हेतु करणीय कार्य
–मुख्य वक्ता: जगराम, वरिष्ठ प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं संयोजक, उत्तर क्षेत्र एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र
–उत्तम चरित्र व्यक्ति की सबसे बड़ी संपदा: जगराम
BOL PANIPAT , 17 नवम्बर :
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास हरियाणा प्रांत द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका विषय ‘चरित्र निर्माण हेतु करणीय कार्य’ रहा । कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता जगराम वरिष्ठ प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं संयोजक
उत्तर क्षेत्र एवं पश्चिम उत्तर प्रदेश क्षेत्र ने शिरकत की । अतिविशिष्ट उपस्थिति में डॉ राधे श्याम शर्मा, पूर्व कुलपति सीडीएलयू सिरसा एवं क्षेत्रिय विषय संयोजक, डॉ सुरेन्द्र नागिया प्राचार्य राजकीय महाविधालय घरौंडा, डॉ रेखा शर्मा प्राचार्य जीवन चानना महाविधालय असंध, देवी भूषण प्रांत संयोजक, सुरेन्द्र भारद्वाज संयोजक पानीपत प्रांत, डॉ इप्शिता बंसल भगत फूल सिंह विश्वविधालय खानपुर कलां और डॉ गीता सह-संयोजक पानीपत ने कार्यशाला में भाग लिया । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने शाल ओढाकर तथा पौधा-रोपित गमलें भेंट करके किया । कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा द्वारा गाये ‘वन्दे मातरम्’ गीत के साथ हुई । मंच संचालन डॉ मोनिका खुराना ने किया । कार्यशाला में जगराम ने उपस्थित विद्यार्थियों और प्राध्यापकों के सवालों के जवाब भी दिए ।
जगराम मुख्य वक्ता ने ‘चरित्र निर्माण हेतु करणीय कार्य’ विषय पर जिवंत संवाद किया और इसके निर्माण हेतु 22 सूत्र छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों को बताएं । उन्होनें कहा कि विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करने में कोई कसर न छोड़े । अच्छे चरित्र वाले व्यक्ति को जीवन में सफलता जरुर मिलती है । हमें सत्य और ईमानदारी को जीवन में उतारना चाहिए । अनुशासन, विनम्रता और मेहनत का गुण हमें खुद में पैदा करना चाहिए । आत्म-नियंत्रण, सेवा भाव, प्रेम, सद्भावना और आत्म-निरीक्षण वाले व्यक्ति जीवन में अपना रास्ता खोज लेते है । उन्होनें विद्यार्थियों को अपना लक्ष्य निर्धारित करने को कहा । सकारात्मक सोच और कर्म निष्ठां से हम बुलंदी पर पहुँच सकते है । आत्म-विश्वास, समय के सदुपयोग, सद्भावना और असफलताओं से सीखकर हम अपने चरित्र को ऊँचा बना सकते है । मानसिक और शारीरिक संतुलन भी सफल जीवन जीने में सहायक सिद्ध होता है । चरित्र विकास की प्रक्रिया में निरंतर मूल्यांकन, स्पष्ट और रचनात्मक प्रतिक्रिया, मार्गदर्शन और एक कार्य योजना की आवश्यकता होती है । उत्तम चरित्र व्यक्ति की सबसे बड़ी संपदा है और उत्तम चरित्र से ही व्यक्तित्व आकार पाता है । चरित्र मन को उज्ज्वल करता है । जीवन को संवारता है । चरित्र के प्रभाव से ही लोग मित्र बनते हैं और सुख संपत्ति के मार्ग खुलते हैं । संसार में मनुष्य के पास यदि सभी साधन हैं परंतु आदर्श चरित्र नहीं है तो सब व्यर्थ है । कहते है कि विचार से कर्म की उत्पत्ति होती है, कर्म से आदत की उत्पत्ति होती है, आदत से चरित्र की उत्पत्ति होती है और चरित्र से हमारे कर्म फल की उत्पत्ति होती है । उन्होनें कहा कि अच्छे चरित्र वाला व्यक्ति दूसरे व्यक्ति की आँखों में देखकर बात करता है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि व्यक्ति को योग्यता की वजह से सफलता मिलती है और चरित्र से ही उस सफलता का संरक्षण संभव है । जो सफल व्यक्ति अपने चरित्र को नहीं निखारते उनकी सफलता स्थायी नहीं रहती । रावण और कंस आदि पराक्रमियों के पास अपार शक्ति थी परंतु उनका चरित्र आदर्श नहीं था । ज्ञान के बिना चरित्र का निर्माण नहीं हो सकता । इसलिए शिक्षा के साथ-साथ युवा शक्ति का चरित्र निर्माण आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है । चरित्र के निर्माण में परिवार की अहम भूमिका होती है । माता-पिता जैसा करते हैं वैसा ही बच्चे सीखते हैं । चरित्र को अधिक प्रभावित करने में परिवार के बाद विधालय का परिवेश, सामाजिक रहन-सहन, व्यवहार व वातावरण भी विशिष्ट स्थान रखते हैं । युवाओ को संस्कारित करना पूरे समाज का दायित्व है ।
छात्रा सिया ने पूछा कि हम खुद पर नियंत्रण कैसे कर सकते है जिसके जवाब में जगराम ने कहा कि हमें अपने मन पर काबू रखना चाहिए । हमें भावनाओं के वेग में नहीं बहना चाहिए । आत्म-सुधार के लिए अपनी कमजोरियों को पहचानना और उन पर काम करना भी ज़रूरी है जैसे आत्म-अनुशासन के लिए लक्ष्य निर्धारित करना या विनम्रता के लिए अभ्यास करना ।
कशिश ने पूछा कि हम बुरे लोगों से दूरियाँ कैसे बनाए । जगराम ने कहा कि हमें बुरी संगत से बचना चाहिए न कि बुरे लोगों से दूरियाँ बनानी चाहिए । यदि कोई व्यक्ति बुरा है तो हमें उसे सुधारने का प्रयास करना चाहिए ।
श्वेता ने पूछा कि अच्छे विद्यार्थी में कौन-कौन से गुण होते है जिसपर जगराम ने कहा कि चपलता, ध्यान, अल्पहारी, मेहनत और संतुलन एक अच्छे विद्यार्थी के गुण है । आज बताये 22 सूत्र भी एक आदर्श विद्यार्थी के लिए जरुरी है । हमें प्रभावी चरित्र निर्माण के लिए आत्म-चिंतन, चुनौतियों का सामना करने और रिश्तों को मज़बूत बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ।

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