कुपोषण के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाएगा प्रशासन, हर विभाग रोजाना साझा करेगा प्रगति रिपोर्ट: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
गांव-गांव तक पहुंचेगा कुपोषण मुक्ति का संदेश, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर करेंगे काम
एक जनवरी तक जिले को गंभीर तीव्र कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य, उपायुक्त ने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी
बच्चों के पोषण और स्वस्थ भविष्य से कोई समझौता नहीं, समयबद्ध रणनीति बनाकर मिशन मोड में करें काम
BOL PANIPAT , 6 नवंबर। जिला प्रशासन ने जिले को गंभीर तीव्र कुपोषण से मुक्त बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने शुक्रवार को जिला सचिवालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि बच्चों को कुपोषण से बचाने और गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ प्रभावी ढंग से कार्य करें। सभी विभागों ने आगामी एक जनवरी तक इस लक्ष्य को पूरा करने का संकल्प लिया।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि बच्चों को कुपोषण से मुक्त करना केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी संबंधित विभागों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य कर्मियों और सामुदायिक स्तर पर सक्रिय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह मुश्किल कार्य नहीं है, इसके लिए समयबद्ध रणनीति तैयार करके पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ धरातल पर काम करने की जरूरत है। प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी निर्धारित करे और कार्य की नियमित निगरानी सुनिश्चित करे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग समूह गठित किए जाएं। सभी समूह आपस में समन्वय स्थापित करते हुए प्रतिदिन अपनी प्रगति रिपोर्ट साझा करें। जहां भी किसी प्रकार की समस्या या बाधा सामने आती है, उसकी जानकारी तत्काल साझा की जाए, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि केवल बैठकों तक सीमित रहने के बजाय क्षेत्र में जाकर बच्चों की पहचान, स्वास्थ्य जांच, उपचार और पोषण की स्थिति पर नजर रखनी होगी।
उपायुक्त ने कहा कि गंभीर तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों की समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है। बच्चों के वजन, लंबाई और शारीरिक स्थिति की नियमित जांच की जाए। जिन बच्चों में कुपोषण के लक्षण मिलें, उन्हें तत्काल उचित उपचार और पोषण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। अभिभावकों को भी बच्चों के संतुलित आहार, साफ-सफाई और पोषण संबंधी जरूरी जानकारियां दी जाएं, ताकि उपचार के बाद बच्चे दोबारा कुपोषण की चपेट में न आएं।
एसडीएम मनदीप कुमार ने कहा कि कुपोषण मुक्ति के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को एक साझा कार्ययोजना के तहत काम करना होगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कमजोर एवं कुपोषण के जोखिम वाले बच्चों की पहचान कर उनकी नियमित निगरानी की जाए। आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर तालमेल बनाकर प्रत्येक बच्चे तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाई जाएं। समूहवार जिम्मेदारी तय करने और रोजाना समीक्षा करने से अभियान को गति मिलेगी।
सीएमओ डॉ. विजय मलिक ने बताया कि गंभीर तीव्र कुपोषण से प्रभावित बच्चों के उपचार के लिए सिविल अस्पताल पानीपत में पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित है। यहां बच्चों को चौबीस घंटे चिकित्सा निगरानी, विशेष पोषक आहार, उपचार और देखभाल की सुविधा दी जाती है। बच्चों के साथ रहने वाली माताओं को भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। केंद्र में भर्ती बच्चों के अभिभावकों को पोषण और खानपान के संबंध में प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी घर पर बच्चों की उचित देखभाल जारी रह सके।
बैठक में उपायुक्त ने सभी अधिकारियों से एक जनवरी तक निर्धारित लक्ष्य हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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