एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में बहुविषयक वाणिज्य, अर्थशास्त्र और प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शानदार आयोजन
राष्ट्रीय सम्मेलन में सतत विकास के लिए ‘नीडोनॉमिक्स’ बना मुख्य आकर्षण
की-नॉट स्पीकर: प्रो (डॉ.) एमएम गोयल, पूर्व कुलपति एवं नीडोनॉमिक्स
(आवश्यकताओं का अर्थशास्त्र) स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक
मुख्य-अतिथि: प्रो (डॉ) राकेश कुमार अधिष्ठाता(शैक्षणिक मामले)एवं चेयरपर्सन कंप्यूटर डिपार्टमेंट एवं एप्लीकेशन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र
नीडोनॉमिक्स सामाजिक विज्ञानों की ‘शिरोमणि’ है, जो युक्ति, सिद्धि और मुक्ति का समन्वय करती है: प्रो एमएम गोयल
लालच-प्रेरित विकास से महत्वपूर्ण आवश्यकता-आधारित एवं सद्भावनापूर्ण विकास: प्रो एमएम गोयल
विषय: सतत विकास के लिए वाणिज्य,अर्थशास्त्र और प्रबंधन का तालमेल
पानीपत, 08 अप्रैल: एसडी पीजी कॉलेज में वाणिज्य, अर्थशास्त्र और प्रबंधन विभाग द्वारा एवं उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार द्वारा प्रायोजित ‘सतत विकास के लिए वाणिज्य, अर्थशास्त्र और प्रबंधन का तालमेल’ एक दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय कांफ्रेंस का शानदार आयोजन हुआ जिसका उद्घाटन प्रो (डॉ) राकेश कुमार अधिष्ठाताअकादमिक मामले एवं चेयरपर्सन कंप्यूटर डिपार्टमेंट एवं एप्लीकेशन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र के कर-कमलों से हुआ । की-नॉट स्पीकर के रूप में प्रो (डॉ.) एमएम गोयल, , पूर्व कुलपति (तीन बार), और कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के पूर्व प्रोफ़ेसर एवं नीडोनॉमिक्स (आवश्यकताओं का अर्थशास्त्र) स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक ने अपने ज्ञान को प्राध्यापकों, रिसर्च स्कोलर्स और विद्यार्थियों के साथ बांटा और उनके ज्ञान में वृद्धि की । उपरान्ह के सत्र में डॉ शेफाली नागपाल, निदेशक यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, बीपीएसएमवी खानपुर कलां सोनीपत, प्रो. (डॉ.) सुभाष चंद वाणिज्य विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र और डॉ. प्रेरणा डाबर सलूजा निदेशक प्रशिक्षण, गीता इंस्टिट्यूट ऑफ़ लॉ एंड डीन वेलफेयर गीता यूनिवर्सिटी पानीपत ने अपने व्याख्यानों से सभी को लाभान्वित किया । माननीय मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, जनरल सेक्रेटरी महेंद्र अग्रवाल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राकेश गर्ग ने पौधा-रोपित गमलें भेंट करके किया ।राष्ट्रीय कांफ्रेंस में 168 डेलिगेटस ने पंजीकरण करवाया जिनमे पश्चिम बंगाल, चेन्नई, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान जैसे दूरस्त राज्यों से आये शोधकर्ताओ एवं प्राध्यापको ने भाग लिया ।अंतिम सत्र में रिसर्च स्कोलर्ज ने अपने लिखे शोध-पत्र को सबके समक्ष पढ़ा Iमंच संचालन डॉ दीपिका अरोड़ा ने किया ।
प्रो (डॉ.) एमएम गोयल, पूर्व कुलपति एवं नीडोनॉमिक्स (आवश्यकताओं का अर्थशास्त्र) स्कूल ऑफ थॉट के प्रवर्तक ने वैश्विक चुनौतियों के बढ़ते परिप्रेक्ष्य में वर्तमान विकास प्रतिमानों पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि संपत्ति संचय और उपभोग पर आधारित पारंपरिक मॉडल ने असमानता, पर्यावरणीय क्षरण तथा भौतिक प्रगति और मानवीय कल्याण के बीच बढ़ती खाई को जन्म दिया है।नीडोनॉमिक्स को एक परिवर्तनकारी रूपरेखा के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होनें लालच-प्रेरित विकास से आवश्यकता-आधारित एवं सद्भावनापूर्ण विकास की ओर बदलाव का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि नीडोनॉमिक्स के अंतर्गत इन विषयों का समन्वय बाजार को नैतिकता के साथ, दक्षता को समानता के साथ तथा विकास को सततता के साथ संतुलित कर सकता है। यह दृष्टिकोण जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और सामाजिक असंतुलन जैसी समकालीन समस्याओं के समाधान के लिए अत्यंत आवश्यक है।प्रो. गोयल ने स्पष्ट किया कि अर्थशास्त्र वाणिज्य और प्रबंधन को पोषित करने वाली मातृ-विधा है, जबकि नीडोनॉमिक्स सामाजिक विज्ञानों की ‘शिरोमणि’ है, जो युक्ति, सिद्धि और मुक्ति का समन्वय करती हैऔर इस प्रकार सतत विकास के लिए आवश्यक एवं पर्याप्त दोनों है।बहु-विषयक एकीकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि वाणिज्य को नैतिक आचरण अपनाना चाहिए, अर्थशास्त्र को समानता और सततता को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा प्रबंधन को मूल्यों और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ ‘स्ट्रीट स्मार्ट’मॉडल द्वारा संचालित होना चाहिए।प्रो. गोयल ने कहा कि सतत विकास केवल एक नीतिगत उद्देश्य नहीं, बल्कि एक सामूहिक नैतिक प्रतिबद्धता है, जिसके लिए सार्थक संवाद, निरंतर नवाचार और सिद्धांत तथा व्यवहार के बीच प्रभावी सेतु निर्माण आवश्यक हैI
प्रो (डॉ) राकेश कुमार अधिष्ठाता अकादमिक मामले एवं चेयरपर्सन कंप्यूटर डिपार्टमेंट एवं एप्लीकेशन कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी कुरुक्षेत्र ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। एआई के माध्यम से हम पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक विकास, और सामाजिक समावेशन को बढ़ावा दे सकते हैं।एआई जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद कर सकता है। इसकी मदद्से उद्योगों को अधिक कुशल और उत्पादक बनाया जा सकता है, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।एआई शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में लोगों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने में मदद कर सकता है । उन्होनें कहा कि एआई के विकास और उपयोग में नैतिक और सामाजिक मुद्दों को भी ध्यान में रखना होगा। हमें एआई के विकास में जिम्मेदारी और पारदर्शिता को बढ़ावा देना होगा।
प्रो (डॉ.) सुभाष चंद वाणिज्य विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने कहा कि पुनर्वाणिज्य (रीकॉमर्स) एक ऐसा मॉडल है जो उत्पादों के जीवन चक्र को बढ़ाने और कचरे को कम करने पर केंद्रित है। यह मॉडल तालमेल और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उत्पादों के पुनरुपयोग, पुनर्चक्रण और पुनर्निर्माण को बढ़ावा देता है।पुनर्वाणिज्य संसाधनों का संरक्षण करने में मदद करता है क्योंकि इसमें उत्पादों का पुनरुपयोग और पुनर्चक्रण किया जाता है। पुनर्वाणिज्य आर्थिक लाभ भी प्रदान करता है, क्योंकि यह नए उत्पादों के निर्माण की लागत को कम करता है और रोजगार के अवसर पैदा करता है।फ्लिपकार्ट और अमेज़न ऐसी कंपनियां है जो उत्पादों के पुनरुपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा दे रही हैं।भारत की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना भी उत्पादों के पुनरुपयोग और पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है ।
डॉ शेफाली नागपाल, निदेशक यूजीसी मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर, बीपीएसएमवी खानपुर कलां सोनीपत ने अपना व्याख्यान ‘नवाचार और सततता’ विषय पर दिया । उन्होनें कहा कि नवाचार और सततताका संगम भविष्य की चुनौतियों का समाधान है, जो आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय और सामाजिक विकास को जोड़ता है । यह उत्पादन की रैखिक प्रणाली (बनाओ-इस्तेमाल करो-फेंको) को चक्रीय अर्थव्यवस्था (पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग) में बदलकर स्थिरता सुनिश्चित करता है । सतत नवाचार का अर्थ है, भविष्य की पीढ़ियों का ख्याल रखते हुए आज की जरूरतों को पूरा करना ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि बेशक भारत ने कई क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल की है परन्तु फिर भी हमारे सामने कई चुनौतियां और समस्याएं मुँह बाए खडी हैI सतत विकास की मांग है कि हम अपने साधनों और मानव संसाधनों का समुचित उपयोग करें I
इस कांफ्रेंस के संयोजक डॉ राकेश गर्ग और संगठन सचिव का दायित्व प्रो सविता पुनिया, डॉ दीपा वर्मा,डॉ दीपिका अरोड़ा, और प्रो पवन कुमार ने संभाला Iइनके साथ आयोजन समिति में प्रो मनोज कुमार, प्रो आशीष गर्ग, प्रो पूजा धींगडा, प्रो शिल्पा ठाकुर, प्रोपूजा गर्ग, प्रो रेखा गुप्ता, प्रो ऋतू देवी, प्रो दिशा सैनी, प्रो भावना और प्रो परी जावा शामिल रहे I
इस अवसर पर मीडिया प्रभारी डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, दीपक मित्तल सहित सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे I

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