Friday, July 17, 2026
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 “बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण एवं व्यावसायिक उपयोग” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 27, 2026 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT : आई.बी. स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पानीपत के बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ एवं अर्थशास्त्र विभाग द्वारा संयुक्त रूप से “बौद्धिक संपदा अधिकारों का संरक्षण एवं व्यावसायिक उपयोग” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूट्स इनोवेशन काउंसिल के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार एवं बौद्धिक संपदा के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस महाविद्यालय से  डॉ. सुमनजीत सिंह  रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह, उप-प्राचार्या डॉ. किरण मदान, डॉ. पूनम मदान, सहायक प्रो.अजय पाल,  कनक शर्मा, डॉ. निधि मल्होत्रा एवं  सहायक प्रो. हिमांशी द्वारा भारतीय परंपरा के अनुरूप तुलसी का पौधा भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. सुमनजीत सिंह ने अपने प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान में बौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा को सरल एवं स्पष्ट रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, नवाचार संरक्षण एवं उनके व्यावसायिक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार एक रचनात्मक विचार को कानूनी संरक्षण प्रदान कर उसे आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने तथा अपने विचारों को सुरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सतवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में बौद्धिक संपदा अधिकारों का महत्व अत्यंत बढ़ गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मकता को विकसित करने एवं उसे उचित संरक्षण प्रदान करने हेतु प्रेरित किया तथा कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन उनके बौद्धिक एवं व्यावसायिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। महाविद्यालय की उप-प्राचार्या एवं इंस्टीट्यूट्स इनोवेशन काउंसिल की अध्यक्षा डॉ. किरण मदान ने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूकता विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है तथा ऐसे कार्यक्रम उन्हें नवाचार और सृजनशीलता की दिशा में प्रेरित करते हैं। बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ की अध्यक्षा एवं कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. पूनम मदान ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार आज के प्रतिस्पर्धी युग में नवाचार को सुरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम हैं तथा इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपने विचारों को पहचानने, संजोने और उन्हें व्यावहारिक रूप देने के लिए प्रेरित करते हैं। अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा हिमांशी ने मुख्य वक्ता एवं सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए  कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार नवाचार को आर्थिक रूप देने का सशक्त माध्यम हैं तथा विद्यार्थियों को अपने विचारों को विकसित कर उन्हें सुरक्षित बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ पूनम मदान द्वारा अत्यंत प्रभावी एवं आकर्षक ढंग से किया गया, जिसने पूरे आयोजन को एक विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम को सफल बनाने में बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ के सभी सदस्यों—  सहायक प्रो.कनक शर्मा, डॉ. निधि मल्होत्रा, डॉ. नीतू मनोचा, सहायक प्रो. रुचिका और पूजा का विशेष योगदान रहा।  कार्यक्रम में डॉ. नीलम,  सहायक प्रो. पवन कुमार, डॉ.विक्रम कुमार, सहायक प्रो. अजय पाल, डॉ.राजेश कुमार, डॉ.शर्मिला यादव, डॉ. जोगेश, सहायक प्रो.खुशबू, डॉ. नेहा पुनिया, सहायक प्रो.अश्विनी गुप्ता, मनीत, सुखजिंदर, डॉ.पूजा मलिक, राहुल कुमार, रेखा मलिक,  निशा गोयल, कुलदीप शर्मा,  रूबी, अन्नू बेनीवाल एवं नीतू सहित अन्य प्राध्यापकगण और अन्य कर्मचारीग़ण टिंकू एवं गणेश भी उपस्थित रहे, जिनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को और बढ़ाया। विद्यार्थियों ने इस व्याख्यान में अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया तथा विषय के प्रति गहरी रुचि प्रदर्शित की। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान मुख्य वक्ता द्वारा विस्तारपूर्वक किया गया ,जिससे उनकी विषय के प्रति समझ और जागरूकता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई ।

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