Thursday, April 16, 2026
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विकास गुप्ता प्रधान सचिव शहरी एवं स्थानीय निकाय विभाग हरियाणा की प्रेरणा से ‘प्रदूषण मुक्त हो पानीपत शहर हमारा’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन 

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at August 20, 2024 Tags: , , , , ,

एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव तृतीय पुस्तक मेला’ का चौथा दिन 

साहित्यिक एवं प्राकृतिक रूप से विकसित न हुए तो आर्थिक रूप से विकसित होना बेमानी है: अरुण भार्गव, डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत 

आज हमने पर्यावरण की रक्षा न की तो आने वाली पीढियां हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी: विकल्प 

BOL PANIPAT , 20 अगस्त, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में राज्य स्तरीय सात दिवसीय ‘पानीपत महोत्सव – तृतीय पुस्तक मेला’ जो हरियाणा पुलिस की पहल, जिला प्रशासन के सानिध्य और नगर निगम पानीपत, जिला परिवहन विभाग पानीपत, महिला बाल विकास पानीपत, पंचायत विभाग पानीपत, राजभाषा अनुभाग इंडियन आयल पानीपत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा और आयुष विभाग के सहयोग से आयोजित है, के चौथे दिन बतौर मुख्य अतिथि अरुण भार्गव डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत ने शिरकत की । बतौर मुख्य वक्ता शेरे कश्मीर विश्वविधालय जम्मू से पधारे कृषि विषय में स्कोलर विकल्प ने कार्यक्रम में शिरकत की । उनके साथ प्रदीप कल्याण एग्जीक्यूटिव इंजिनियर म्युनिसिपल कार्पोरेशन और एनके जिंदल पूर्व कार्पोरेशन इंजिनियर ने कार्यक्रम की शोभा बढाई । म्युनिसिपल कार्पोरेशन से मंजीत राठी, अजय छोकर, दीपक और जिला निर्वाचन कार्यालय से हितेश ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ संगीता गुप्ता, डॉ संतोष कुमारी और डॉ राकेश गर्ग ने शाल, पौधा रोपित गमले और पुस्तकें भेंट करके किया । चौथे दिन का थीम ‘प्रदुषण मुक्त हो शहर हमारा’ रहा । कार्यक्रम में व्यवस्था और अनुशासन का जिम्मा राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और अधिकारियों ने संभाला । मुख्य वक्ता विकल्प और अध्यापिका कुसुम लता द्वारा गाये गए गीत और रागिनी को सभी ने सराहा ख़ास तौर पर विकल्प द्वारा पठित कविता ‘शोर इन परिंदों ने मचाया होगा’ की प्रस्तुति बहुत मार्मिक रही । दूसरी तरफ पुस्तक मेले में देशभर से आये 40 से अधिक प्रकाशकों ने हज़ारों की संख्या में अपनी पुस्तकों को प्रदर्शित किया जिसे लेकर छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों और आगुन्तकों में उत्साह नज़र आया । पुस्तक मेला प्रतिदिन सुबह 10 बजे से सांय 7 बजे तक जारी रहेगा जिसमे पानीपत के प्रत्येक नागरिक का पधारने पर स्वागत है । स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स को दर्शकों ने खूब सराहा । इस अवसर पर छात्र-छात्राओं और दर्शकों को प्रदूषण मुक्त पानीपत के सकल्प हेतू शपथ भी दिलाई गई ।

अरुण भार्गव डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर पानीपत ने कहा कि जब तक हम साहित्यिक रूप से खुद को विकसित नहीं करेंगे तब तक आर्थिक रूप से विकसित होने का कोई अर्थ न होगा । पानीपत जैसे नगर में साहित्यिक महोत्सव और पुस्तक मेले का आयोजन अपने आप में एक सकारात्मक और सराहनीय प्रयास है । नगर निगम द्वारा शहर के विकास के लिए बनाए गए कोई भी कार्यक्रम और प्रोग्राम तभी सफल होते है जब लोग भी उनमें भागीदारी करते है । प्लास्टिक के अत्यधिक इस्तेमाल ने शहर का कबाड़ा कर दिया है और इसका निषेध नगर वासियों को ही करना होगा ।

विकल्प मुख्य वक्ता ने कहा कि थिएटर, लोकप्रिय मीडिया आदि पर्यावरण बचाने और संजोने का सबसे बड़ा हथियार है । हमें ऐसी भाषा और जुबान में आमजन से संवाद करना होगा जिसे वे समझते है और जो उन्हें पसंद हो । पानीपत का प्राक्रतिक सूचकांक आज भयंकर खतरे में है और इस आपदा से निजात दिलाने में ऐसे साहित्यिक महोत्सव हमारी खूब मदद कर सकते है । हमारा पर्यावरण, वनशाला, नदियाँ, झीलें आदि सभी हमारी तरफ मुंह बाए खड़े है क्यूंकि इन्हें बचाने की सारी जिम्मेदारी इन्सान पर ही है । कृषि और अपने घरों में अब हमें पर्यावरण अनुकूल जीवन पद्धति अपनानी होगी । पूरी दुनिया ने पर्यावरण और मौसम की ऐसी-तैसी कर दी है और यदि हम अब भी नहीं चेते तो इस बर्बादी के लिए आने वाली पीढियां हमें कभी माफ़ नहीं करेंगी । स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थियों, एनएसएस के स्वयंसेवकों, एनसीसी के कैडेट्स ने जिस कर्तव्य बोध का परिचय इस कार्यक्रम में दिया है उससे उन्हें तस्सल्ली मिली है । 

एनके जिंदल ने कहा कि पानीपत की हवा, पानी और मिट्टी सभी आज बुरी अवस्था में है और इसको बचाने का कार्य केवल सरकार या एम् सी नहीं कर सकता जब तक इस अभियान से लोग खुद को न जोड़े । ठोस अवशिष्ट प्रबंधन, कूड़े को अलग-अलग करके के फैकना, पानी का पुन: इस्तेमाल आदि कुछ ऐसे तरीके है जिनसे हम पानीपत को फिर से जीवित कर सकते है ।   डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि हमें अपने चारों ओर के वातावरण को संरक्षित करने का तथा उसे जीवन के अनुकूल बनाए रखने का प्रयास निरंतर करना होगा । पर्यावरण और प्राणी एक दूसरे पर आश्रित हैं और यही कारण है कि भारतीय चिन्तन में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा उतनी ही प्राचीन है जितना यहाँ की मानव जाति का इतिहास है । पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ सम्बन्ध है । बढ़ते प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और यदि इसे अब भी रोका न गया तो उन्हें भविष्य में मानव सभ्यता का अंत होता दिखाई दे रहा है । पर्यावरण सम्बंधित विषयों पर भी अनेकों पुस्तकें इस मेले में शामिल है जिन्हें पढ़कर हम अपनी प्राकृतिक चेतना का विस्तार कर सकते है ।       

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