Friday, April 17, 2026
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लोकतंत्र के हित में संगठित आवाज बुलंद करनी चाहिए.

By LALIT SHARMA , in Politics , at July 5, 2024 Tags: , , ,

BOL PANIPAT , 5 जुलाई: वामपंथी पार्टियों भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य स्तरीय नेतृत्व की संयुक्त मीटिंग कल रोहतक में हुई। लोकसभा चुनाव उपरांत प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति की समीक्षा और हरियाणा विधानसभा के आगामी चुनाव की रणनीति पर विचार विमर्श इस मीटिंग का मुख्य एजेंडा था। मीटिंग में सीपीआई की ओर से दरियाव सिंह कश्यप एवं पवन कुमार सैनी एडवोकेट और सीपीएम की ओर से सुरेंद्र सिंह, इंद्रजीत सिंह व सविता ने भाग लिया। मीटिंग में लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को विजयी बनाने तथा भाजपा के कॉर्पोरेट- सांप्रदायिक गठजोड़ की ताकत को सीमित करने के लिए प्रदेश भर के वामपंथी कार्यकर्ताओं व जनता द्वारा अदा की गई भूमिका की सराहना की गई।
मीटिंग में हुए विचार विमर्श की जानकारी देते हुए आज यहाँ जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में संयुक्त रूप से कहा गया की प्रदेश में भाजपा के 10 साल के कुशासन की बेदखली सुनिश्चित करने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष व जनतांत्रिक पार्टियों और संगठनों को लामबंद करते हुए परस्पर सीटों का तालमेल करके चुनाव लड़ने की जिम्मेदारी मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की बनती है। इसलिए कांग्रेस के नेतृत्व से यह अपेक्षा की जाती है कि वह माकपा, भाकपा समेत अन्य धर्मनिरपेक्ष पार्टियों को साथ लेने की पहल कदमी करे।
मीटिंग में तय किया गया की प्रदेश भर में दोनों पार्टियों संयुक्त रूप से कार्यकर्ताओं की जिला स्तरीय कन्वेंशन आयोजित करते हुए विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू करेंगी।
मीटिंग में प्रदेश की कानून व्यवस्था के चरमराने और खतरनाक रूप से बढ़ रहे अपराधीकरण के लिए भाजपा की प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। विभिन्न स्तरों पर आयोजित किए जा रहे समस्या समाधान शिविरों को केवल मात्र ढ़कोसला करार देते हुए कहा गया है कि पहले भी इन अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद आम जनता को इस तरह के उत्पीड़न व यातनाओं से गुजारा गया, उसके लिए सरकार की जो जिम्मेदारी बनती है उससे भाजपा शासन पल्ला नहीं झाड़ सकता। मीटिंग में हाल में बनाई गई व लागू की गई न्याय संहिताओं को मानव अधिकारों व नागरिक स्वतंत्रताओं के लिए अत्यंत घातक करार देते हुए वामपंथी नेताओं ने कहा कि इन्हें पारित करने में घोर निरंकुश व अलोकतांत्रिक तरीकों का प्रयोग किया गया। इस संदर्भ में इन्हें वापस लिए जाने की पुरजोर मांग करते हुए कानूनविदों व अन्य तबकों को लोकतंत्र के हित में संगठित आवाज बुलंद करनी चाहिए।
गत मंगलवार को हाथरस में एक तथा कथित धार्मिक आयोजन में कुचल कर मारे गए 121 निर्दोष व्यक्तियों के प्रति दुख प्रकट किया गया और मांग की गई कि निष्पक्ष जांच करके इस भीषण हादसे के लिए जिम्मेदार असली दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।

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