आर्टिफिशल इंटेलीजेंस तकनीक से बढ़ेगा कारोबार और रोजगार
पाइट में मैनेजमेंट स्टडीज डिपार्टमेंट ने कराई अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस, सौ से ज्यादा रिसर्च पेपर चयन किए गए
BOL PANIPAT : समालखा (पानीपत) – कोरोना के कारण पूरी दुनिया पर असर पड़ा है। लॉकडाउन लगने लगा तो एकाएक काम करने के तरीके बदलने लगे। डिजिटलकरण होने लगा। कारोबार को चलाने के लिए जिस तरह की स्किल की जरूरत पड़ने लगी, उसकी तुलना में लोग इतने सक्षम नहीं है। यही वजह है कि बाजार में नौकरियां तो हैं लेकिन योग्य युवा नहीं है। इसी तरह से और भी अनेक दिक्क्तों का सामना करना पड़ रहा है। इन सभी का समाधान यही है कि आर्टिफिशल इंटेलीजेंस यानी एआइ तकनीक पर तेजी से काम करना होगा। सभी को उतनी ही तेजी से सक्षम भी बनाना होगा। कारोबार और रोजगार ही नहीं, स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषय के लिए भी एआइ आवश्यक है। इंसान की उम्र बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस में यह विश्लेषण निकलकर सामने आया है। व्यापार प्रबंधन और अर्थव्यवस्था पर पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी एंड इंजीनियरिंग (पाइट) के डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज ने वर्चुअल कान्फ्रेंस कराई। दो सौ से ज्यादा रिसर्च पेपर पहुंचे, जिनमें से 120 का चयन किया गया। पाइट के वाइस चेयरमैन राकेश तायल और मेंबर बीओजी शुभम तायल सभी रिसर्चर का हौसला बढ़ाया।
कनाडा के स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन मुथाना जोरी, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर की वाइस चांसलर प्रो.सुदेश छिक्कारा, गुरुग्राम से कंपलीनिटी टेक्नॉलोजी के सीईओ सुमित पाहवा और मेलबर्न से ग्लोबल एसोसिएशन डायरेक्टर प्राची मेहंदीरत्ता मुख्य वक्ता रहीं। डीन मुथाना जोरी ने अस्पताल प्रबंधन पर रिसर्च प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन और मरीजों की छोटी-छोटी असावधानी या कमी इंसान की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। अस्पतालों को चाहिए कि वे मरीजों का पूरा डाटा बनाकर रखें। उनका विश्लेषण करते रहें। एआइ के माध्यम से वे मरीजों की समय पर मदद कर सकते हैं। उनकी जान बचा सकते हैं। मरीज को जरूरत नहीं है कि वो हर बार चेकअप के लिए लाइन में लगे। कागज लेकर घूमता रहे। निदेशक प्रो.(डॉ.) शक्ति कुमार ने कहा कि इस तरह के आयोजन से दुनियाभर में क्या बदलाव आ रहा है, इसका पता चलता है। समस्याओं का समाधान क्या निकल सकता है, इस पर शानदार सुझाव सामने आए हैं। उम्मीद है कि इन पर काम होगा और कोरोना जैसी मुसीबतों के बावजूद अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकेंगे। विभाग के अध्यक्ष डॉ.अखिलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि मशीन लर्निंग, मानव संसाधन, ऑपरेटिंग एंड डिसिजन साइंस, मार्केटिंग, फाइनेंस जैसे विषयों पर यूके, यूएसए और एशिया से रिसर्च पेपर आए हैं। सभी ने महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान आकर्षित किया है। यूनिवर्सिटी ऑफ अरकांसस यूएसए से प्रो.शेषाद्री मोहन, नाज कंसलटिंग की सीईओ नाजरीन इब्राहिम, इंटली से ब्रेन ग्लो बिजनेस सर्विस की कार्यकारी निदेशक डा.सुप्रिया शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। डॉ.सुमन, डॉ.अंकुर, जयती, सोनू ने कन्वीनर की भूमिका निभाई।
पांच प्रमुख समस्याएं और उनके समाधान क्या निकलकर आए
1- रोजगार समस्या – डिजिटलकरण के कारण रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है। रोजगार तो हैं लेकिन लोग सक्षम नहीं है। इनकी योग्यता बढ़ानी होगी। नए कोर्स और डिग्रियों पर फोकस करना होगा।
2- फाइनेंस ट्रैकिंग – शेयर मार्केट या म्यूचल फंड में निवेश करने से पहले सतर्क रहें। केवल ऊपरी डाटा को देखकर निवेश न करें, एआइ की मदद से जान लें कि कंपनी की ग्रोथ क्या हो रही है। ग्रे मार्केट पर ध्यान न दें।
3- मेटा वर्ल्ड नाम से एक नई दुनिया बन गई है। इंटरनेट मीडिया का सदुपयोग करें। इस पर अनावश्यक अपना समय न खराब करें। सीखें और आगे बढ़ें।
4- डिजिटल ट्रांजेक्शन पर ध्यान देना होगा। एआइ मॉडल से बाजार भी तेज गति से बढ़ेगा।
5- अस्पताल प्रबंधन में डाटा विश्लेषण आवश्यक है।

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