Thursday, April 16, 2026
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साहित्यिक चेतना का केंद्र बना आर्य कॉलेज. डॉ. हरीश नवल और डॉ. नफस अंबालवी के विचारों ने जीता दिल

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at April 6, 2026 Tags: , , , , ,

BOL PANIPAT, सोमवार 06 अप्रैल 2026, आर्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आज हिंदी साहित्य परिषद् एवं अंकन साहित्यिक मंच, पानीपत के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य ‘वार्ता सह काव्य-संगोष्ठी’ का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों और विद्वानों ने अपनी उपस्थिति से साहित्य की विभिन्न विधाओं पर गहन चर्चा की और काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलित कर की गई।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता, अंतर्राष्ट्रीय व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल ने अपने संबोधन में साहित्य की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खुश रहें और खुश रखें, इस सूत्र वाक्य को जीवन में अवश्य धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का स्वभाव निर्मल होना चाहिए। डॉ. नवल ने हास्य व व्यंग के बीच में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि हास्य निर्मल होना चाहिए और “व्यंग्य में करूणा होनी चाहिए।

मुख्य अतिथि, विश्वविख्यात साहित्यकार डॉ. नफस अंबालवी ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और इस तरह की गोष्ठियां युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने अपनी गजल के माध्यम से कहा कि बेटियां नेकी से मिलती हैं। गज़लकार डॉ. नफ़स अम्बालवी की अध्यक्षता में गज़लों के दौर ने कार्यक्रम को नई ऊंचाइयां दीं।

विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा नवल ने कविता जीवन में स्त्री व पुरूष दोनों ही बराबर का स्थान रखते हैँ। उन्होंने स्त्री को नदी और पुरूष को सागर बताया।

महाविद्यालय की उपाचार्या डॉ.अनुराधा सिंह ने सभी आगंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि आर्य कॉलेज सदैव ही शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। हिंदी साहित्य परिषद् और अंकन मंच का यह साझा प्रयास हमारी भाषाई विरासत को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।”

काव्य रस की वर्षा

संगोष्ठी में कवयित्री अराधना सिंह ‘अनु’ ने श्रृंगार रस की कविताओं से समां बांध दिया, उन्होंने  नारी शक्ति के प्रति सम्मान पर दोहे सुनाकर छात्राओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन (सूत्रधार) डॉ. सोनिया ‘अक्स’ द्वारा किया गया।

हास्य कवि मनु बंदायुनी ने अपनी हास्य रंग की कविताओं से सबको हंसने पर मजबूर कर दिया। वहीं चण्डीगढ से आए शा

यर और गजलकार नवीन नीर ने अपनी गजलों से सबको भाव विभोर कर दिया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन और संयोजन की जिम्मेदारी निभा रहे डॉ. विजय सिंह (अध्यक्ष, परिषद्) ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य साहित्यकारों के अनुभवों को विद्यार्थियों तक पहुँचाना है। आज की संगोष्ठी में वैचारिक विमर्श और काव्य की त्रिवेणी का जो संगम दिखा, वह अद्वितीय रहा। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

इस अवसर पर संरक्षक डॉ. आनंद प्रसाद जैन सहित शहर के प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षक गण और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। 

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