एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में नौवें राज्य स्तरीय “वसंतोत्सव 2023: पुष्प प्रदर्शिनी एवं पुष्प प्रतियोगिता” का रंगारंग आयोजन कल से
रोशन लाल मित्तल, संरक्षक एसडी एजुकेशन सोसाइटी पानीपत (रजि.) करेंगें शुभारम्भ
फूलों की 60 से अधिक किस्में होंगी प्रदर्शित, सेल्फी विद फ्लावर्स एवं रंगोली प्रतियोगिता रहेंगी आकर्षण का केंद्र
BOL PANIPAT , 19 फरवरी.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में दो दिन तक चलने वाले नौवें राज्य स्तरीय “वसंतोत्सव: पुष्प प्रदर्शिनी एवं पुष्प प्रतियोगिता” का भव्य आयोजन कल से प्रात: 10 बजे शुरू हो रहा है. दो दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का उदघाटन एसडी एजुकेशन सोसाइटी पानीपत (रजि.) के संरक्षक रोशन लाल मित्तल करेंगें. गेस्ट ऑफ़ ऑनर में चेयरमैन एसडीवीएम सतीश चंद्रा, चेयरमैन एसडीवीएम सिटी रघुनन्दन गुप्ता, चेयरमैन एसडी इंटरनेशनल स्कूल पवन गर्ग, प्रधान एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल फ़क़ीर चन्द, मैनेजर प्रमोद कुमार बंसल, चेयरमैन एमएएसडी विनोद कुमार गुप्ता, चेयरमैन एपीट एसडी इंडिया उमेश कुमार अग्रवाल शिरकत करेंगे. उनके साथ एसडी एजुकेशन सोसाइटी से अनूप कुमार प्रधान, रोहित गर्ग उप-प्रधान, दिनेश गोयल सेक्रेटरी, सुरेन्द्र कुमार जॉइंट-सेक्रेटरी और निशान गुप्ता ऑडिटर भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे. कॉलेज इस प्रदर्शनी का लगातार नौवीं बार आयोजन कर रहा है. एसडी पीजी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान पवन गोयल, उप-प्रधान मनोज सिंगला, जनरल सेक्रेटरी तुलसी सिंगला, कोषाध्यक्ष विकुल बिंदल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ रवि रघुवंशी माननीय मेहमानों का स्वागत करेंगे. संगठन का उत्तरदायित्व डॉ प्रियंका चांदना, डॉ राहुल जैन और डॉ राकेश गर्ग अदा करेंगे. “वसंतोत्सव: पुष्प प्रदर्शिनी” में हरियाणा प्रदेश और पानीपत जिले के स्कूल, कॉलेज, संस्थान तथा नर्सरियों के माली भाग लेगे. आईओसीएल हर बार की तरह इस बार भी प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहा है. विदित रहे कि यह आयोजन कॉलेज में ही स्थापित “पर्यावरण बचाओ सोसाइटी” के तत्वाधान में हो रहा है और इस बार की प्रतियोगिता में 51 अलग-अलग केटेगरी में पुरस्कार दिए जायेंगे. प्रतियोगिता में भाग लेने का कोई शुल्क नहीं है. वसंतोत्सव: पुष्प प्रदर्शिनी आमजन के लिए दोनों दिन खुला है और दोनों दिन यह प्रात: 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगी. यह जानकारी कॉलेज से जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने दी.
प्रत्येक वर्ष की भाँती इस बार भी सेल्फी विद फ्लावर्स कांटेस्ट का आयोजन किया जा रहा है जिसमे कोई भी प्राध्यापक और प्रतिभागी फूलों के साथ अपनी सेल्फी 9813359499 मोबाइल नंबर पर भेज सकता है. प्रत्येक प्रतिभागी को सिर्फ एक सेल्फी भेजनी होगी जो फ्लावर शो के दौरान ही खिंची गई हो. रंगोली प्रतियोगिता में प्रतिभागी ग्रुप में ही हिस्सा ले सकते है. सभी प्रतियोगिताओ में भाग लेने के लिए पंजीकरण प्रथम दिन प्रात: 9 बजे तक होगा.
वसंतोत्सव 2023 में फूलों की 51 किस्मों में प्रतिभागी अपने गमले और पुष्प के साथ भाग ले सकते है जिनमें एक्रोक्लिनम, एडेनियम, एंटीरिह्नूम, एस्टर, बिगोनिया, बोन्साई, बाउगेनविलिया, कलेनडुला, सेंचुरिया, सरसेनटिया कयुटेजा, क्राईसंथेमम, सिनेरेरिया, कलिएन्थुस, कोर्नफ्लावर, सैक्लामेन, डेजी, डेलफिनियम, डेफोडील, डाईएन्थस, डाईमोर्फोथीका, फ्रीसिया, फुचसिया, गजनिया, जरबेरा, गोड़ेशिया, होलीहोक, ईमपेशंस, केलेन्चो, केल, लिलियम, लिनेरिया, मेरीगोल्ड, मेसेमब्रेन्थिमम, मिमुलस, नास्त्रेशीअम, पैन्सी, पेपर फ्लावर, प्रिमुला, साल्विया, पेटूनिया, गुलाब, कोरनेशन, केकटस, सेज, फोलीएज, जिरेनियम, एनिमोंन, रेननकुलस, डेलिया, गुलदावदी, साइकलामेन, कल्सुलेरिया इत्यादि शामिल है. दुर्लभ प्रकार की प्रजातियाँ जैसे ओर्चिड्स, लिलियम, केसर, आइरिस, लिली, कमंडल के फल भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे. प्रदर्शनी के विजेताओं को नकद इनाम, मुमेंटो और प्रशस्ति पत्र से नवाजा जाएगा.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि कोरोना आपदा ने बिगड़ते पर्यावरण का सच हमारे सामने ला दिया है. अगर हम इस बड़ी महामारी को प्रकृति के साथ जोड़कर देखने की कोशिश करें तो हमें समझ आ जाएगा कि कैसे हम ऐसी विकट घटनाओं को रोक सकते है. वर्तमान में सारे विषाणु आक्रामक रूप ले चुके हैं जिसका सीधा सम्बन्ध कहीं न कहीं प्रकृति से छेड़छाड़ और गत दशकों में वन्य जीवों एवं उनके आवासों पर हमले करने का परिणाम हैं. आज इंसान को अपनी हद तय करनी होगी. समय आ गया है कि इंसान प्रभु, प्रकृति और प्रवृत्ति को अलग न करें. हमारे शास्त्रों में तो हवा, मिट्टी, जंगल, पानी और पेड़-पौधों को देवतुल्य माना गया है. इस पुष्प-प्रदर्शनी के माध्यम से इंसानों में पेड़-पौधों के महत्व को स्थापित करने में मदद मिलेगी. कोरोना आपदा ने इंसान को एक बात तो सिखा दी है कि वह प्रकृति की उपेक्षा करके और इससे दूर रह कर अपना अस्तित्व नहीं बचा सकता है. पानीपत के हर नागरिक से उन्हें प्रकृति को संजोने की अपेक्षा है.

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