Tuesday, April 28, 2026
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एडेड कॉलेजों के स्टाफ के टेकओवर से खत्म हो जाएंगे 10000 से ज्यादा रेगुलर पद- देशवाल

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL Politics , at June 14, 2023 Tags: , , , ,

एडेड कॉलेजों के टेकओवर से बहुत से छात्रों का भविष्य होगा अंधकारमय- देशवाल

एडेड कॉलेज के स्टाफ को टेकओवर ना किया जाए- देशवाल

BOL PANIPAT :- आज छात्र संगठन इंडियन नेशनल स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (इनसो) के छात्र नेता बलराज देशवाल ने बताया की सरकारी सहायता प्राप्त कालेज स्टाफ को  मनोहर सरकार सहायता प्राप्त कालेजो के टेक ओवर पर कार्य कर रही है। यह बहुत गलत है और यह भविष्य में  आत्मघाती कदम हो सकता है
इनसो छात्र नेता बलराज ने बताया की  सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पड़ने वाले विद्यार्थी,  हरियाणा के सभी स्कूलों में पढ़ने वाले कुल विद्यार्थियों के 5% से भी कम थे अतः समाज पर व विद्यार्थियों  पर पड़ने वाला प्रभाव नगणय था
सरकारी सहायता प्राप्त कालेजो में, हरियाणा के कुल कालेज छात्रों के 50 % से भी ज्यादा सरकारी सहायता प्राप्त कालेजो में पड़ते है, अतः समाज व विद्यार्थियों पर इसका निश्चित रूप से प्रभाव पड़ेगा और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में लंबे समय तक कोई नियुक्ति नही हुई थी, सो स्टाफ काफी कम था व ज्यादातर रिटायरमेंट के नजदीक ही थे। जबकि सहायता प्राप्त कालेजो में स्टाफ काफी ज्यादा है।

इनसो छात्र नेता ने बताया की बहुत ही कम फीस में एडेड कॉलेज हरियाणा की जनता को क्वालिटी एजुकेशन उपलब्ध करवाते रहे है। एक समय तो सरकारी कॉलेज नगण्य ही थे तो शिक्षा का पूरा दारोमदार इन्ही एडेड कालेजो पर ही था।एडिड कॉलेज में उपलब्ध सुविधाएं, सरकारी कालेजो की तुलना में बहुत ज्यादा है। ये सुविधाएं UGC, Haryana Govt, अन्य फंडिंग एजेंसियों से मिली पब्लिक मनी से वर्षो की मेहनत से इकठी हुई है। एडिड कालेजो के एक एक विभाग में करोड़ों रु की मूलभूत सुविधाएं है। क्या इन पब्लिक मनी से इकठी हुई सुविधाओं का टेक ओवर भी होगा। अगर नही तो ये सुविधाएं टेक ओवर के बाद विद्यार्थियों को कितनी फीस में मिल पाएंगी

इनसो छात्र नेता ने बताया की जो विद्यार्थी अब 10000 रु के वार्षिक खर्चे में स्नातक स्तर की पढ़ाई पढ़ रहे है वो अगले वर्ष क्या 25000 या ज्यादा फीस दे पाएंगे। मतलब इसका सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों व समाज को ही होगा और एडिड कालेजो में पुरातन विद्यार्थियों का अपने कॉलेज से जुड़ाव मुख्यतः वहां के रेगुलर स्टाफ की वजह से होता है। टेक ओवर के बाद तो इन कालेजो में टीचर रेगुलर नही आया राम गया राम होंगे। पुरातन विद्यार्थी ई किसी भी संस्था के मजबूत स्तंभ होते है, कई बार तो करोड़ों रु का अनुदान इन एडिड कालेजो को मिला है पुरातन विद्यार्थियों से। सरकारी कालेजो में स्टाफ बार बार तब्दील होता रहता है तो कालेज और पुरातन विद्यार्थियों के बीच मे कोइ विशेष बॉन्डिंग हो ही नही पाती। तबादलों की वजह से ही सरकारी कालेजो में कोई भी शिक्षक अनुसंधान की सुविधाएं जुटाने की नही सोचता क्योंकि 4 या 5 साल में वो जब तक सुविधाएं जुटाता है उसका तबादला हो जाता है एडिड कालेजो में स्टाफ की स्थिरता की वजह से ही अनुसंधान की मूलभूत सुविधाएं विकसित हो पाई हैं। और इन्ही के वजह से बहुत सारे एडेड कालेजो को NAAC से अच्छा ग्रेड मिला है।

इनसो छात्र नेता ने बताया की  क्या 3000 लोगो के फायदे के लिए हरियाणा में शिक्षा की गाड़ी पटरी से उतर जाएगी। समझ से बाहर ये है कि क्या यही एक समाधान है एडिड कालेजो के स्टाफ की समस्याओं का।
नही नही और भी बहुत कुछ हो सकता है। क्या 3000 के करीब इन कालेजो के स्टाफ को govt के स्टाफ के बराबर सुविधाए नही दी सकती। आखिर इन कालेजो का अभूतपूर्व योगदान है उच्चतर शिक्षा का मौलिक ढांचा खड़ा करने में। बहुत मुश्किल आएंगी जब 25 साल की सर्विस वाला एसोसिएट प्रोफेसर टेकओवर के बाद सरकारी कालेज में कुछ समय पहले लगे असिस्टेंट प्रोफेसर से भी जूनियर माना जाएगा। अगर seniority दी गई तो सरकारी कालेज वाले टीचर नाराज। आखिर सरकार इस पचड़े में पड़ना ही क्यों चाहती है। क्या अनुदान और जगह सरकार नही देती।

इनसो छात्र नेता ने बताया की  ज्यादातर स्कूल कालेज संस्थाओं के है तो क्यो न पूरा कालेज ही टेक ओवर कर लिया जाए सारी सुविधाओ समेत। क्या इस देश मे बैंको का अधिग्रहण नही हुआ था अगर सिर्फ अधिग्रहण ही एकमात्र इलाज है तो उन छोटे छोटे कालेजो के स्टाफ का करे जहाँ 10 या कम टीचर है। SD कालेज अम्बाला, दयाल सिंह कालेज करनाल, DAV करनाल, आर्य कालेज पानीपत, SD कालेज पानीपत, हिन्दू कालेज व GVM कालेज सोनीपत, जाट कालेज व वैश्य कालेज रोहतक, MLN व खालसा कॉलेज करनाल, DN कालेज हिसार जैसे प्रतिश्ठित कालेजो में बाकी के छोटे कालेजो के स्टाफ को समायोजित करके इनको और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है और टेकओवर के बाद रेगुलर पोस्टों का तो कालेजो में वर्षो तक टोटा ही पड़ जायेगा, तो नए योग्य उम्मीदवारों का तो भविष्य अंधकारमय होगा ही
फैसला तो सरकार को ही लेना है। पर किसी के दबाव में न आकर हरियाणा में उच्चतर शिक्षा के भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

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