संविधान भारत की आत्मा है तो संविधान की प्रेरणा स्त्रोत वाल्मीकि रामायण है : डॉ. सुरेंद्र जैन
BOL PANIPAT : भारतीय संविधान भारत की आत्मा में बसता है वहीं संविधान की रचना के प्रेरणा स्त्रोत महर्षि वाल्मीकि है। जिन्होंने विश्व को अद्भुत ग्रंथ के रूप में वाल्मीकि रामायण दी।
यह उदगार विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने अपने संबोधन में एसडी कॉलिंज के सभागार में संविधान दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संविधान की पालना व वाल्मीकि रामायण की शिक्षाओं का अनुसरण करके हम लोग कल्याणकारी राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
डॉ सुरेंद्र जैन ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में राष्ट्र के प्रति प्रेम की पराकाष्ठा जहां हमें राष्ट्र के प्रति अपने दायित्व का बोध कराती है वही वाल्मीकि रामायण में राष्ट्रद्रोह के प्रति कठोर दंड का निर्देश भी देती है। स्मरण रहे कि श्री वाल्मीकि महासभा एवं विजन फाउंडेशन की ओर से संविधान दिवस के अवसर पर ” वाल्मीकि रामायण के परिप्रेक्ष्य में भारतीय संविधान ” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया था जिसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार ने की इस अवसर पर राष्ट्रीय चिंतक राजेश कुमार, सांसद संजय भाटिया, राघव संजीव घारू, रमेश विकल महाराज ने भी अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विधायक महिपाल ढांडा, डॉ अर्चना गुप्ता गजेंद्र सलूजा मेयर अवनीत कौर प्राण रत्नाकर ने भी अपना संबोधन दिया। मंच संचालन पार्षद पवन गोगलीया ने किया।
इस मौके पर बसंत बोहत, मनोज चेयरमैन बृजपाल सरपंच विनोद पार्षद समालखा, राजकुमार बिगानिया, उमेश गुप्ता ,राजीव लिडलान, सुरेश कागड़ा ,व काफी संख्या में प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

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