एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का दूसरा दिन
–एसडी कन्या महाविधालय नरवाना (जींद) द्वारा ‘हरिश्चंद्र तारामती’ सांग का मार्मिक एवं शानदार प्रदर्शन
–हरियाणवी सांग देखने कॉलेज में उमड़ा जन सैलाब
–लड़कियों द्वारा प्रस्तुत सांग ने सांग विधा में की एक नई परंपरा की शुरुआत, पहला सफलतम प्रयोग
पानीपत, 19 मार्च,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र द्वारा प्रायोजित चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव के दूसरे दिन एसडी कन्या महाविधालय नरवाना (जींद) की सांग टीम ने ‘हरिश्चंद्र तारामती’ सांग की शानदार प्रस्तुति दी जिसकी विशेषता लड़कियों द्वारा प्रस्तुत सांग ने इस विधा में एक नई परंपरा की शुरुआत की और उनका यह प्रयोग बिल्कुल सफल रहा । यही शिक्षा के आधुनिकीकरण का द्योतक है । आज ही एनएसएस के सात दिवसीय कैंप का दूसरा दिन रहा जिसमें स्वयंसेवकों ने सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हुए सांग के आयोजन में हिस्सा लिया । कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि जाने-मने सांगी 80 वर्षीय आचार्य गोर्धन शर्मा ग्राम सिवाह, आचार्य महाबीर शर्मा ग्राम नारायण, नरेंद्र गर्ग प्रचारक दादा लख्मीचंद सोशल वेलफेयर ट्रस्ट पानीपत और चौधरी रणबीर सिंह टाया ने शिरकत की । मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और डॉ संगीता गुप्ता ने पुष्प-रोपित गमलें भेंट करके किया । 18 से 21 मार्च तक चलने वाले चार दिवसीय सांग महोत्सव में प्रत्येक दिन एक सांग पेश किया जा रहा है । विदित रहे कि करनाल जोन का यह रत्नावली युवा सांग महोत्सव आयोजित करने का जिम्मा एक बार पुन: एसडी कॉलेज को मिला है । 75 कालेजो वाले इस जोन में उन चार कालेजो के सांगो को दिखाने के लिए चुना गया है जिन्होनें कुरुक्षेत्र में आयोजित रत्नावली फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ चार स्थानो पर कब्ज़ा किया था । आज भाग लेने वाली प्रतिभागी टीम को 35 हज़ार रुपये का पुरस्कार दिया गया । मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता ने किया ।
आज एसडी कन्या महाविधालय नरवाना (जींद) के कलाकारों ने ‘हरिश्चन्द्र तारामती’ सांग का मार्मिक एवं अविस्मर्णीय प्रदर्शन किया । राजा हरिश्चंद्र की भूमिका मोनिका ने, रानी मदनावत की समीना ने, नकवी की प्रीती ने, रोहतास की कोमल ने, कालिया की मंजीत ने अदा की । नृत्य में नीशू, अंजलि, शीनू और ख़ुशी ने साथ दिया । सांग के डायरेक्टर प्रो जसबीर उझाना संगीत विभाग रहे और यह सांग पंडित लख्मीचंद चंद द्वारा लिखा गया है । साजिंदों में सोनू भगाना, सुशील, रमेश, सुभाष, मनदीप और जसबीर ने महफ़िल जमाई । प्रो मनीषा और प्रो कांता जागलान ने कलाकारों का मार्गदर्शन किया ।

सांग महोत्सव का आकर्षण दूर-दराज के गावों से बुजुगों और हरियाणवी बोली जानने-समझने वाले दर्शको को भी अपनी तरफ खेंच लाया । चाय की चुस्कियों के साथ उन्होनें पूरे सांग का बड़े ध्यान के साथ लुत्फ़ उठाया ।
दीपक कुमार (जींद वाले) आज के सांग को देख कर गदगद नज़र आये और उन्होनें कहा कि इतनी उच्च कोटि की कहानी और ऐसी पेशकश उन्होनें अपने पूरे जीवन में नहीं देखी है । कॉलेज के ये कलाकार मझे हुए कलाकारों से किसी भी मायने में कम नहीं है । धर्मपाल सिंह इसराना, दलबीर सिंह अटावला, राजेंदर कौशिक पानीपत, सुरेन्द्र लटवाल, प्रकाश मान कवि, नफे सिंह कुंडू, सतबीर सिंह धीमान, हरी भक्त शर्मा, मनोज कुमार आजमगढ़ (यूपी), मुकेश पुनिया बुपनिया, बाबू राम, ओम प्रकाश पूठर, लालू राम बरसात रोड पानीपत आदि ने भी आज के सांग का भरपूर आनंद लिया । सभी ने कहा कि बेशक युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में आ रही है परन्तु जीवन में कामयाबी और सच्ची ख़ुशी उन्हें अपने ही लोक साहित्य और संस्कृति से मिलेगी । ज्यादा जिम्मेदारी अब युवा वर्ग की ही है ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने भी पानीपत की जनता से आग्रह किया कि वे कॉलेज में पधार कर इन प्रस्तुतियों को देखे और कॉलेज को अनुग्रहित करे ।
कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि सांग महोत्सव से छात्र-छात्राओं को हरियाणवी संस्कृति, लोक काव्य और कला के बारे में तो सिखने को मिलेगा ही, साथ ही नए-नए विषयों और समस्याओं एवं उनके उत्तरों के बारे में भी उन्हें जानने को मिलेगा । नैतिकता, एकता और प्रेम युक्त समाज की स्थापना भी तभी हो पाएगी । हरियाणवी भाषा और इसके शिल्प का कोई सानी नहीं है । जितनी सटीकता और असर हरियाणवी भाषा में है उतनी किसी अन्य भाषा में नहीं है । हमारे युवाओं को हर जिम्मेदारी को समझ कर निभाना होगा । हरियाणवी भाषा की वाकपटुता और हाजिरजवाबी के कारण इसका असर भी दर्शको पर अधिक होता है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आज पेश किया गया सांग अपने आप में उच्च कोटि का रहा । इसका न सिर्फ विषय बहुत प्रासंगिक था बल्कि कलाकारों का प्रदर्शन भी लाजवाब रहा । हरियाणा की संस्कृति काफी प्राचीन है समय की मांग है कि इसे पुन: एक नई पहचान के साथ स्थापित किया जाए और ऐसा करने में सबसे बड़ा योगदान युवाओं को ही करना है । यही आज के सांग ने दिखाया भी है । युवाओं को ही प्रदेश की संस्कृति की मशाल अब उठानी है । यदि हमने अपनी जड़े खो दी तो हमारा भविष्य भी अंधकारमय हो जाएगा ।

आज की प्रस्तुति में एसडी कन्या महाविधालय नरवाना (जींद) की होनहार छात्राओं ने ‘हरिश्चन्द्र तारामती’ कहानी पर आधारित सांग को मार्मिक और शानदार तरीके से पेश किया । ‘हरिशचन्द्र तारामती’ के मंचन को कॉलेज प्रांगण में देखने को ग्रामीण उमड़ पड़े । आज के मंचन में बताया कि स्वयं विष्णु भगवान एक साधु का वेश धारण करके राजा हरीशचंद्र की सत्यता की परख करने और उनकी कठोर परीक्षा लेने के लिए वे राजा, पत्नी तारामती, पुत्र रोहतास को अलग-अलग स्थानों पर भेज देते है और तीनों ही अपनी-अपनी सत्यता पर खरे उतरते है । तब भगवान प्रकट होकर कहते कि सत्यता की जांच के लिए ही उन्होनें यह अवतार लिया था । सांग के अंत में तारा कहती है कि उसकी स्थिति से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है । वह एक बिकी हुई दासी है जिसके पास कफन तक के पैसे नहीं है और तन ढकने को भी सिर्फ एक ही साड़ी है । इसमें से आधी वह अपने कलेजे के टुकड़े अपने बेटे रोहतास के कफन हेतू दे देती है और बाकी आधी से वह अपने तन को ढ़ककर अपनी लाज की रक्षा करती है । हरिश्चंद्र की परीक्षा की यह अंतिम सीमा है और ज्योहीं तारामती कफन हेतू साड़ी फाड़ने को उद्धृत होती है समस्त देवता वहां प्रकट हो जाते है और तारा को रोककर रोहतास को जीवनदान दे देते है । हरिश्चंद्र के त्याग, धैर्य और सत्यपालनता की सभी सराहना करते है । इस सांग को देखकर सभी दर्शक भावुक हो गए और उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया ।
इस अवसर पर डॉ नवीन गोयल, प्रो राकेश सिंगला, डॉ संगीता गुप्ता, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ सुरेन्द्र कुमार वर्मा, डॉ राकेश गर्ग, डॉ दीपिका अरोड़ा, डॉ रेखा रानी, प्रो संजय चोपड़ा, डॉ वीरेंद्र गिल, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो बलजिंदर सिंह, शशि मोहन गुप्ता, दीपक मित्तल समेत स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे ।

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